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जम्मू-कश्मीरः निक्की तवी बाढ़ मामले में जेडीए के वाइस चेयरमैन हाईकोर्ट में तलब

Sun, 23 Aug 2020 04:39 PM IST
प्रशांत कुमार जेएनएफ, जम्मू
जेएनएफ, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Sun, 23 Aug 2020 04:39 PM IST
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Jammu and Kashmir, JDC Vice Chairman summoned in High Court in Nikki Tawi flood case
हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति विनोद चटर्जी ने निक्की तवी में बाढ़ से नुकसान पर दायर याचिका की सुनवाई में जेडीए वाइस चेयरमैन की अनुपस्थिति पर उन्हें अगली सुनवाई में उपस्थित होने के आदेश दिए हैं। जनहित याचिका बरजाला और खंडवाल (निक्की तवी क्षेत्र) के ग्रामीण की ओर से दायर की गई है। जिसमें नदी के अधिकतर पानी को बड़ी तवी के बजाय निक्की तवी में डायवर्ट करने से हो रहे नुकसान का मामला उठाया गया है।

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अधिवक्ता राहुल रैना, सुप्रिया चौहान, मोहम्मद जुल्कारनैन चौधरी, इरतिजा मुश्ताक सलारिया और मुजफ्फर अली शाह के साथ एडवोकेट शेख शकील अहमद ने दलीलें दीं। चीफ जस्टिस गीता मित्तल की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने पाया कि जेडीए की ओर से कोई उपस्थिति नहीं है। 16 मार्च 2020 के आदेश में प्रतिवादी के रूप में जेडीए अधिकारी को पेश होने को कहा गया था।
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केंद्रीय जल आयोग द्वारा दायर हलफनामे के पैरा 4 का जवाब देने के लिए जिसमें यह रेखांकित किया गया था कि जेडीए की लापरवाही के कारण अनुमानित लागत 3.37 करोड़ रुपये की अनुमानित को सूची से हटा दिया गया है। जल शक्ति मंत्रालय द्वारा डीपीआर में जेडीए द्वारा कमियों को दूर नहीं करने को कहा था।


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अधिवक्ता एसएस अहमद ने तर्क दिया कि योजना विकास और निगरानी विभाग के प्रमुख सचिव रोहित कंसल 16 मार्च को डिवीजन बेंच के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित थे और उन्होंने डिवीजन बेंच को सूचित किया था कि तवी बेसिन के लिए बाढ़ शमन और व्यापक नदी प्रबंधन उपायों के लिए विश्व बैंक की परियोजना रिपोर्ट पर काम चल रहा है, जो जून तक पूरा होने की उम्मीद है।

अधिवक्ता ने कहा कि परियोजना रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए सुनिश्चित की गई समय सीमा पहले ही समाप्त हो गई है। इस तरह की रिपोर्ट को रिकॉर्ड में नहीं रखा गया है। डिवीजन बेंच ने मामले की गंभीरता को देखते हुए निर्देश दिया कि इस परियोजना के संबंध में रिपोर्ट डिप्टी एजी केडीएस कोतवाल दायर करें।

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