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जम्मू-कश्मीर: श्रमिकों को उचित मजदूरी दिलाने से जुड़ी याचिका अस्पष्ट होने पर हाईकोर्ट ने की बंद

Sat, 02 Oct 2021 03:43 PM IST
करिश्मा चिब न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: करिश्मा चिब Updated Sat, 02 Oct 2021 03:43 PM IST
सार

अदालत ने कहा-इसका पता लगाया जाए कि मजदूरों को उचित भुगतान हो रहा है अथवा नहीं। इस प्रकार की याचिका को व्यक्तिगत या उनके संघ की ओर से आवश्यक होने पर सक्षम प्राधिकारी के समक्ष पेश किया जाए।

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Jammu and Kashmir: High court closed after the petition related to getting fair wages to workers is unclear
न्यायालय

विस्तार

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को एक अस्पष्ट जनहित याचिका को बंद करने के बाद यह उम्मीद जताई कि जिन श्रमिकों को उचित मजदूरी का भुगतान नहीं हो रहा है उनका पता लगाया जाए। अदालत के समक्ष पेश की गई जनहित याचिका में कहा गया था कि जम्मू-कश्मीर में निर्माण क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों को निर्धारित मजदूरी नहीं मिल रही है।

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उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पंकज मित्थल और न्यायमूर्ति विनोद चटर्जी कौल की खंडपीठ ने कहा कि जनहित याचिका में ऐसा कोई विशिष्ट उदाहरण नहीं है जिससे पता चले कि वहां कानून के अनुसार, मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया है और न ही सुविधाएं प्रदान की गईं। अदालत ने कहा, याचिका अत्यधिक अस्पष्ट है।
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उन्होंने कहा कि अदालत से इस बात की उम्मीद नहीं की जा सकती है कि वे इस मामले में लगातार जांच करेंगे और उन श्रमिकों का पता लगाएंगे जिन्हें उचित मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया है। इस प्रकार की याचिका को व्यक्तिगत या उनके संघ की ओर से आवश्यक होने पर सक्षम प्राधिकारी के समक्ष पेश किया जाए।
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वर्ष 2018 में शेख गुलाम रसूल नाम के शख्स ने जनहित याचिका दायर कर जम्मू-कश्मीर के विभिन्न इलाकों में निर्माण कार्यों से जुड़े मजदूरों को केंद्रीय श्रम कानूनों के अनुसार निर्धारित मजदूरी और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई थी। साथ ही निर्माण श्रमिकों के अधिकारों के बारे में आम जनता को शिक्षित करने के लिए कल्याण बोर्ड को निर्देश देने की भी मांग की गई थी।

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