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जम्मू-कश्मीर: जल शक्ति विभाग के दो प्रोजेक्ट अधर में लटके, गर्मी में होगी पानी की किल्लत
Thu, 11 Feb 2021 03:29 PM IST
करिश्मा चिब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: करिश्मा चिब
Updated Thu, 11 Feb 2021 03:29 PM IST
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जम्मू-कश्मीर के ब्लॉक पुरमंडल की पंचायत लोअर खड़ा मदाना में जलापूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार की तरफ से 2 ट्यूबवेल लगाने की मंजूरी दी गई। इस पंचायत में गर्मी के दिनों में पानी के लिए हाहाकार मच जाता है। कंडी क्षेत्र होने के कारण यहां पर पानी की आपूर्ति नहीं हो पाती। उपरोक्त गांव में पानी की किल्लत दूर करने के लिए अक्टूबर 2019 में एक ट्यूबवेल का काम शुरू किया। यह ट्यूबवेल लोअर खड़ा मदाना क्षेत्र में खुदवाया जा रहा था, लेकिन पानी नहीं मिल पाया।
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इसके चलते यह प्रोजेक्ट अधर में लटक गया। उसी के विपरीत दूसरा प्रोजेक्ट गांव सुबली में मंजूर हुआ। पानी की कमी को देखते हुए यह भी शुरू नहीं हो पाया। जल शक्ति विभाग के अधिकारी का कहना है कि ग्राउंड वाटर ड्रिलिंग टीम ने दौरा कर क्षेत्र में पानी का सर्वे किया और रिपोर्ट तैयार की कि इस क्षेत्र में भी पर्याप्त पानी नहीं मिलेगा, जिसके चलते इस प्रोजेक्ट को रद्द कर दिया गया। उसके बाद पंचायत वासियों ने अधिकारियों के समक्ष परेशानी रखी।
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उन्होेंने कहा कि अगर ट्यूबवेल का पानी नहीं बन सकता है तो कम से कम वहां बोरवेल ही खुदवा दिए जाएं ताकि आने वाली गर्मी में पानी की किल्लत न हो। उनकी बातों को मद्देनजर दो से तीन बोरवेल का प्रोजेक्ट बनाया। जिनका काम जल्द शुरू कराया जाएगा। गांव वासियों का कहना है कि लैंग्विशिंग स्कीम के तहत सरकार द्वारा पूरी फंडिंग करने के बाद ही दोनों प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी, लेकिन उसके बावजूद भी बोरवेल बनाने में इतना समय क्यों लग रहा है।
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ट्यूबवेल बनाने में अभी भी जल शक्ति विभाग के अधिकारियों की तरफ से आश्वासन दिए जा रहे हैं। बोरवेल और ट्यूबवेल में असमंजस बना हुआ है। हमारी समस्या का हल नहीं हो पा रहा है। हम चाहते हैं कि ट्यूबवेल के प्रोजेक्ट को रद्द करके हमारे क्षेत्र में बोरवेल बनाए जाएं, जिससे पानी के चलते लोगों को राहत मिल सके । -अनिल शर्मा, सरपंच, लोअर खड़ा मदाना पंचायत
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लैंग्विशिंग स्कीम के तहत दोनों प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली थी, जिसमें सरकार द्वारा पूरी फंडिंग एक समय पर कर दी थी। ट्यूबवेल चलाने के लिए पानी पर्याप्त मात्रा में नहीं बन पाया। इसको लेकर इन प्रोजेक्ट पर काम बंद हो गया। उसके अलावा हमने भी काम करने वाली एजेंसी को बोरवेल बनाने के बारे में कह दिया है। उम्मीद है कि जल्द से जल्द इस काम को अमलीजामा पहनाया जाएगा। क्योंकि एक बोरवेल में 15 से 20 हजार गैलन पानी होता है। अगर इस पंचायत में दो बोरवेल बना दिए जाएंगे तो उस क्षेत्र में पानी की आपूर्ति सुचारु हो जाएगी। - आशीष शर्मा, एईई, जल शक्ति विभाग