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जम्मू-कश्मीर विशेष राज्य का दर्जा : प्रस्ताव पर विचार के लिए बाध्य नहीं केंद्र सरकार, 370 का जिक्र इसलिए गायब

Thu, 07 Nov 2024 06:52 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 07 Nov 2024 06:52 AM IST
सार

इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएंहैं। जानकार बताते हैं कि नेकां जमीनी हकीकत से वाकिफ है। उसे पता है कि राज्य के दर्जा बहाली पर पुनर्विचार केंद्र ही कर सकता है।

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Jammu and Kashmir special state status: Central government is not bound to consider the proposal
उमर अब्दुल्ला, मुख्यमंत्री, जम्मू-कश्मीर - फोटो : X / @OmarAbdullah

विस्तार

नेशनल कॉन्फ्रेंस ने विशेष राज्य के दर्जे की बहाली के प्रस्ताव में अनुच्छेद 370 का जिक्र नहीं किया। इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएंहैं। जानकार बताते हैं कि नेकां जमीनी हकीकत से वाकिफ है। उसे पता है कि राज्य के दर्जा बहाली पर पुनर्विचार केंद्र ही कर सकता है। मौजूदा सरकार ऐसा करने से रही। उसे यह भी पता है कि राज्य के प्रस्ताव पर विचार करने के लिए केंद्र बाध्य नहीं है। लेकिन उसे अपने चुनावी वादे के प्रति प्रतिबद्धता दिखाने के लिए इसके अलावा कोई विकल्प नहीं था। इसलिए उसने तकनीकी बचाव करते हुए 370 का प्रस्ताव में उल्लेख नहीं किया। नेकां जानती है कि पारित प्रस्ताव पर विचार करने के लिए केंद्र सरकार बाध्य नहीं है।

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पूर्व में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान नेकां के स्वायत्तता संबंधी प्रस्ताव को तत्कालीन उप प्रधानमंत्री एलके आडवाणी ने खारिज कर दिया था। वरिष्ठ पत्रकार जफर चौधरी का कहना है कि 370 को संसद ने हटाया है। इसको बहाल सिर्फ संसद कर सकती है। नेकां ने अपनी बात रखने के लिए बीच का रास्ता निकाला है।
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पीडीपी ने जानबूझकर जल्दबाजी दिखाई। उसे मालूम था कि यह प्रस्ताव नेकां के एजेंडे में शामिल है।इसलिए पीडीपी ने पहले ही ये प्रस्ताव लाकर नेकां से श्रेय छीनने की कोशिश की। ये सिर्फ एक प्रस्ताव है। इससे सिर्फ एक सरकारी रिकार्ड में संचार बनेगा जो केंद्र तक पहुंचेगा।
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वरिष्ठ अधिवक्ता शेख शकील अहमद का कहना है कि ये सिर्फ एक राजनीतिक फैसला है। नेकां ने लोगों से वोट लेने से पहले इसका वादा किया था। बस उसी को लेकर शब्दों का हेरफेर करके प्रस्ताव लाया गया है।

पीडीपी -नेकां में श्रेय की होड़
जम्मू विश्वविद्यालय के राजनीतिक विभाग की प्रोफेसर एलोरा पुरी कहती हैं कि नेकां के घोषणापत्र में ही ये शामिल था। अब पीडीपी इसका प्रस्ताव ला चुकी थी। इसलिए नेकां को ऐसा करना पड़ा। क्योंकि नेकां के साथ कांग्रेस भी है। इसलिए इसमें 370 का जिक्र नहीं है। हालांकि इसमें सांविधानिक गारंटी का जिक्र है, जिसका मतलब एक ही है।


जिक्र न होने से कोई फर्क नहीं
इस प्रस्ताव की कोई महत्वा नहीं है, क्योंकि नेकां ने अपने घोषणा पत्र में इसके लिए लोगों से वादा किया था। इसीलिए वे ये प्रस्ताव लाए हैं। सांविधानिक तौर पर केंद्र सरकार इसके ऊपर विचार करने या इसके इसको बहाल करने के लिए बाध्य नहीं है। रही बात 370 का जिक्र न करने की तो विशेष दर्जा मांगने और 370 बहाल करने की बात एक ही है।
- डॉ. आदिश सी. अग्रवाल, वरिष्ठ अधिवक्ता, पूर्व उपाध्यक्ष बार काउंसिल ऑफ इंडिया

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