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जेके बैंक में 600 करोड़ के लोन की धोखाधड़ी में केस दर्ज, दिल्ली में पड़ा छापा, दो मामलों में कार्रवाई

Wed, 07 Aug 2019 08:45 PM IST
Pranjal Dixit न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: Pranjal Dixit Updated Wed, 07 Aug 2019 08:45 PM IST
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jammu kashmir bank fraud loan case 600 crore, anti corruption bureau registered case
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो - फोटो : फाइल, अमर उजाला
एंटी करप्शन ब्यूरो ने जम्मू कश्मीर बैंक में 600 करोड़ रुपये के लोन की धोखाधड़ी के दो मामलों में केस दर्ज किया है। ब्यूरो की टीम ने बैंक अधिकारियों और एंबियंस ग्रुप के निदेशक राज सिंह गहलोत के खिलाफ केस दर्ज करते हुए उनके घर और कार्यालय पर बुधवार को नई दिल्ली में छापा मार कार्रवाई की। कई ठिकानों पर जांच की गई और संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए गए। राज सिंह एंबियंस ग्रुप का एमडी है। 
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ब्यूरो ने जांच में पाया कि राज सिंह की दो फर्मों एंबियंस ग्रुप और अमन हॉस्पिटेलिटी को कई सारे लोन दिए गए। 2009 से 2016 तक बैंक के नियमों को ताक पर रखकर लोन दिए। जांच में यह भी सामने आया कि नई दिल्ली जोनल कार्यालय, कॉरपोरेट कार्यालय और अंसल प्लाजा की ब्रांच में तैनात अफसरों व कर्मियों ने अमन हॉस्पिटेलिटी को पहले करोड़ों रुपये का लोन दिया। फिर लोन को जानबूझ कर एनपीए घोषित किया, ताकि वन टाइम सेटलमेंट से फर्म को लाभ दिया जा सके। 
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उक्त कंपनी ने बैंक के जरिये फाइव स्टार होटल बनाने का प्रोजेक्ट बनाकर बैंक को सौंपा। इसकी पहले अनुमानित लागत 866.89 करोड़ और बाद में 1275.71 करोड़ की गई। इसमें से 2009 से 2013 तक फर्म को 227 करोड़ रुपये का लोन दे दिया गया। फर्म के डिफाल्टर घोषित होने के बाद फर्म को इंटरेस्ट टर्म लोन के रूप में 47 करोड़ रुपये दिए गए। कुल मिलाकर फर्म पर 289 करोड़ का कर्ज हो गया, लेकिन बैंक प्रबंधन की मिलीभगत से 128 करोड़ रुपये में यह लोन सेटल किया गया। अब तक बैंक फर्म से एक रुपया भी वापस नहीं ले सका है। 
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इसी तरह से एक अन्य मामले की जांच में पाया गया कि दिल्ली की अंसल प्लाजा जेके बैंक ब्रांच ने एंबियंस टावर प्राइवेट लिमिटेड को 258 करोड़ का टर्म लोन मंजूर किया। यह लोन रोहिणी में 2बी शापिंग व प्लाट कॉम्प्लेक्स बनाने के लिए दिया गया था। जांच में यह भी पाया गया कि बैंक प्रबंधन की मिलीभगत से यह लोन रिवाइज होकर 300 करोड़ रुपये पहुंच गया। 2016 में 300 करोड़ रुपये फर्म के नाम जारी कर दिए गए। बाद में जब दस्तावेजों की जांच हुई तो पता चला कि रेंट डीड और लीज की सही कीमत के आधार पर लोन नहीं दिया गया। उससे कई गुणा बढ़ाकर लोन दिया गया। फर्म ने यह 300 करोड़ भी नहीं दिए। इस धोखाधड़ी में एचडीएफसी, फ्यूचर ग्रुप और सिंधु ट्रेड का नाम भी है।
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