जम्मू-कश्मीर सरकार बाहरियों को नौकरी देने की कर रही समीक्षा, नियमों के तहत होगी भर्तीः रोहित कंसल
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राज्य सरकार गैर जम्मू-कश्मीरियों को नौकरी देने के मामले की समीक्षा कर रही है। राज्य में बाहरी लोगों को नौकरियों के लिए आमंत्रित करने पर राज्य सरकार के प्रवक्ता रोहित कंसल ने कहा कि सरकार ने इस मुद्दे पर विभिन्न सुझाव हासिल किए हैं। इन पर विचार किया जा रहा है। बेरोजगार युवाओं की खाली पदों पर नियमों के तहत भर्ती की जाएगी।
जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट ने 33 पदों के लिए भर्ती के लिए देश के किसी भी हिस्से से उम्मीदवारों के आवेदन आमंत्रित किए हैं। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार सभी पद नॉन गैजेटेड हैं।
इसमें सीनियर स्केल स्टेनोग्राफर, जूनियर स्केल स्टेनोग्राफर, स्टेनो टायपिस्ट, कंपोस्टा, इलेक्ट्र्र्रिशियन और चालक शामिल हैं। 26 दिसंबर से शुरू हुई प्रक्रिया में 31 जनवरी तक आवेदन किए जा सकेंगे। संबंधित जिलों के जिला जज अपने अपने जिले के आवेदन हासिल करेंगे।
जो लोग जम्मू कश्मीर, लद्दाख के बाहर से हैं, वे रजिस्ट्रार के पास आवेदन जमा कराएंगे। किश्तवाड़, भद्रवाह, लद्दाख के उम्मीदवारों के आवेदन लेने के लिए संबधित जिलों के जजों को 6 फरवरी आवेदन जमा करके देने को कहा गया है। उम्मीदवारों को चयन जेएंडके आरक्षण नियम 2005 के तहत होगा।
नव वर्ष के आरंभ के साथ ही सरकार के खिलाफ उग्र आंदोलन की शुरुआतः पैंथर्स कार्यकर्ता
वहीं केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में सरकारी नौकरियों में देश के अन्य हिस्सों के उम्मीदवारों से आवेदन लिए जाने के फैसले पर पैंथर्स कार्यकर्ता भड़क उठे हैं। उन्होंने इसका विरोध जताते हुए मंगलवार को प्रदेश अध्यक्ष बलवंत सिंह मनकोटिया के नेतृत्व में उपायुक्त कार्यालय के निकट सलाथिया चौक पर धार रोड जाम कर प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर इस तरह के विज्ञापनों को रद्द करने के साथ ही रोक लगाकर जम्मू कश्मीर के युवाओं के अधिकार को आरक्षित नहीं किया गया, तो नव वर्ष के आरंभ के साथ ही सरकार के खिलाफ उग्र आंदोलन की शुरुआत कर दी जाएगी।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बलवंत सिंह मनकोटिया ने कहा कि जम्मू कश्मीर की सरकारी नौकरियों के संबंध में दिसंबर में पर्यटन विभाग और हाईकोर्ट में निकाले गए अलग-अलग विज्ञापनों में देश के अन्य हिस्सों के लोगों को भी आवेदन किए जाने की छूट रखी गई है। जो जम्मू कश्मीर के बेरोजगार युवाओं के अधिकारों का हनन है। इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।