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अनुच्छेद 370 हटने के बाद घाटी के हालात को रखा नियंत्रण में
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जम्मू। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद भी उन्होंने अपनी सूझबूझ से कश्मीर के हालात पर नियंत्रण रखा। उन्होंने इस दौरान एलओसी के साथ ही मैदानी इलाकों में जवानों की तैनाती व समन्वय के साथ कई दौरे कर पूरी स्थिति को नियंत्रण में रखा।
जनरल रावत जम्मू-कश्मीर में इसी वर्ष 23 अक्तूबर को आए थे। यहां उन्होंने नौशेरा एलओसी की अग्रिम चौकियों का दौरा किया और एलओसी की सुरक्षा बंदोबस्त की समीक्षा की। एलओसी व आईबी पर पाकिस्तान की ड्रोन की हलचल के बीच उन्होंने एलओसी पर पहुंचकर जवानों को दुश्मनों की नापाक हरकतों को नाकाम करने को कहा था।
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उड़ी में बतौर मेजर संभाली थी कमान
साल 2019 में पाकिस्तान पर बालाकोट एयर स्ट्राइक के वक्त रावत सेना के चीफ थे। 2015 में म्यांमार स्ट्राइक, 2016 पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक, 2019 में बालाकोट एयर स्ट्राइक जैसे ऑपरेशन में उनकी मौजूदगी थी। उनको कश्मीर के उड़ी और सोपोर समेत एलओसी की खासी जानकारी थी। उन्हें अपना पहला बड़ा पद भी कश्मीर में बतौर मेजर मिला था, जिसमें उड़ी में सेना की एक कंपनी की कमान मिली थी। इसके अलावा वह सोपोर में सेक्टर पांच की राष्ट्रीय राइफल के बिग्रेडियर रहे। उन्हें उड़ी में 19 इनफैंट्री डिवीजन के जीओसी की कमान मिली। अपने कार्यकाल में वह तीन बार कश्मीर के अहम हिस्सों में तैनात रहे और उनकी मौजूदगी में सेना ने आतंकियों के खिलाफ कई बड़े ऑपरेशन किए।
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जनरल रावत जम्मू-कश्मीर में इसी वर्ष 23 अक्तूबर को आए थे। यहां उन्होंने नौशेरा एलओसी की अग्रिम चौकियों का दौरा किया और एलओसी की सुरक्षा बंदोबस्त की समीक्षा की। एलओसी व आईबी पर पाकिस्तान की ड्रोन की हलचल के बीच उन्होंने एलओसी पर पहुंचकर जवानों को दुश्मनों की नापाक हरकतों को नाकाम करने को कहा था।
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उड़ी में बतौर मेजर संभाली थी कमान
साल 2019 में पाकिस्तान पर बालाकोट एयर स्ट्राइक के वक्त रावत सेना के चीफ थे। 2015 में म्यांमार स्ट्राइक, 2016 पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक, 2019 में बालाकोट एयर स्ट्राइक जैसे ऑपरेशन में उनकी मौजूदगी थी। उनको कश्मीर के उड़ी और सोपोर समेत एलओसी की खासी जानकारी थी। उन्हें अपना पहला बड़ा पद भी कश्मीर में बतौर मेजर मिला था, जिसमें उड़ी में सेना की एक कंपनी की कमान मिली थी। इसके अलावा वह सोपोर में सेक्टर पांच की राष्ट्रीय राइफल के बिग्रेडियर रहे। उन्हें उड़ी में 19 इनफैंट्री डिवीजन के जीओसी की कमान मिली। अपने कार्यकाल में वह तीन बार कश्मीर के अहम हिस्सों में तैनात रहे और उनकी मौजूदगी में सेना ने आतंकियों के खिलाफ कई बड़े ऑपरेशन किए।
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