{"_id":"63427f5c5a8f59620464ac3d","slug":"jammu-dengue-news-amid-record-dengue-cases-platelets-scramble","type":"story","status":"publish","title_hn":"जम्मू: डेंगू के रिकार्ड मामलों के बीच प्लेटलेट्स के लिए माथापच्ची, मरीजों की जेब पर भी असर, क्या है मेल-जोल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जम्मू: डेंगू के रिकार्ड मामलों के बीच प्लेटलेट्स के लिए माथापच्ची, मरीजों की जेब पर भी असर, क्या है मेल-जोल
Sun, 09 Oct 2022 01:31 PM IST
kumar गुलशन कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Sun, 09 Oct 2022 01:31 PM IST
सार
डेंगू के बुखार के बाद कई मरीजों में अचानक प्लेटलेट्स गिर जाता है। सामान्य में मरीज में डेढ़ लाख तक प्लेटलेट्स होने चाहिए, लेकिन दस हजार से कम पहुंच जाने पर मरीज के शरीर के अंदरुनी और महत्वपूर्ण हिस्सों से खून का रिसाव होने का खतरा रहता है। इससे कई बार मरीज की मौत हो जाती है।
विज्ञापन
डेंगू संक्रमण
- फोटो : istock
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
डेंगू के रिकार्ड मामलों के बीच सरकारी और निजी अस्पतालों में प्लेटलेट्स के लिए माथापच्ची बढ़ी है। डेंगू का डंक लगने के बाद कई मरीजों के शरीर में प्लेटलेट्स की कमी हो जाती है। प्लेटलेट्स मानव शरीर में ऐसी कोशिकाएं होती हैं, जो रक्त को बहने से रोकता है। प्लेटलेट्स का संतुलन बनाए रखने के लिए इसे पीड़ित को चढ़ाना पड़ता है। लेकिन निजी अस्पतालों में प्लेटलेट्स के नाम पर मरीजों की जेब ढीली की जा रही है। इन प्लेटलेट्स के लिए हजारों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
विज्ञापन
डेंगू के बुखार के बाद कई मरीजों में अचानक प्लेटलेट्स गिर जाता है। सामान्य में मरीज में डेढ़ लाख तक प्लेटलेट्स होने चाहिए, लेकिन दस हजार से कम पहुंच जाने पर मरीज के शरीर के अंदरुनी और महत्वपूर्ण हिस्सों से खून का रिसाव होने का खतरा रहता है। इससे कई बार मरीज की मौत हो जाती है।
विज्ञापन
सरकारी स्तर पर जीएमसी जम्मू की बात करें, तो यहां रोजाना 10 से 12 मरीजों को प्लेटलेट्स देने की मांग आ रही है। इसी तरह शहर के प्रमुख जच्चा बच्चा अस्पताल एसएमजीएस में डेंगू के ही बाल रोगियों को रोजाना 5 से 6 यूनिट प्लेटलेट्स की जरूरत महसूस हो रही है। चूंकि डेंगू के कुल मामलों में अधिकांश जम्मू जिला प्रभावित है, ऐसे में शहर के अस्पतालों में प्लेटलेट्स की अधिक जरूरत महसूस की जा रही है। लेकिन इन अस्पतालों में पर्याप्त प्लेटलेट्स उपलब्ध न होने से अधिकांश मरीजों को अपना डोनर देकर प्लेटलेट्स का इंतजाम करना पड़ता है।
विज्ञापन
जम्मू कश्मीर: मधुमेह के मरीजों का आंकड़ा बढ़ने लगा, जम्मू के सरकारी अस्पताल में रोजाना पहुंच रहे 50 मरीज
इसी तरह निजी अस्पतालों के मरीजों को अगर जीएमसी या एसएमजीएस से प्लेटलेट्स की जरूरत पड़ती है, तो उन्हें इसका निर्धारित भुगतान करना पड़ता है। इसमें एसडीपी (सिंगल डोनर प्लेटलेट) के लिए 11000 और रेंडम डोनर प्लेटलेट के लिए 300 रुपये निजी अस्पताल के मरीज को देने पड़ते हैं। यानी सरकारी स्तर पर प्लेटलेट्स के लिए जद्दोजहद और निजी अस्पतालों में हजारों रुपये का आर्थिक बोझ। एसडीपी प्लेटलेट्स में 30 से 50 हजार तक प्लेटलेट्स और आरडीपी के एक पैकेट में 5 हजार तक प्लेटलेट्स होते हैं। कई मरीजों को एक साथ आरडीपी के 4 से 5 पैकेट प्लेटलेट्स चढ़ाने पड़ते हैं। निजी अस्पताल की बात करें, तो आरडीपी 900 रुपये और एसडीपी 14000 रुपये प्रति प्लेटलेट्स पैकेट मिल रहे हैं।
नहीं मिले प्लेटलेट्स, देना पड़ा डोनर
सरवाल निवासी विमल गुप्ता ने बताया कि उनके करीबी को डेंगू हो गया था। जीएमसी जम्मू में उन्हें समय पर प्लेटलेट्स उपलब्ध नहीं हो पाया, जिससे उन्हें अपना डोनर देकर प्लेटलेट्स का इंतजाम करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरवाल इलाके में नगर निगम की ओर से सिर्फ एक बार फॉगिंग करवाई गई। इसके बाद कोई अभियान नहीं चलाया गया। शहर के डेंगू प्रभावित इलाकों में सरवाल मुख्य इलाका है।
त्रिकुटा नगर से लापता बच्ची 36 घंटे बाद जालंधर से मिली
डेंगू के पीड़ितों को प्लेटलेट्स की जरूरत
न्यू यंग ब्लड आर्गेनाइजेशन के चेयरमैन अशोक वर्मा कहते हैं कि उन्हें रोजाना खून के लिए 15 से 20 फोन आते हैं। वर्तमान में डेंगू के अधिक मामले होने के कारण रोजाना 5 से 6 लोग अपने मरीजों के लिए उनसे खून की मांग करते हैं। इसमें सभी के लिए खून देना संभव नहीं हो पाता। उनके संगठन के सदस्य रक्तदान के लिए तत्पर रहते हैं।
जीएमसी कठुआ, डोडा और राजोरी में कंपोनेंट लैब नहीं, प्लेटलेट्स के लिए मरीज जम्मू के अस्पतालों पर निर्भर
संभाग के नौ जिलों के मरीज प्लेटलेट्स के लिए जम्मू के प्रमुख अस्पतालों पर निर्भर हैं। इसका कारण सरकारी स्तर पर जीएमसी जम्मू, एसएमजीएस और गांधीनगर अस्पताल में ही कंपोनेंट लैब का स्थापित होना है, जो प्लेटलेट्स का निर्माण करती है। कहने को जीएमसी कठुआ, जीएमसी डोडा और जीएमसी राजोरी भी हैं। लेकिन यहां कोई कंपोनेंट लैब न होने से इन जिलों के मरीजों को जम्मू पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है। जीएमसी कठुआ की प्रिंसिपल डॉ. अंजलि नादिर का कहना है कि अगले हफ्ते तक जीएमसी में कंपोनेंट लैब शुरू की जा रही है। जम्मू में निजी स्तर पर एस्काम बत्रा और बीईएन अस्पताल में कंपोनेंट लैब स्थापित हैं, लेकिन यहां प्लेटलेट्स के लिए मरीजों को हजारों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
Jammu Kashmir: निजी स्कूलों में बस फीस में 14 फीसदी वृद्धि, 5500 स्कूलों के लाखों बच्चों के अभिभावकों पर असर