जम्मू कश्मीर: वित्त आयुक्त ने नहीं माना हाईकोर्ट का आदेश, दस हजार का लगा जुर्माना और कोर्ट में होंगे पेश
14 अक्तूबर 2022 को हाईकोर्ट में स्टाफ की कमी पर जवाब देने के लिए वित्त आयुक्त को 3 हफ्तों का अंतिम मौका दिया गया था, लेकिन इस पर अमल नहीं हुआ। इस मामले पर न्यायाधीश ताछी रबस्टन और राजेश सेखरी की खंडपीठ ने मामले पर सुनवाई की।
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हाईकोर्ट का आदेश न मानने पर वित्त आयुक्त पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। साथ ही उन्हें निजी तौर पर कोर्ट में पेश होने को कहा है। वह आकर बताएंगे कि उनके आदेश का अब तक पालन क्यों नहीं हुआ।
14 अक्तूबर 2022 को हाईकोर्ट में स्टाफ की कमी पर जवाब देने के लिए वित्त आयुक्त को 3 हफ्तों का अंतिम मौका दिया गया था, लेकिन इस पर अमल नहीं हुआ। शुक्रवार को इस मामले पर न्यायाधीश ताछी रबस्टन और राजेश सेखरी की खंडपीठ ने मामले पर सुनवाई की।
बता दें कि हाईकोर्ट की बेंच पीठ के सचिव जोगिंदर सिंह ने हाईकोर्ट में स्टाफ की कमी और वेतन विसंगतियों को दूर करने संबंधी याचिका दायर की थी। 14 अक्तूबर को वकीलों की दलीलें सुनने के बाद तीन हफ्तों का समय दिया गया था।
आदेश में कहा गया कि तीन हफ्तों के भीतर इसमें जरूरी कार्य पूरा करें, लेकिन अब तक इस पर कोई अमल नहीं हुआ। इसमें यह भी कहा गया कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो दस हजार रुपये का जुर्माना लगेगा। बावजूद इसके आदेश पर अमल नहीं हुआ।
इस पर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया और इसे कर्मचारी वेलफेयर फंड में जमा कराने का आदेश दिया।
पहाड़ी विकास बोर्ड के सदस्य को सुरक्षा देने से इन्कार
कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के रहने वाले राजनेता और पहाड़ी सलाहकार बोर्ड के सदस्य नूर मोहम्मद शाह को सुरक्षा नहीं मिलेगी। शाह से सुरक्षा वापस ले ली गई थी और इसको दोबारा बहाल करने की अपील शाह ने कोर्ट में की थी।
इस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि सुरक्षा समीक्षा कोआर्डीनेशन कमेटी के फैसले पर हाईकोर्ट अपना फैसला नहीं थोप सकती। शाह को एक्स 2 श्रेणी की सुरक्षा मिली थी। उन्होंने इसे बहाल करने व इसमें संशोधन कर वाई श्रेणी की सिक्योरिटी मांगी।
हाईकोर्ट में अपनी दलील में बताया कि उन्होंनेआतंकरोधी अभियान में सेना के साथ मिलकर काम किया है। उनके हस्तक्षेप से कई आतंकियों ने आत्मसमर्पण किया और कइयों को मारा गया। इसकी वजह से वह आतंकियों के निशाने पर हैं। यहां तक कि उनके भाई फारूक अहमद शाह और साले काजी इजराइल की आतंकियों ने हत्या कर दी थी। जेएनएफ