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जम्मू-कश्मीर: 35 साल तक कोर्ट को किया गुमराह, अब तीन लाख जुर्माने के साथ केस दर्ज
Wed, 29 Dec 2021 08:45 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 29 Dec 2021 08:45 AM IST
सार
कोर्ट ने कहा कि संपत्ति हड़पने के लिए फर्जीवाड़ा करते हुए याचिका दायर करने वालों ने अदालत को 35 साल तक गुमराह किया गया। मामला खारिज करने के साथ जुर्माने का फैसला समाज को सीख देने के लिए सुनाया जा रहा है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Social Media
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विस्तार
तलाकशुदा शौहर की संपत्ति हड़पने के लिए भाइयों के साथ मिलकर फर्जीवाड़ा करने के मामले को कोर्ट ने खारिज करते हुए तीन लाख का जुर्माना लगाया है। पूर्व दंपती की मौत हो चुकी है। फर्जीवाड़े में शामिल चार लोगों के खिलाफ कोर्ट ने मामला दर्ज कर सभी के पहचान संबंधी दस्तावेजों की जांच के भी आदेश दिए हैं।
कोर्ट ने कहा कि संपत्ति हड़पने के लिए फर्जीवाड़ा करते हुए याचिका दायर करने वालों ने अदालत को 35 साल तक गुमराह किया गया। मामला खारिज करने के साथ जुर्माने का फैसला समाज को सीख देने के लिए सुनाया जा रहा है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश श्रीनगर की अदालत में सोलिना रामबाग बाला के मामले पर कोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया। अभियोजन के अनुसार वर्ष 1971 में 54 वर्षीय व्यक्ति ने 21 साल की युवती से 80 हजार रुपये मेहर के साथ निकाह किया। बाद में दोनों का तलाक हो गया। दंपती की कोई औलाद नहीं हुई। तलाक के बाद महिला ने अपने भाइयों के साथ मिलकर संपत्ति हड़पने के लिए कहानी गढ़ी।
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व्यक्ति की 1988 में मौत हो गई, जबकि महिला ने कोर्ट में दावा किया कि मृतक उसका शौहर था, जिसका एक बेटा भी है। लिहाजा मां-बेटा मृतक की संपत्ति के हकदार हैं। अदालत ने पाया कि दंपती रहते उनकी कोई संतान नहीं थी। जिसे बाद में बेटा बताया गया वह महिला का भाई था। इस मामले में अदालत ने महिला के भाई मंजूर अहमद बकल, अब्दुल रशीद बकल और शफकद अहमद बकल पर मामला दर्ज करने के आदेश दिए।
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कोर्ट ने कहा कि संपत्ति हड़पने के लिए फर्जीवाड़ा करते हुए याचिका दायर करने वालों ने अदालत को 35 साल तक गुमराह किया गया। मामला खारिज करने के साथ जुर्माने का फैसला समाज को सीख देने के लिए सुनाया जा रहा है।
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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश श्रीनगर की अदालत में सोलिना रामबाग बाला के मामले पर कोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया। अभियोजन के अनुसार वर्ष 1971 में 54 वर्षीय व्यक्ति ने 21 साल की युवती से 80 हजार रुपये मेहर के साथ निकाह किया। बाद में दोनों का तलाक हो गया। दंपती की कोई औलाद नहीं हुई। तलाक के बाद महिला ने अपने भाइयों के साथ मिलकर संपत्ति हड़पने के लिए कहानी गढ़ी।
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व्यक्ति की 1988 में मौत हो गई, जबकि महिला ने कोर्ट में दावा किया कि मृतक उसका शौहर था, जिसका एक बेटा भी है। लिहाजा मां-बेटा मृतक की संपत्ति के हकदार हैं। अदालत ने पाया कि दंपती रहते उनकी कोई संतान नहीं थी। जिसे बाद में बेटा बताया गया वह महिला का भाई था। इस मामले में अदालत ने महिला के भाई मंजूर अहमद बकल, अब्दुल रशीद बकल और शफकद अहमद बकल पर मामला दर्ज करने के आदेश दिए।