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Jammu News: आरएस पुरा अस्पताल में सफाई वालों की दो नियुक्तियां सवालों के घेरे में
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आरटीआई में खुलासा, बीएमओ स्तर पर मंजूरी और वेतन भुगतान से स्वास्थ्य विभाग पर उठे सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी
बाड़ी ब्राह्मणा। उपजिला अस्पताल आरएस पुरा में दो व्यक्तियों की बतौर पीटीएस (सफाईवाला) की अस्थायी नियुक्ति किए जाने का मामला सामने आया है जिसके चलते दोनों नियुक्तियों पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने आरटीआई के जवाब में दो नियुक्तियां होने की पुष्टि की है। आरोप है कि ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) ने बिना किसी नियमित भर्ती प्रक्रिया और उच्च अधिकारियों की स्वीकृति के अपने स्तर पर नियुक्तियां कर दीं। यह खुलासा निदेशक स्वास्थ्य विभाग को लगाई गई एक आरटीआई के जवाब में हुआ है।
सूचना के अनुसार वर्ष 2023 में बीएमओ ने एक साधारण कागज पर एसडीएम को पत्र लिखकर दोनों नियुक्तियों की मंजूरी ली। एसडीएम ने भी उसी कागज पर दोनों नियुक्तियों को मंजूरी दे दी। इस पूरी प्रक्रिया में न तो कोई विज्ञापन निकाला गया, न ही योग्यता, आरक्षण या पारदर्शी चयन प्रणाली अपनाई गई। बताया जा रहा है कि दोनों व्यक्तियों को अस्पताल डेवलपमेंट फंड से मानदेय देने की व्यवस्था भी बीएमओ के स्तर पर ही कर दी गई।
यह मामला इसलिए गंभीर है, क्योंकि जम्मू-कश्मीर सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्र संख्या 30-जीएडी ऑफ 2019, दिनांक 24 मई 2019 के तहत कैजुअल, सीजनल, एडहॉक, कंसोलिडेटेड, कांट्रेक्चुअल, नीड-बेस्ड और डेली रेटेड श्रमिकों, ईटीसी, की नियुक्ति या निरंतरता पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। इससे पूर्व आर्डर संख्या 43-एफ ऑफ 2015, दिनांक 17 मार्च 2015 में भी ऐसी नियुक्तियों की अनुमति वापस ली गई थी।
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उच्च अधिकारियों को भी नहीं दी नियुक्तियों की जानकारी
आरटीआई में प्राप्त जानकारी के अनुसार बीएमओ ने इन नियुक्तियों की जानकारी निदेशक स्वास्थ्य विभाग या मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को भी नहीं दी। सवाल उठ रहा है कि जब सरकारी स्तर पर ऐसी नियुक्तियों पर रोक है, तो स्थानीय स्तर पर सादे कागज पर मंजूरी कैसे दे दी गई और सरकारी फंड से वेतन कैसे जारी किया गया। मामले को लेकर लोगों में रोष है। आरोप है कि पारदर्शिता के नाम पर बनाए गए नियमों को ताक पर रखकर करीबियों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई।
सीएमओ ने किसी टिप्पणी से किया इन्कार
इस मुद्दे पर सीएमओ जम्मू डॉक्टर नरेंद्र सिंह भातियाल ने कहा कि 2023 में हुई नियुक्तियों के मामले में वह कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। उन्हें सीएमओ जम्मू का कार्यभार संभाले हुए सिर्फ तीन महीने हुए हैं। लेकिन जब उन्हें जीएडी का आदेश और आरटीआई के जवाब की कॉपी दिखाई तो उन्होंने अस्पताल में हुई नियुक्तियों को स्वीकार किया और अंत में उन्होंने दावा किया कि आरएस पुरा अस्पताल में हुई नियुक्तियां रोगी कल्याण समिति के तहत हुई हैं और वैध हैं।
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अंदरखाने सरासर गलत तरीका, जांच हो
अरनिया कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष कैलाश चंद्र सैनी ने कहा कि अंदरखाने लोगों की नियुक्तियां करना सरासर गलत है और रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि वैसे ही बेरोजगारी से नौजवान दर-दर भटक रहे हैं और ऊपर से बिना किसी भर्ती प्रक्रिया के नियुक्तियां करना नौजवानों में रोष पैदा करता है। इसके चलते नौजवान भटक कर समाज में गलत रास्ता अपनाते हैं। अवैध नियुक्तियों में संलिप्त अधिकारियों के खिलाफ जांच कर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए अन्यथा लोग धरना प्रदर्शन करने पर मजबूर हो जाएंगे।
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ऐसी नियुक्तियां बड़े स्कैम का संकेत
स्थानीय निवासी दर्शन कुमार ने कहा कि आरटीआई के दायरे में आने के बाद आरएस पुरा अस्पताल में अवैध नियुक्तियों का खुलासा हुआ है। इससे साफ प्रतीत होता है कि समस्त जम्मू कश्मीर में बड़े पैमाने पर विभिन्न सरकारी विभागों में जीएडी के आदेश को दरकिनार कर नियुक्तियां की गई होंगी। उन्होंने कहा कि यह एक बड़ा स्कैम है। जिस पर समय रहते अवैध नियुक्तियों का पर्दाफाश कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बाड़ी ब्राह्मणा। उपजिला अस्पताल आरएस पुरा में दो व्यक्तियों की बतौर पीटीएस (सफाईवाला) की अस्थायी नियुक्ति किए जाने का मामला सामने आया है जिसके चलते दोनों नियुक्तियों पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने आरटीआई के जवाब में दो नियुक्तियां होने की पुष्टि की है। आरोप है कि ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) ने बिना किसी नियमित भर्ती प्रक्रिया और उच्च अधिकारियों की स्वीकृति के अपने स्तर पर नियुक्तियां कर दीं। यह खुलासा निदेशक स्वास्थ्य विभाग को लगाई गई एक आरटीआई के जवाब में हुआ है।
सूचना के अनुसार वर्ष 2023 में बीएमओ ने एक साधारण कागज पर एसडीएम को पत्र लिखकर दोनों नियुक्तियों की मंजूरी ली। एसडीएम ने भी उसी कागज पर दोनों नियुक्तियों को मंजूरी दे दी। इस पूरी प्रक्रिया में न तो कोई विज्ञापन निकाला गया, न ही योग्यता, आरक्षण या पारदर्शी चयन प्रणाली अपनाई गई। बताया जा रहा है कि दोनों व्यक्तियों को अस्पताल डेवलपमेंट फंड से मानदेय देने की व्यवस्था भी बीएमओ के स्तर पर ही कर दी गई।
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यह मामला इसलिए गंभीर है, क्योंकि जम्मू-कश्मीर सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्र संख्या 30-जीएडी ऑफ 2019, दिनांक 24 मई 2019 के तहत कैजुअल, सीजनल, एडहॉक, कंसोलिडेटेड, कांट्रेक्चुअल, नीड-बेस्ड और डेली रेटेड श्रमिकों, ईटीसी, की नियुक्ति या निरंतरता पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। इससे पूर्व आर्डर संख्या 43-एफ ऑफ 2015, दिनांक 17 मार्च 2015 में भी ऐसी नियुक्तियों की अनुमति वापस ली गई थी।
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उच्च अधिकारियों को भी नहीं दी नियुक्तियों की जानकारी
आरटीआई में प्राप्त जानकारी के अनुसार बीएमओ ने इन नियुक्तियों की जानकारी निदेशक स्वास्थ्य विभाग या मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को भी नहीं दी। सवाल उठ रहा है कि जब सरकारी स्तर पर ऐसी नियुक्तियों पर रोक है, तो स्थानीय स्तर पर सादे कागज पर मंजूरी कैसे दे दी गई और सरकारी फंड से वेतन कैसे जारी किया गया। मामले को लेकर लोगों में रोष है। आरोप है कि पारदर्शिता के नाम पर बनाए गए नियमों को ताक पर रखकर करीबियों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई।
सीएमओ ने किसी टिप्पणी से किया इन्कार
इस मुद्दे पर सीएमओ जम्मू डॉक्टर नरेंद्र सिंह भातियाल ने कहा कि 2023 में हुई नियुक्तियों के मामले में वह कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। उन्हें सीएमओ जम्मू का कार्यभार संभाले हुए सिर्फ तीन महीने हुए हैं। लेकिन जब उन्हें जीएडी का आदेश और आरटीआई के जवाब की कॉपी दिखाई तो उन्होंने अस्पताल में हुई नियुक्तियों को स्वीकार किया और अंत में उन्होंने दावा किया कि आरएस पुरा अस्पताल में हुई नियुक्तियां रोगी कल्याण समिति के तहत हुई हैं और वैध हैं।
अंदरखाने सरासर गलत तरीका, जांच हो
अरनिया कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष कैलाश चंद्र सैनी ने कहा कि अंदरखाने लोगों की नियुक्तियां करना सरासर गलत है और रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि वैसे ही बेरोजगारी से नौजवान दर-दर भटक रहे हैं और ऊपर से बिना किसी भर्ती प्रक्रिया के नियुक्तियां करना नौजवानों में रोष पैदा करता है। इसके चलते नौजवान भटक कर समाज में गलत रास्ता अपनाते हैं। अवैध नियुक्तियों में संलिप्त अधिकारियों के खिलाफ जांच कर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए अन्यथा लोग धरना प्रदर्शन करने पर मजबूर हो जाएंगे।
ऐसी नियुक्तियां बड़े स्कैम का संकेत
स्थानीय निवासी दर्शन कुमार ने कहा कि आरटीआई के दायरे में आने के बाद आरएस पुरा अस्पताल में अवैध नियुक्तियों का खुलासा हुआ है। इससे साफ प्रतीत होता है कि समस्त जम्मू कश्मीर में बड़े पैमाने पर विभिन्न सरकारी विभागों में जीएडी के आदेश को दरकिनार कर नियुक्तियां की गई होंगी। उन्होंने कहा कि यह एक बड़ा स्कैम है। जिस पर समय रहते अवैध नियुक्तियों का पर्दाफाश कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।