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Jammu News: शहर के तीन प्रमुख अस्पतालों में सीटी स्कैन सेवा ठप, मरीज परेशान
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वैकल्पिक व्यवस्था में बोन एंड ज्वाइंट और जीएमसी के काट रहे चक्कर, 20 दिन बाद मिल रही तारीख
निजी क्लीनिकों में जाने को मरीज मजबूर, दोगुनी दाम पर सुविधा के लिए जेब हो रही ढीली
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। शहर के तीन प्रमुख श्री महाराजा गुलाब सिंह (एसएमजीएस), चेस्ट डिजीज (सीडी) और सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल जम्मू की सीटी (कंप्यूटेड टोमोग्राफी) स्कैन मशीनें खराब होने से सुविधा ठप है। इस कारण मरीज बेहाल हैं। वैकल्पिक व्यवस्था में तीनों अस्पतालों के मरीजों को बोन एंड ज्वाइंट अस्पताल और जीएमसी जम्मू में भेजा जा रहा है। लेकिन, वहां भी मरीजों का पहले से लोड होने से सीटी स्कैन के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है।
इनमें अधिकांश मरीज निजी क्लीनिकों में जाने के लिए मजबूर हैं, जिससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ा है। जीएमसी जम्मू और उसके संबद्ध अस्पतालों की बात करें तो यहां हर माह करीब 4500 सीटी स्कैन हो रहे हैं, जिसमें जीएमसी की इमरजेंसी में ही रोजाना 100 से 120 और रेडियोलॉजी विभाग में 30-40 सीटी स्कैन हो रहे हैं।
इससे पहले से ही मरीजों का लोड झेल रहे जीएमसी पर दूसरे अस्पतालों का लोड बढ़ने से मरीजों सहित तीमारदारों की परेशानी बढ़ गई है। यहां सामान्य मरीज के सीटी स्कैन के लिए 15 से 20 दिन या उसके बाद ही तिथि दे दी जाती है। हालांकि, जीएमसी प्रशासन का दावा है कि सभी मरीजों को दो-तीन दिन की ही तिथि देकर सीटी स्कैन किए जा रहे हैं।
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शहर के अस्पतालों में बड़ी संख्या में मरीजों को सीटी स्कैन की सलाह देने का एक बड़ा कारण यह भी है कि इसके लिए एचओडी और सलाहकार (कंसलटेंट) डाक्टरों की सलाह के बिना पीजी स्तर के डाक्टर सीटी स्कैन के लिए लिख रहे हैं। इससे कई मरीजों को पहली ही जांच में सीटी स्कैन का टेस्ट लिख दिया जाता है।
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एसएमजीएस में रोजाना होते थे 35-40 सीटी स्कैन
पिछले हफ्ते से एसएमजीएस अस्पताल की सीटी स्कैन मशीन ने जवाब दे दिया। मशीन की उम्र खत्म हो चुकी है और इसे पिछले दो साल से मरम्मत करवाकर किसी तरह से चलाया जा रहा है। हर सीटी स्कैन मशीन की औसतन उम्र दस साल होती है, लेकिन यह मशीन 15 साल से अधिक समय से स्थापित थी। जम्मू संभाग का यह जच्चा-बच्चा का प्रमुख अस्पताल है। यहां रोजाना 35 से 40 सीटी स्कैन हो रहे थे, लेकिन अब मरीजों को कार्यालय समय में बोन एंड ज्वाइंट और उसके बाद जीएमसी जम्मू में भेजा जा रहा है। अस्पताल प्रशासन का दावा है कि मरीजों को एंबुलेंस की सुविधा देकर उक्त अस्पतालों में भेजा जाता है, लेकिन इस सारी प्रक्रिया में मरीजों की हालत का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। इनमें कई सामान्य मरीजों को उक्त अस्पतालों से सीटी स्कैन के लिए अगली तिथि दे दी जाती है।
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टीबी मरीजों की प्राथमिक पहचान के लिए एक्सरे और सीटी स्कैन जरूरी
सीडी अस्पताल में पिछले दो माह से सीटी स्कैन मशीन ठप पड़ी है। अस्पताल में ट्यूबर क्लोसीस (टीबी) मरीजों की प्राथमिक पहचान ही एक्सरे और सीटी स्कैन से होती है। यहां रोजाना 20 तक सीटी स्कैन हो रहे थे, लेकिन अब मरीजों को बोन एंड ज्वाइंट व जीएमसी भेजा जा रहा है। लेकिन, इसमें यह भी खतरा रहता है कि अगर कोई मरीज टीबी से पीड़ित है तो वह दूसरे अस्पताल में पहुंचकर आसपास के लोगों को भी संक्रमित कर सकता है। जबकि सीडी अस्पताल में अलग से ऐसे मरीजों का सीटी स्कैन होता है। सीडी अस्पताल में रोजाना 200 की ओपीडी में औसतन 20 मरीजों को दाखिल किया जाता है।
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सुपर स्पेशियलिटी में पांच माह से बंद पड़ी मशीन
सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में पांच माह से सीटी स्कैन मशीन बंद पड़ी है। यहां रोजाना 25 से 30 मरीजों के सीटी स्कैन हो रहे थे। इसमें लगभग सभी मरीजों को उसी दिन सीटी स्कैन ही सुविधा मिल जाती थी। लेकिन, अब उन्हें बोन एंड ज्वाइंट अस्पताल और जीएमसी जम्मू भेजा जा रहा है। आपात मामले राज्य कैंसर संस्थान में भेजे जा रहे हैं। सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में कार्डियोलाजी, न्यूरोलाजी, न्यूरोसर्जरी, सीटीवीएस, नेफरोलाजी आदि महत्वपूर्ण विभाग चल रहे हैं।
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कोट
सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के लिए सीटी स्कैन मशीन की मंजूरी मिल गई है। उम्मीद है इसे जून तक शुरू कर दिया जाएगा। एसएमजीएस और सीडी अस्पताल के लिए भी सीटी स्कैन को सरकार को लिखा गया है।
- डाॅ. आशुतोष गुप्ता, प्रिंसिपल, जीएमसी जम्मू
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निजी क्लीनिकों में 4 से 6 हजार और सरकारी अस्पताल में 900 से 1500 तक सीटी स्कैन
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जीएमसी जम्मू में सीटी स्कैन की दरें
सीटी हेड सामान्य 900 रुपये
सीटी हेड (सामान्य व कॉन्ट्रास्ट) 1300 रुपये (नीचे सभी कॉन्ट्रास्ट में दवाई का खर्च मरीज वहन करेगा)
सीटी चेस्ट 1500 रुपये
सीटी पेट 1500 रुपये
सीटी स्पाइन 1500 रुपये
सीटी पेलविस 1500 रुपये
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निजी क्लीनिकों में जाने को मरीज मजबूर, दोगुनी दाम पर सुविधा के लिए जेब हो रही ढीली
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। शहर के तीन प्रमुख श्री महाराजा गुलाब सिंह (एसएमजीएस), चेस्ट डिजीज (सीडी) और सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल जम्मू की सीटी (कंप्यूटेड टोमोग्राफी) स्कैन मशीनें खराब होने से सुविधा ठप है। इस कारण मरीज बेहाल हैं। वैकल्पिक व्यवस्था में तीनों अस्पतालों के मरीजों को बोन एंड ज्वाइंट अस्पताल और जीएमसी जम्मू में भेजा जा रहा है। लेकिन, वहां भी मरीजों का पहले से लोड होने से सीटी स्कैन के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है।
इनमें अधिकांश मरीज निजी क्लीनिकों में जाने के लिए मजबूर हैं, जिससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ा है। जीएमसी जम्मू और उसके संबद्ध अस्पतालों की बात करें तो यहां हर माह करीब 4500 सीटी स्कैन हो रहे हैं, जिसमें जीएमसी की इमरजेंसी में ही रोजाना 100 से 120 और रेडियोलॉजी विभाग में 30-40 सीटी स्कैन हो रहे हैं।
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इससे पहले से ही मरीजों का लोड झेल रहे जीएमसी पर दूसरे अस्पतालों का लोड बढ़ने से मरीजों सहित तीमारदारों की परेशानी बढ़ गई है। यहां सामान्य मरीज के सीटी स्कैन के लिए 15 से 20 दिन या उसके बाद ही तिथि दे दी जाती है। हालांकि, जीएमसी प्रशासन का दावा है कि सभी मरीजों को दो-तीन दिन की ही तिथि देकर सीटी स्कैन किए जा रहे हैं।
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शहर के अस्पतालों में बड़ी संख्या में मरीजों को सीटी स्कैन की सलाह देने का एक बड़ा कारण यह भी है कि इसके लिए एचओडी और सलाहकार (कंसलटेंट) डाक्टरों की सलाह के बिना पीजी स्तर के डाक्टर सीटी स्कैन के लिए लिख रहे हैं। इससे कई मरीजों को पहली ही जांच में सीटी स्कैन का टेस्ट लिख दिया जाता है।
एसएमजीएस में रोजाना होते थे 35-40 सीटी स्कैन
पिछले हफ्ते से एसएमजीएस अस्पताल की सीटी स्कैन मशीन ने जवाब दे दिया। मशीन की उम्र खत्म हो चुकी है और इसे पिछले दो साल से मरम्मत करवाकर किसी तरह से चलाया जा रहा है। हर सीटी स्कैन मशीन की औसतन उम्र दस साल होती है, लेकिन यह मशीन 15 साल से अधिक समय से स्थापित थी। जम्मू संभाग का यह जच्चा-बच्चा का प्रमुख अस्पताल है। यहां रोजाना 35 से 40 सीटी स्कैन हो रहे थे, लेकिन अब मरीजों को कार्यालय समय में बोन एंड ज्वाइंट और उसके बाद जीएमसी जम्मू में भेजा जा रहा है। अस्पताल प्रशासन का दावा है कि मरीजों को एंबुलेंस की सुविधा देकर उक्त अस्पतालों में भेजा जाता है, लेकिन इस सारी प्रक्रिया में मरीजों की हालत का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। इनमें कई सामान्य मरीजों को उक्त अस्पतालों से सीटी स्कैन के लिए अगली तिथि दे दी जाती है।
टीबी मरीजों की प्राथमिक पहचान के लिए एक्सरे और सीटी स्कैन जरूरी
सीडी अस्पताल में पिछले दो माह से सीटी स्कैन मशीन ठप पड़ी है। अस्पताल में ट्यूबर क्लोसीस (टीबी) मरीजों की प्राथमिक पहचान ही एक्सरे और सीटी स्कैन से होती है। यहां रोजाना 20 तक सीटी स्कैन हो रहे थे, लेकिन अब मरीजों को बोन एंड ज्वाइंट व जीएमसी भेजा जा रहा है। लेकिन, इसमें यह भी खतरा रहता है कि अगर कोई मरीज टीबी से पीड़ित है तो वह दूसरे अस्पताल में पहुंचकर आसपास के लोगों को भी संक्रमित कर सकता है। जबकि सीडी अस्पताल में अलग से ऐसे मरीजों का सीटी स्कैन होता है। सीडी अस्पताल में रोजाना 200 की ओपीडी में औसतन 20 मरीजों को दाखिल किया जाता है।
सुपर स्पेशियलिटी में पांच माह से बंद पड़ी मशीन
सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में पांच माह से सीटी स्कैन मशीन बंद पड़ी है। यहां रोजाना 25 से 30 मरीजों के सीटी स्कैन हो रहे थे। इसमें लगभग सभी मरीजों को उसी दिन सीटी स्कैन ही सुविधा मिल जाती थी। लेकिन, अब उन्हें बोन एंड ज्वाइंट अस्पताल और जीएमसी जम्मू भेजा जा रहा है। आपात मामले राज्य कैंसर संस्थान में भेजे जा रहे हैं। सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में कार्डियोलाजी, न्यूरोलाजी, न्यूरोसर्जरी, सीटीवीएस, नेफरोलाजी आदि महत्वपूर्ण विभाग चल रहे हैं।
कोट
सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के लिए सीटी स्कैन मशीन की मंजूरी मिल गई है। उम्मीद है इसे जून तक शुरू कर दिया जाएगा। एसएमजीएस और सीडी अस्पताल के लिए भी सीटी स्कैन को सरकार को लिखा गया है।
- डाॅ. आशुतोष गुप्ता, प्रिंसिपल, जीएमसी जम्मू
निजी क्लीनिकों में 4 से 6 हजार और सरकारी अस्पताल में 900 से 1500 तक सीटी स्कैन
जीएमसी जम्मू में सीटी स्कैन की दरें
सीटी हेड सामान्य 900 रुपये
सीटी हेड (सामान्य व कॉन्ट्रास्ट) 1300 रुपये (नीचे सभी कॉन्ट्रास्ट में दवाई का खर्च मरीज वहन करेगा)
सीटी चेस्ट 1500 रुपये
सीटी पेट 1500 रुपये
सीटी स्पाइन 1500 रुपये
सीटी पेलविस 1500 रुपये