इस बार किसान सीधे मंडियों में बेचेंगे केसर, सरकार देने जा रही ई-मार्केटिंग सुविधा
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कश्मीरी केसर को मंडियों में उतारने के लिए सरकार इस बार किसानों को ई-मार्केटिंग सुविधा देने जा रही है। इसके लिए प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। किसानों का रिकॉर्ड ऑनलाइन किया जा रहा है। नवंबर माह से किसान मंडियों से सीधा संपर्क कर केसर बेच सकेंगे और कीमत भी ऑनलाइन ले सकेंगे। किसानों को इसका फायदा ये होगा कि वह बिचौलियों के बजाय खुद ही सीधे मंडियों में फसल बेच सकेंगे। इससे उन्हें कमीशन नहीं देनी होगी और उनकी आय में इजाफा होगा।
सरकार की तरफ से केसर मिशन के तहत केसर के उत्थान के लिए जीआई टैगिंग शुरू की गई है। इसमें किसानों को केसर की पैदावार बढ़ाने के अलावा अन्य सुविधाएं भी मुहैया करवाई गई हैं। साथ ही बिचौलियों को बीच से हटाया गया है।
पैकिंग में गुणवत्ता और जीआई टैगिंग भी
कश्मीरी केसर की इस बार पैकिंग भी आधुनिक तकनीक से होगी। इसमें कश्मीरी केसर की गुणवत्ता और जीआई टैगिंग का जिक्र होगा। इसका मतलब है कि केसर शत प्रतिशत गुणवत्ता वाला है, घटिया नहीं। इसके लिए डिजाइन तैयार किया जा रहा है। डिजाइन एक माह के अंदर फाइनल होना है।
इस बार तीन लाख प्रति किलो बिकने के आसार
226 गांवों के 40 हजार से ज्यादा किसान इस व्यवसाय से जुड़े हैं। साल 2014 में बाढ़ आने और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के कारण आधे से ज्यादा किसान केसर की खेती छोड़ चुके हैं। अब केसर मिशन के तहत किसानों को बाजार उपलब्ध कराने समेत अन्य सुविधाएं दी गई हैं। इस बार किसान अच्छे पैसे कमा सकेंगे। इस बार केसर की कीमत एक लाख नहीं बल्कि तीन लाख प्रति किलो बिकने की संभावना है।
केसर को बेचने के लिए ई मार्केटिंग सुविधा दी गई है। मंडियो में किसान सीधा संपर्क करेंगे और केसर को बेचेंगे। राशि भी सीधी किसानों के खाते में जाएगी। खरीद के दौरान बिचौलिये पैसे कमाते थे। इस बार इन्हें हटा दिया गया है।- अल्ताफ अंद्राबी, मिशन निदेशक, केसर मिशन