जम्मू कश्मीर के लोगों ने नहीं चुकाए 7 हजार करोड़
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पिछली सरकार ने कुछ काम नहीं किया, जिसकी वजह से बिजली महकमा देनदारी के बोझ तले दब गया है। 61 फीसदी बिजली घाटे के बावजूद वर्तमान सरकार सुचारु विद्युत आपूर्ति के लिए पूरा प्रयास कर रही है।
कुछ समय जरूर लगेगा, लेकिन, बिजली आपूर्ति तंत्र को रियासत में सुधारने का लक्ष्य हासिल किया जाएगा। रविवार को कठुआ दौरे पर आए डिप्टी सीएम डॉ. निर्मल सिंह ने ये बातें कहीं। गौरतलब है कि रियासत के उप मुख्यमंत्री डॉ. निर्मल सिंह के पास बिजली मंत्री का भी कार्यभार है।
कठुआ में हटली मोड़ स्थित पॉवर स्टेशन में विभागीय अधिकारियों के साथ लंबी बैठक के बाद मीडिया से मुखातिब डॉ. सिंह ने कहा कि रियासत पर बिजली घाटे की वजह से 7000 करोड़ की देनदारी हो चुकी है।
सरकार को कैसे लग रहा है चूना
वर्तमान में यदि विभाग 100 रुपये खर्च कर रहा है, तो उसे वापस केवल 39 रुपये ही मिलते हैं। 61 फीसदी घाटे से उबरने के लिए लोगों को सहयोग करना होगा। देनदारी के बढ़ते बोझ पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने जनरल एमनेस्टी स्कीम शुरू की है।
जिसके तहत मार्च 2016 से पूर्व बिजली विभाग के उपभोक्ताओं की बकाया राशि पर लगने वाले ब्याज में छूट दी जा रही है। चार किस्तों में यदि उपभोक्ता अपनी बकाया राशि जमा करवाते हैं तो उनकी बकाया राशि पर लगने वाला ब्याज माफ कर दिया जाएगा।
बिजली मंत्री ने कहा कि राज्य के लोगों को यदि 24 घंटे लगातार बिजली चाहिए तो कम से कम खर्च होने वाली बिजली का किराया तो देना पड़ेगा। सरकार के पास बिजली खर्च के भुगतान को पूरा किए बिना सुधार का दूसरा कोई विकल्प नहीं है।