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जम्मू-कश्मीर : सेना और दफ्तरों के लिए तिरंगा बना देशप्रेम बढ़ा रही हैं कश्मीरी युवतियां
Sun, 18 Jul 2021 04:02 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमृतपाल सिंह बाली, कुनन पोशपोरा (कुपवाड़ा)
अमृतपाल सिंह बाली, कुनन पोशपोरा (कुपवाड़ा)
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 18 Jul 2021 04:02 AM IST
सार
- कुपवाड़ा के कुनन-पोशपोरा इलाके में जन शिक्षण संस्थान योजना से महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर
- राष्ट्रीय ध्वज बना रही युवतियां बोलीं - सेना की तरह हमें भी हो रहा देश सेवा जैसा अहसास
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तिरंगा
- फोटो : social media
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विस्तार
आतंकवाद के शुरुआती दौर में जहां सेना पर सवाल उठते थे, श्रीनगर से 110 किलोमीटर दूर कुपवाड़ा जिले के उसी कुनन-पोशपोरा इलाके में आज कश्मीरी महिलाएं सेना और सरकारी दफ्तरों के लिए बड़े पैमाने पर तिरंगा (राष्ट्रीय ध्वज) सिलती हैं। कुनन-बबागुंड गांव की महिलाएं कहती हैं कि एक सेना वर्दी पहनकर देश सेवा कर रही है। वहीं, हम तिरंगा बनाकर देशप्रेम की भावना बढ़ाने में योगदान दे रही हैं।'
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केंद्रीय मंत्रालय के जन शिक्षण संस्थान योजना के तहत सेना के सहयोग से कुनन-बबागुंड गांव में एक टेलरिंग और कटाई सेंटर चलता है, जहां कुनन-पोशपोरा इलाके की लड़कियां यह कार्य सीखती हैं। इस टेलरिंग और कटिंग सेंटर की प्रशिक्षक जमीला बेगम ने बताया कि यह सेंटर सेना की मदद से चलाया जा रहा है। इस सेंटर में कुनन-बबाकुंड और इसके आसपास के गांवों की लड़कियों को टेलरिंग, कटिंग और फैशन डिजाइनिंग का काम सिखाया जाता है।
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जमीला ने बताया कि यह सेंटर 17 मार्च 2021 से शुरू किया गया है। यहां करीब 40 लड़कियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ट्रेनिंग के साथ-साथ ये लड़कियां ड्रेस भी तैयार करती हैं। हाल ही में मास्क का ऑर्डर आया था। उसे भी इन्होंने ही तैयार किया। जमीला के अनुसार, इस सेंटर में लड़कियां तिरंगा सिलती हैं, और उसकी सप्लाई सेना में होती है। जब हम यहां तिरंगे बनाते हैं, तो ऐसा एहसास होता है कि हम भी अपने देश की सेवा में अपना योगदान दे रहे हैं।
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एक अन्य युवती रुकैया ने बताया कि वह यहां सिलाई और कटाई का काम सीख रही है। उसने बताया कि आगे जाकर उसे काफी फायदा होगा, और वह इससे अपना रोजगार कमा सकेंगी। रुकैया के अनुसार वह आज तक इतने तिरंगे बना चुकी है, जिसकी कोई गिनती भी नहीं। एक अन्य लड़की रुबीना बशीर ने कहा कि शुरू में यहां बहुत कम लड़कियां थीं। लेकिन, जब उन्हें लगा कि वह यहां से कुछ सीख कर जाएंगी, तो उनकी संख्या में बढ़ोतरी हुई। रुबीना ने कहा कि वह चाहती है कि ऐसे सेंटर लगभग सभी गांवों में शुरू किए जाने चाहिए। इससे महिलाएं आत्मनिर्भर होंगी।
काउंसिलिंग के बाद लोगों को मिलती है सही दिशा: डॉ. इकबाल
कश्मीर में जन शिक्षण संस्थान के निदेशक डॉ. इकबाल ने बताया कि पूरे भारत में 240 जिलों में कुल 240 जीएसएस सेंटर हैं। और कश्मीर में केवल एक ही इंस्टीट्यूट है, जो कुपवाड़ा में है। इसके अंतर्गत जिले में करीब 60 सेंटर हैं, जिसमें से 40 सेंटर सेना के सहयोग से चलाए जा रहे हैं। इनमें इलेक्ट्रिशियन, शेफ, फ्रंटलाइन वर्कर, हेंडीक्राफ्ट, फैशन डिजाइनिंग, आदि कोर्स कराए जा रहे हैं। कुनन गांव में छह महीने से टेलरिंग और कटिंग सेंटर चलाया जा रहा है। यहां दो बैच चल रहे हैं, जिनके लिए एक निर्देशक रखा गया है। इनमें करीब छह सेंटर ऐसे हैं, जहां सेना और बाकी सरकारी दफ्तरों के लिए राष्ट्रीय ध्वज बनाया जाता है।