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Jammu News: जल्द पहचान और जल्द उपचार से समाज होगा कुष्ठ रोग मुक्त
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जम्मू संभाग में हर साल औसतन 100 नए पीड़ित मिल रहे, विस्थापित आबादी चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। वर्ष 2027 तक कुष्ठ मुक्त भारत बनाने में जम्मू-कश्मीर भी प्रयासरत है, लेकिन इसके लिए अभी कई चुनौतियां हैं। खासतौर पर प्रवासियों से कुष्ठ रोग के लिए जिम्मेदार वैक्टीरिया माइक्रो वैक्टीरियम लेप्रे संक्रमण का प्रदेश में आना जारी है। हालांकि, यह अन्य की अपेक्षा कम संक्रामक रोग है। पीड़ितों की जल्द पहचान व जल्द उपचार देकर समाज में कुष्ठ रोग को फैलने से रोका जा सकता है।
जम्मू संभाग के विभिन्न जिलों में हर साल औसतन 100 तक नए कुष्ठ रोगी मिल रहे हैं। कश्मीर में इसकी संख्या काफी कम है। जम्मू संभाग में जम्मू में मार्च से दिसंबर 2024 तक मिले 21 कुष्ठरोग के मामलों में 18 प्रवासी हैं, जिनमें अधिकांश झुग्गी झोंपड़ियों में रहते हैं।
संभाग में छत्तीसगढ़ से नौ, उत्तर प्रदेश से छह, मध्य प्रदेश से पांच, बिहार से छह और पश्चिमी बंगाल से एक पीड़ित मिला है। इन सभी पीड़ितों के बारे में संबंधित राज्यों और संबंधित जिलों को सूचित किया गया है, ताकि उनके संपर्क में रहे लोगों को एहतियातन डोज देकर कुष्ठ रोग की आशंका को खत्म किया जा सके।
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संभाग में दस माह में 62 कुष्ठ रोगी मिले
जम्मू संभाग में चालू वित्त वर्ष में मार्च 2024 से दिसंबर 2024 तक 62 नए कुष्ठ रोगी मिले। इसमें जम्मू में 21, सांबा में छह, कठुआ में 11, उधमपुर में नौ, रियासी में दो, राजोरी में चार मामले हैं। अभी वित्त वर्ष के तीन माह बचे हैं। इससे पहले वर्ष 2023 में संभाग में 105 और वर्ष 2022 में 103 कुष्ठ रोग के मामले मिले थे।
स्पर्श कुष्ठ रोग जागरूकता पखवाड़ा शुरू
स्वास्थ्य विभाग में जोनल लेप्रोसी अधिकारी डाॅ. सुषणा मट्टू ने बताया कि स्क्रीनिंग बढ़ने से कुष्ठ रोगियों की पहचान हो रही है। महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के साथ प्रदेश में 13 फरवरी तक स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान शुरू किया गया है। जम्मू-कश्मीर में कुष्ठ रोगियों के लिए मल्टी ड्रग थैरेपी उपलब्ध है। राष्ट्रीय लेप्रोसी कार्यक्रम के तहत पीड़ितों को निशुल्क दवाएं और निरंतर स्वास्थ्य की जांच की जाती है। इसमें पैसी वैसीलिसा श्रेणी में छह से नौ माह और मल्टी वैसीलिया में 12 से 18 माह का कोर्स किया जाता है। इसके बाद पांच साल तक फाॅलोअप रहता है, ताकि व्यक्ति कुष्ठ रोग से दोबारा पीड़ित न हो जाए।
यह हैं कुष्ठ रोग के लक्षण
यह नसों, त्वचा आंखों और नाक की परत को प्रभावित करता है। चमड़ी पर दाग, चमकते, सुन्न पन कुष्ठ रोग के मुख्य लक्षण हैं। कुष्ठ रोग के संकेतों और लक्षणों के लिए स्वयं जांच करें। जल्द जांच और समय पर इलाज से इससे 100 फीसदी छुटकारा मिल सकता है। कुष्ठ रोगी से भेदभाव न करें। कुष्ठ से मुक्ति पाकर दिव्यांगता से बचा जा सकता है। कुष्ठ रोग पूरी तरह से ठीक हो जाता है। इसका सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर निशुल्क इलाज उपलब्ध है। कुष्ठरोग से पीड़ित व्यक्ति को समाज से दूर मत करिए।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। वर्ष 2027 तक कुष्ठ मुक्त भारत बनाने में जम्मू-कश्मीर भी प्रयासरत है, लेकिन इसके लिए अभी कई चुनौतियां हैं। खासतौर पर प्रवासियों से कुष्ठ रोग के लिए जिम्मेदार वैक्टीरिया माइक्रो वैक्टीरियम लेप्रे संक्रमण का प्रदेश में आना जारी है। हालांकि, यह अन्य की अपेक्षा कम संक्रामक रोग है। पीड़ितों की जल्द पहचान व जल्द उपचार देकर समाज में कुष्ठ रोग को फैलने से रोका जा सकता है।
जम्मू संभाग के विभिन्न जिलों में हर साल औसतन 100 तक नए कुष्ठ रोगी मिल रहे हैं। कश्मीर में इसकी संख्या काफी कम है। जम्मू संभाग में जम्मू में मार्च से दिसंबर 2024 तक मिले 21 कुष्ठरोग के मामलों में 18 प्रवासी हैं, जिनमें अधिकांश झुग्गी झोंपड़ियों में रहते हैं।
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संभाग में छत्तीसगढ़ से नौ, उत्तर प्रदेश से छह, मध्य प्रदेश से पांच, बिहार से छह और पश्चिमी बंगाल से एक पीड़ित मिला है। इन सभी पीड़ितों के बारे में संबंधित राज्यों और संबंधित जिलों को सूचित किया गया है, ताकि उनके संपर्क में रहे लोगों को एहतियातन डोज देकर कुष्ठ रोग की आशंका को खत्म किया जा सके।
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संभाग में दस माह में 62 कुष्ठ रोगी मिले
जम्मू संभाग में चालू वित्त वर्ष में मार्च 2024 से दिसंबर 2024 तक 62 नए कुष्ठ रोगी मिले। इसमें जम्मू में 21, सांबा में छह, कठुआ में 11, उधमपुर में नौ, रियासी में दो, राजोरी में चार मामले हैं। अभी वित्त वर्ष के तीन माह बचे हैं। इससे पहले वर्ष 2023 में संभाग में 105 और वर्ष 2022 में 103 कुष्ठ रोग के मामले मिले थे।
स्पर्श कुष्ठ रोग जागरूकता पखवाड़ा शुरू
स्वास्थ्य विभाग में जोनल लेप्रोसी अधिकारी डाॅ. सुषणा मट्टू ने बताया कि स्क्रीनिंग बढ़ने से कुष्ठ रोगियों की पहचान हो रही है। महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के साथ प्रदेश में 13 फरवरी तक स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान शुरू किया गया है। जम्मू-कश्मीर में कुष्ठ रोगियों के लिए मल्टी ड्रग थैरेपी उपलब्ध है। राष्ट्रीय लेप्रोसी कार्यक्रम के तहत पीड़ितों को निशुल्क दवाएं और निरंतर स्वास्थ्य की जांच की जाती है। इसमें पैसी वैसीलिसा श्रेणी में छह से नौ माह और मल्टी वैसीलिया में 12 से 18 माह का कोर्स किया जाता है। इसके बाद पांच साल तक फाॅलोअप रहता है, ताकि व्यक्ति कुष्ठ रोग से दोबारा पीड़ित न हो जाए।
यह हैं कुष्ठ रोग के लक्षण
यह नसों, त्वचा आंखों और नाक की परत को प्रभावित करता है। चमड़ी पर दाग, चमकते, सुन्न पन कुष्ठ रोग के मुख्य लक्षण हैं। कुष्ठ रोग के संकेतों और लक्षणों के लिए स्वयं जांच करें। जल्द जांच और समय पर इलाज से इससे 100 फीसदी छुटकारा मिल सकता है। कुष्ठ रोगी से भेदभाव न करें। कुष्ठ से मुक्ति पाकर दिव्यांगता से बचा जा सकता है। कुष्ठ रोग पूरी तरह से ठीक हो जाता है। इसका सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर निशुल्क इलाज उपलब्ध है। कुष्ठरोग से पीड़ित व्यक्ति को समाज से दूर मत करिए।