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15 फीसदी पर अटका जम्मू-कश्मीर विद्युत ऊर्जा में लगाएगा बड़ी छलांग
Thu, 31 Oct 2019 04:19 AM IST
दुष्यंत शर्मा
ओमपाल संब्याल, जम्मू
ओमपाल संब्याल, जम्मू
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 31 Oct 2019 04:19 AM IST
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देश भर में पनबिजली उत्पादन क्षमता के लिहाज से अग्रणी राज्यों में शुमार जम्मू-कश्मीर के एनर्जी सेक्टर को अब केंद्रीय फंडिंग के इंजन से रफ्तार मिलेगी। जम्मू-कश्मीर विद्युत विकास विभाग और जम्मू-कश्मीर स्टेट पावर डेवलपमेंट कारपोरेशन (जेकेएसपीडीसी) के पुनर्गठन का आदेश पहले ही जारी हो चुका है। यूटी बनने पर पुनर्गठन के प्रावधान तत्काल प्रभाव से लागू हो जाएंगे।
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इससे बिजली चोरी रोकने, प्राथमिकताओं पर काम तेज होने से पारदर्शिता में सुधार होगा। बिजली सुधार कार्यक्रम न होने की वजह से केंद्र की फंडिंग भी रुकी थी। विभाग के पुनर्गठन से एक ही झटके में व्यापक सुधार की नींव रखी जा चुकी है। इससे कामकाज में सुधार के साथ केंद्रीय फंडिंग के द्वार भी खुल जाएंगे।
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दरअसल, जम्मू-कश्मीर राज्य में पनबिजली तैयार करने की कुल 20 हजार मेगावाट तक की क्षमता है। इसमें से 16 हजार से ज्यादा मेगावाट क्षमता की पहचान की जा चुकी है। इसकी तुलना में जम्मू-कश्मीर केंद्रीय और राज्य की परियोजनाओं से बमुश्किल 3300 मेगावाट बिजली ही तैयार कर पा रहा है। क्षमता के लिहाज से यह करीब 15 फीसदी बिजली ही बन पा रही है।
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हालांकि लद्दाख के अलग यूटी बनने से अब जम्मू-कश्मीर में 16 हजार मेगावाट की पनबिजली तैयार करने की क्षमता ही रह जाएगी। जेकेएसपीडीसी के उच्च पदस्थ अधिकारी के अनुसार प्रदेश सरकार को केंद्रीय सरकार की ओर से बिजली सुधार और कार्य के लिए सुगम माहौल तैयार करने के निर्देश दिए जाते रहे हैं, लेकिन अपेक्षा के अनुरूप सुधार नहीं हुए। यूटी बनने पर अर्थव्यवस्था के लिहाज से सबसे बड़ा बदलाव विद्युत उत्पादन क्षेत्र में देखने को मिलेगा।
इस वजह से था सुस्ती का आलम
जम्मू-कश्मीर में जेकेएसपीडीसी की 22, एनएचपीसी की 7 और निजी क्षेत्र की चार बिजली परियोजनाएं चल रही हैं। अनुच्छेद 370 की वजह से केंद्रीय निगम एनएचपीसी को काम करने का खुला हाथ नहीं था। यहां तक कि एनएचपीसी के अधीन चल रहीं बिजली परियोजनाआें को वापस राज्य को देने की मांग सरकारी स्तर पर उठाई जाती रही। इसके चलते एनएचपीसी की ओर से नई परियोजनाओं में रुझान कम हुआ।