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न्यायालय ने कहा: एक ही कारण के लिए बार-बार याचिका दाखिल करना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग
Thu, 28 Oct 2021 10:22 PM IST
प्रशांत कुमार
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रीनगर
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Thu, 28 Oct 2021 10:22 PM IST
सार
अदालत की एकल पीठ ने दिहाड़ीदार द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए कहा था कि वह तथ्यों की किसी भी जांच में दखल नहीं दे सकती। 1994 के एसआरओ 64 के संदर्भ में नियमितीकरण की शर्तों में एक सात वर्ष तक लगातार काम करना भी शामिल है।
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उच्च न्यायालय
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने एक ही कारण के लिए लगातार याचिकाएं दायर करने को कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग बताते हुए हुए रेशम कीट पालन विभाग के एक दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी की नियमित करने की याचिका को गुरुवार को खारिज कर दिया।
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मुख्य न्यायाधीश पंकज मित्थल और न्यायमूर्ति विनोद चटर्जी कौल की खंडपीठ ने कीटपालन विभाग में कार्यरत एक दैनिक वेतन भोगी की ओर से एसआरओ 64 के तहत नियमित करने की मांग को खारिज करते हुए कहा कि इस मामले में अदालत के लिए उपलब्ध दस्तावेजों और रिकॉर्ड को सत्यापित करना संभाव नहीं है। इसके अलावा जब अधिकारियों द्वारा नियमितीकरण के मामले में बार-बार विचार करने के बाद तथ्यात्मक पहलुओं के आधार पर दावे को खारिज कर दिया गया ऐसे में अदालत हस्तक्षेप की अनुमति नहीं दे सकती।
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अदालत ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में हमेशा यह बेहतर होता है कि उचित मंच का सहारा लेने की अनुमति दी जाए ताकि पक्ष तथ्यों के विवादित पहलुओं पर साक्ष्य के आधार पर मामले पर निर्णय ले सकें। अदालत ने नियमितिकरण रद्द किए जाने के बाद एक ही कारण के लिए लगातार रिट याचिकाओं को बार-बार दाखिल करने को कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया।