जम्मू-कश्मीर: प्रति व्यक्ति औसत आय में पिछड़ा प्रदेश, दैनिक आय 460 रुपये, आर्थिक सर्वे की रिपोर्ट में खुलासा
पिछले सात सालों में औसत आय में प्रदेश में करीब छह फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार जम्मू कश्मीर में महंगाई की दर भी राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है। राष्ट्रीय स्तर पर महंगाई की दर औसत 2022 में 6.69 फीसदी रही है।
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प्रति व्यक्ति औसत आय में राष्ट्रीय सालाना औसत में जम्मू-कश्मीर पिछड़ गया है। जम्मू-कश्मीर अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी निदेशालय की तरफ से जारी हुई 2022-23 की आर्थिक सर्वे रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। प्रदेश में प्रति व्यक्ति मासिक आय 13812 रुपये और दैनिक आय 460 रुपये है।
प्रति व्यक्ति औसत सालाना आय की बात करें तो राष्ट्रीय औसत 196716 है और जम्मू कश्मीर इस मामले में राष्ट्रीय औसत से भी पीछे है। यहां पर प्रति व्यक्ति सालाना औसत आय 165755 है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जम्मू कश्मीर में प्रति व्यक्ति औसत आय चाहे राष्ट्रीय औसत आय से अभी कम है।
पिछले सात सालों में औसत आय में प्रदेश में करीब छह फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार जम्मू कश्मीर में महंगाई की दर भी राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है। राष्ट्रीय स्तर पर महंगाई की दर औसत 2022 में 6.69 फीसदी रही है, जबकि जम्मू-कश्मीर में महंगाई की दर 6.88 फीसदी रही है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि बेरोजगारी दर में 5.2 फीसदी की गिरावट आई है। श्रम बल भागीदारी दर बढ़कर 61.5 फीसदी हो गई है। विभिन्न स्वरोजगार योजनाओं के तहत प्रदेश में 51004 इकाइयां स्थापित हुई हैं। इनमें 2.03 लाख युवाओं को रोजगार मिला है।
बजट से ई-शासन पारिस्थितिकी तंत्र को मिलेगी मजबूती
जम्मू-कश्मीर प्रशासन का दावा है कि वित्त वर्ष 2023-24 का अमृत काल का बजट ऑनलाइन जनगणना प्रबंधन प्रणाली के निर्माण के अलावा सभी कार्यालयों में ई-कार्यालयों का विस्तार करने और ई-गवर्नेंस पहल को मजबूत करेगा। सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों के कार्यान्वयन के संबंध में नागरिक संतुष्टि को प्राथमिकता दी जा रही है।
त्वरित डिजिटल परिवर्तन और यूटी व्यवस्था द्वारा उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाने से प्रशासन को अधिक खुला, पारदर्शी और नए वितरण मॉडल विकसित करने में मदद मिली है। इससे यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि लोग आसानी से ई-सेवाओं का उपयोग कर सकें।
सरकार ने इस बजट में यात्रियों की सुगम, परेशानी मुक्त यात्रा के लिए जेकेआरटीसी द्वारा एक टिकट प्रबंधन प्रणाली सुनिश्चित करने के लिए एक बेहतर ढांचा पेश करने का प्रावधान रखा है। बजट में जीएसटी की ई-चालान प्रणाली, जीएसटी डेटा त्रिकोणासन और जीएसटी आईएन को जीएसटी प्राइम में बदलने के अलावा अन्य विभागों में पीडब्ल्यूओएमएएस में ई-बिल प्रणाली के विस्तार का भी प्रस्ताव है।
सभी विभागों में 445 सेवाओं को पहले ही ऑनलाइन मोड में पेश किया जा चुका है और उनमें से कई को गुणवत्ता जांच और फीडबैक मांगने वाले तंत्र के साथ एकीकृत किया जा रहा है। आम जनता की आसानी और मुफ्त पहुंच के लिए इन सेवाओं को ई-उन्नत के डिजिटल पोर्टल, सर्विस प्लस और डिजी लॉकर प्लेटफॉर्म पर भी जोड़ा जा रहा है।
ई-गवर्नेंस की दिशा में राष्ट्रीय राजमार्ग पर यात्रियों की सुगम यात्रा के लिए ई-वे बिल को फास्टैग और वाहन से जोड़ा जाएगा। आधिकारिक प्रवक्ता के अनुसार सरकार जम्मू-कश्मीर के लोगों की चिंताओं को दूर करने के लिए एकल हेल्पलाइन बनाएगी।
जम्मू और कश्मीर ई-गवर्नेंस सेवाओं के वितरण में भारत के सभी केंद्र शासित प्रदेशों में सबसे ऊपर है, जिसने यूटी को सालाना लगभग 200 करोड़ रुपये बचाने में भी सक्षम बनाया है, जो जम्मू और श्रीनगर राजधानी में वार्षिक दरबार मूव के दौरान भौतिक फाइलों की ढुलाई में इस्तेमाल किया जाता था।
जम्मू-कश्मीर सुशासन सूचकांक रखने वाला देश का पहला केंद्र शासित प्रदेश बन गया है और केंद्र शासित प्रदेश के 20 जिलों के लिए जिला सुशासन सूचकांक लांच करने वाला भी पहला था। सरकार ने ई-ऑफिस के माध्यम से उपयोगकर्ता-केंद्रित सेवा वितरण प्रणाली और पेपरलेस प्रशासनिक कार्यों को बनाने में प्रगति की है।