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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Jammu Kashmir: High Court cancels Village Defense Group policy, SPO will get 18 thousand

जम्मू-कश्मीर: हाईकोर्ट ने विलेज डिफेंस ग्रुप नीति को किया रद्द, एसपीओ को 18 हजार रुपये ही मिलेगा मानदेय

Fri, 07 Apr 2023 01:48 AM IST
विमल शर्मा जेएनएफ, जम्मू
जेएनएफ, जम्मू Published by: विमल शर्मा Updated Fri, 07 Apr 2023 01:48 AM IST
सार

उच्च न्यायालय के न्यायाधीश संजीव कुमार ने इस मामले से जुड़ी विभिन्न याचिकाओं को मंजूर कर सुनवाई के बाद यह फैसला दिया। नई वीडीजी पॉलिसी को 2022 में लागू किया गया था। 

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Jammu Kashmir: High Court cancels Village Defense Group policy, SPO will get 18 thousand
highcourt srinagar - फोटो : फाइल

विस्तार

प्रदेश सरकार की विलेज डिफेंस ग्रुप (वीडीजी) नीति पर रोक के तीन महीने बाद जम्मू-कश्मीर व लद्दाख उच्च न्यायालय ने वीरवार को इस पॉलिसी को रद्द कर दिया। इसके साथ ही पुरानी वीडीसी नीति को प्रभावी रखने के आदेश दिए। साथ ही संबंधित एसपीओ को इस योजना के तहत ही आर्थिक लाभ देने के लिए कहा गया है। 

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उच्च न्यायालय के न्यायाधीश संजीव कुमार ने इस मामले से जुड़ी विभिन्न याचिकाओं को मंजूर कर सुनवाई के बाद यह फैसला दिया। नई वीडीजी पॉलिसी को 2022 में लागू किया गया था।  नई नीति से प्रभावित होने वाले एसपीओ की याचिकाओं के बाद उच्च न्यायालय ने 4 जनवरी 2023 को नई नीति पर रोक लगा दी थी।
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हाईकोर्ट के इस फैसले से चार हजार से अधिक एसपीओ को लाभ मिलेगा। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश संजीव कुमार ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि जब काम एक ही तरह का है तो मानदेय कैसे घटा सकते हैं। याचिकाकर्ता की दलीलें वाजिब हैं।
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एक ही तरह के काम को लेकर मानदेय को 18000 से घटाकर 4500 रुपये प्रतिमाह कैसे किया जा सकता है। लिहाजा याचिकाकर्ता को पहले की तरह मानदेय दिया जाए। इस न्यायालय ने दोनों योजनाओं की सावधानीपूर्वक जांच की।

दोनों के बीच प्रासंगिक प्रावधानों को पढ़ा और पाया कि यह योजना एसपीओ के रूप में उनकी स्थिति से वंचित करती है। परिणामस्वरूप उनके पारिश्रमिक/ मानदेय को कम कर देती है। एसपीओ को प्रति माह 18000 रुपये मिलता था, जो पुलिस थानों और विशेष अभियान समूहों में काम करने वाले एसपीओ के बराबर था।  

कोर्ट ने कहा कि सरकार की नई नीति के तहत 4500 प्रति माह न केवल शक्तियों का मनमाना प्रयोग है। कोर्ट ने प्रतिवादियों को यह भी निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ताओं को एसपीओ के रूप में मानें, जिन्हें 1995 की ग्राम रक्षा समिति योजना के तहत नियुक्त किया गया है।

विशेष रूप से, मानदेय के भुगतान के संबंध में। उन्हें पुलिस में काम करने वाले उनके समकक्षों और वीडीजी के सदस्यों      के अधिकार के रूप में पारिश्रमिक मिलता रहेगा। बता दें कि विलेज डिफेंस कमेटियों (वीडीसी) में काम करने वाले एसपीओ ने हाईकोर्ट में सरकार की नई पालिसी विलेज डिफेंस ग्रुप को चुनौती दी थी।


याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि वीडीसी को एसपीओ के नेतृत्व में चलाया जाता है, जिसे 18000 रुपये प्रतिमाह मानदेय देने का प्रावधान है। लेकिन नई नीति के तहत उन्हें मात्र 4500 रुपये मिलेंगे जो अन्याय है। एसपीओ की नियुक्ति पुलिस अधिनियम के तहत की गई है। सरकार ने वीडीसी की जगह विलेज डिफेंस ग्रुप योजना लागू कर एसपीओ का मानदेय 18000 रुपये से घटाकर 4500 कर दिया था।

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