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जम्मू-कश्मीरः धार्मिक स्थलों को खोलने की तैयारी, बावे वाली माता मंदिर में बनाए गए 500 गोले

Thu, 13 Aug 2020 05:30 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Thu, 13 Aug 2020 05:30 PM IST
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Jammu and Kashmir, Preparations to open religious places
धार्मिक स्थलों को खोलने की तैयारी - फोटो : अमर उजाला, फाइल फोटो

जम्मू में धार्मिक स्थलों को 16 अगस्त से खोलने की तैयारियां शुरू की जा रही हैं। इसमें धार्मिक स्थलों पर सामाजिक दूरी का सख्ती से पालन करवाने के लिए नई व्यवस्थाओं के साथ ढांचे स्थापित किए जा रहे हैं। सरकार की ओर से जारी एसओपी का पालन करवाने के लिए कमेटियों का भी का गठन किया गया है। शहर के प्रमुख बावे वाली माता के मंदिर में सामाजिक दूरी का पालन करवाने के लिए दो मीटर के दायरे के अंतराल में 500 गोले बनाए गए हैं। इस बार बावे वाली माता के दर्शन के लिए आने वाले भक्तों को नए स्वरूप में दर्शन होंगे और उन्हें कई नई व्यवस्थाओं का पालन करना होगा।

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मंदिर के महंत बिट्टा के अनुसार मंदिर प्रशासन ने अपने स्तर पर एसओपी तैयार की है। इसमें सामाजिक दूरी का पालन करवाने के लिए वीआईपी गेट से मंदिर भवन तक 500 गोले बनाए गए हैं। किसी भी श्रद्धालु को गोले से होकर ही दर्शन करने की अनुमति दी जाएगी। किले के गेट पर थर्मल स्क्रीनिंग होगी और हाथों को सैनिटाइज किया जाएगा। भवन के भीतर जाने से पहले श्रद्धालुओं को सैनिटाइज टनल से होकर निकलना होगा।
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उन्होंने कहा कि भवन के भीतर पाइप लगाए गए हैं, जिसमें महिलाओं और पुरुष श्रद्धालुओं को अलग-अलग से दर्शन के बाद बाहर भेजा जाएगा। मंदिर परिसर में भीड़ को इकट्ठा नहीं होने दिया जाएगा और गोले के आधार पर ही दर्शन करवाए जाएंगे। लोगों से अपील है कि जो श्रद्धालु प्रत्येक मंगलवार को दर्शन के लिए आता है, वह महीने में एक ही बार आए, ताकि भीड़ न बढ़े। इसी तरह 65 वर्ष से ऊपर और 10 साल से कम उम्र के बच्चे साथ में न लाएं। दिव्यांग और बीमार लोग भी मंदिर में न आएं। मंदिर प्रबंधकों  ने कहा कि सरकार की ओर से एसओपी का कड़ाई से पालन किया जाएगा।

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बकरी के बाहर से ही दर्शन होंगे

बावे वाली माता के भवन के ठीक सामने जंगले के बीच कई बकरियों को रखा जाता है। मां के स्वरूप में पूजी जाने वाली इन बकरियों की सैकड़ों लोग पूजा करते हैं। लेकिन कोविड संकट के चलते झ्स जंगले को बाहर से बंद रखा जाएगा। जंगले के भीतर एक या दो बकरियां रखी जाएंगी, जिनके बाहर से ही दर्शन करने होंगे। उन्हें छूने की इजाजत नहीं होगी। महंत बिट्टा ने श्रद्धालुओं से अपील की कि कोविड संकट के खत्म होने तक वे मंदिर में घर से बकरियां चढ़ाने के लिए साथ में न लाएं। मंदिर में बकरियां रखने के लिए जगह नहीं है।

सरकार की एसओपी का पूरा पालन किया जाएगा
शहर के सभी मंदिरों में 16 अगस्त से आम लोगों को प्रवेश मिलेगा। हालांकि अब मंदिरों में प्रवेश और दर्शन करना पहले की तुलना में काफी अलग होगा। मंदिर में आने वाले भक्तों को भगवान की प्रतिमा, पवित्र पुस्तक और घंटी को छूने की इजाजत नहीं होगी। इसको देखते हुए मंदिरों में लगी घंटी को कपड़ा बांधा गया है। बावे वाली माता मंदिर के साथ रघुनाथ मंदिर में में भी सभी श्रद्धालुओं की थर्मल स्क्रीनिंग होगी। धर्मार्थ ट्रस्ट जम्मू-कश्मीर ने सभी मंदिरों को खोलने के लिए पर्याप्त व्यवस्था की है। अध्यक्ष मुबारक सिंह के अनुसार ट्रस्ट से संबंधित सभी मंदिरों में भी तैयारियां शुरू कर दी हैं। सरकार की ओर से जारी एसओपी का पूरी तरह से पालन किया जाएगा।

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