{"_id":"670872cfbb4f2d51b10074aa","slug":"jammu-city-culture-katha-jammu-news-c-385-1-ja21004-104638-2024-10-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"धर्म को बढ़ावा देने के लिए कथा को करें आत्मसात : शास्त्री","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
धर्म को बढ़ावा देने के लिए कथा को करें आत्मसात : शास्त्री
Fri, 11 Oct 2024 06:05 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Fri, 11 Oct 2024 06:05 AM IST
विज्ञापन
हवन-यज्ञ के साथ महावीर मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा का समापन
संवाद न्यूज एजेंसी
दोमाना। मढ़ विधानसभा क्षेत्र के लोरीचक गांव के महावीर मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का वीरवार को हवन-यज्ञ के साथ समापन हो गया। इसमें श्रद्धालुओं ने आहुतियां डाल कर सुख-शांति के लिए कामना की।
अंतिम दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। कथावाचक कुलदीप शास्त्री ने संगत से धर्म को बढ़ावा देने के लिए श्रीमद्भागवत कथा को आत्मसात करने की अपील की। इस दौरान उन्होंने प्रभु श्रीकृष्ण की 16 हजार शादियां का प्रसंग, सुदामा प्रसंग और परीक्षित मोक्ष की कथाएं सुनाईं।
अंतिम दिन सुदामा चरित्र के माध्यम से भक्तों के सामने दोस्ती की मिसाल पेश की और समाज में समानता का संदेश दिया। साथ ही भक्तों को बताया कि श्रीमद्भागवत कथा का सात दिनों तक श्रवण करने से जीव का उद्धार होता है। इसे कराने वाले भी पुण्य के भागी होते हैं। इस दौरान भंडारे का भी आयोजन किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
दोमाना। मढ़ विधानसभा क्षेत्र के लोरीचक गांव के महावीर मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का वीरवार को हवन-यज्ञ के साथ समापन हो गया। इसमें श्रद्धालुओं ने आहुतियां डाल कर सुख-शांति के लिए कामना की।
अंतिम दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। कथावाचक कुलदीप शास्त्री ने संगत से धर्म को बढ़ावा देने के लिए श्रीमद्भागवत कथा को आत्मसात करने की अपील की। इस दौरान उन्होंने प्रभु श्रीकृष्ण की 16 हजार शादियां का प्रसंग, सुदामा प्रसंग और परीक्षित मोक्ष की कथाएं सुनाईं।
विज्ञापन
अंतिम दिन सुदामा चरित्र के माध्यम से भक्तों के सामने दोस्ती की मिसाल पेश की और समाज में समानता का संदेश दिया। साथ ही भक्तों को बताया कि श्रीमद्भागवत कथा का सात दिनों तक श्रवण करने से जीव का उद्धार होता है। इसे कराने वाले भी पुण्य के भागी होते हैं। इस दौरान भंडारे का भी आयोजन किया गया।
विज्ञापन