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जम्मू कश्मीर: मशरूम की खेती के लिए 42 करोड़ की परियोजना, रोजगार के बढ़ेंगे अवसर
Fri, 06 Jan 2023 11:41 AM IST
kumar गुलशन कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Fri, 06 Jan 2023 11:41 AM IST
सार
मशरूम की खेती किसानों की आय को बढ़ाने के साथ जलवायु और मिट्टी के संसाधनों को भी सुरक्षित रखेगी। इसके मद्देनजर सरकार मशरूम की खेती को बढ़ावा देने पर एक परियोजना लागू कर रही है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
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विस्तार
जम्मू कश्मीर प्रदेश में मशरूम की खेती में क्रांति लाने के लिए 42 करोड़ रुपये की पीआरवाईएमसी की परियोजना निर्धारित की गई है। इससे 3.5 गुना उत्पादन और तीन गुना रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इस परियोजना के तहत 768 नए उद्यमी भी बनेंगे।
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कृषि क्षेत्र में विविधता लाने के लिए लगातार नए तकनीकी हस्तक्षेपों को नियोजित करने का सरकार काम कर रही है। मशरूम की खेती किसानों की आय को बढ़ाने के साथ जलवायु और मिट्टी के संसाधनों को भी सुरक्षित रखेगी। इसके मद्देनजर सरकार मशरूम की खेती को बढ़ावा देने पर एक परियोजना लागू कर रही है, जिसका फैसला हाल में डॉ. मंगला राय की अध्यक्षता में शीर्ष स्तरीय बैठक में लिया गया।
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विश्वविद्यालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार कृषि उत्पादन विभाग की ओर से अगले तीन वर्षों में करीब 42 करोड़ रुपये की लागत से मशरूम का उत्पादन बढ़ेगा। कृषि उत्पादन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने कहा कि मशरूम का उत्पादन खेती और विपणन के क्षेत्र में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार को बढ़ावा देता है।
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उन्होंने कहा कि मशरूम की खेती के लिए कम पूंजी, थोड़ी तकनीकी विशेषज्ञता की जरूरत है। यहां तक कि छोटे पैमाने पर घर के अंदर मशरूम उगाना और निवेश व आसानी से उच्च रिटर्न अर्जित करने की संभावना है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि महिलाएं कम निवेश के साथ अपने घर में मशरूम को उगा सकती हैं। स्कॉस्ट जम्मू के वीसी प्रो. जेपी शर्मा ने कहा कि मशरूम की खेती प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार का एक साधन भी है।
उन्होंने कहा कि मशरूम के लिए बाजार की पहले कमी थी। इस परियोजना से किसानों को हर तरह का लाभ होगा। गैर परंपरागत क्षेत्रों में मशरूम की खेती को बढ़ावा देने के लिए 1.5 लाख कंपोस्ट बैग मशरूम उत्पादकों को वितरित किए जाएंगे। 300 महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों की स्थापना के माध्यम से सशक्त किया जाएगा।
शोध और विकास के लिए 2.1 करोड़
परियोजना चार कैनिंग इकाइयों के माध्यम से खराब होने वाली वस्तुओं के मूल्य संवर्धन पर ध्यान देती है। इसके अलावा शोध और विकास के लिए 2.1 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की गई। इसके तहत औषधि मशरूम को बढ़ावा दिया जाएगा।