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प्रभु की कृपा से सब कुछ संभव: शास्त्री
Mon, 17 Mar 2025 01:38 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Mon, 17 Mar 2025 01:38 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
दोमाना। मनुष्य के जीवन में अच्छे व बुरे दिन प्रभु की कृपा से ही आते हैं। प्रभु की कृपा से सब कुछ संभव है। यह ज्ञान कथा वाचक सुरजीत शास्त्री ने रविवार को रख नागबानी गांव में जारी श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन संगत को दिया।
रविवार को श्री कृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। जन्म होते ही पंडाल जयकारों से गूंज उठा। शास्त्री ने बताया कि जिस समय भगवान कृष्ण का जन्म हुआ तो जेल के ताले टूट गए। पहरेदार सो गए। वासुदेव व देवकी बंधनों से मुक्त हो गए। प्रभु की कृपा से कुछ भी असंभव नहीं है।
कृपा न होने पर प्रभु मनुष्य को सभी सुखों से वंचित कर देते हैं। भगवान का जन्म होने के बाद वासुदेव ने भी जमुना पार करके उन्हें गोकुल पहुंचा दिया। वहां से वह यशोदा के यहां पैदा हुई शक्तिरूपा बेटी को लेकर चले आए। कृष्ण जन्मोत्सव पर नंद के घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की गीत पर भक्त जमकर झूमे।
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सुरजीत शास्त्री ने कहा कि कंस ने वासुदेव के हाथ से कन्या रूपी शक्तिरूपा को छीनकर जमीन पर पटकना चाहा तो वह हाथ से छूटकर आसमान में चली गई। शक्ति रूप में प्रकट होकर आकाशवाणी करने लगी कि कंस, तेरा वध करने वाला पैदा हो चुका है।
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दोमाना। मनुष्य के जीवन में अच्छे व बुरे दिन प्रभु की कृपा से ही आते हैं। प्रभु की कृपा से सब कुछ संभव है। यह ज्ञान कथा वाचक सुरजीत शास्त्री ने रविवार को रख नागबानी गांव में जारी श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन संगत को दिया।
रविवार को श्री कृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। जन्म होते ही पंडाल जयकारों से गूंज उठा। शास्त्री ने बताया कि जिस समय भगवान कृष्ण का जन्म हुआ तो जेल के ताले टूट गए। पहरेदार सो गए। वासुदेव व देवकी बंधनों से मुक्त हो गए। प्रभु की कृपा से कुछ भी असंभव नहीं है।
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कृपा न होने पर प्रभु मनुष्य को सभी सुखों से वंचित कर देते हैं। भगवान का जन्म होने के बाद वासुदेव ने भी जमुना पार करके उन्हें गोकुल पहुंचा दिया। वहां से वह यशोदा के यहां पैदा हुई शक्तिरूपा बेटी को लेकर चले आए। कृष्ण जन्मोत्सव पर नंद के घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की गीत पर भक्त जमकर झूमे।
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सुरजीत शास्त्री ने कहा कि कंस ने वासुदेव के हाथ से कन्या रूपी शक्तिरूपा को छीनकर जमीन पर पटकना चाहा तो वह हाथ से छूटकर आसमान में चली गई। शक्ति रूप में प्रकट होकर आकाशवाणी करने लगी कि कंस, तेरा वध करने वाला पैदा हो चुका है।