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जम्मू-कश्मीर: हिंदी में हो सरकारी कामकाज, प्रदेश में जमीनी स्तर पर किया जाए प्रसार

Tue, 14 Sep 2021 06:59 PM IST
करिश्मा चिब न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: करिश्मा चिब Updated Tue, 14 Sep 2021 06:59 PM IST
सार

हिंदी दिवस पर संस्थाओं ने कहा - राजस्व; कोर्ट, पुलिस और अन्य विभागों में हिंदी में किया जाए कामकाज।

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Jammu and Kashmir: Government work should be done in Hindi, should be spread at the ground level in the state
हिंदी दिवस - फोटो : pixabay

विस्तार

प्रदेश में सरल शब्दाली के साथ हिंदी का प्रचार-प्रसार हो। राजस्व विभाग, कोर्ट और पुलिस समेत अन्य विभागों में हिंदी में कामकाज शुरू करने की जरूरत है। यह कहना है सामुदायिक सभाओं और सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों का। उनके अनुसार उर्दू और अंग्रेजी में लिखे गए दस्तावेजों का पड़ने में आम लोगों को मुश्किल होती है। हालांकि प्रदेश में हिंदी के पाठक अन्य भाषाओं से अधिक है।

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केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद हिंदी को राजभाषा का दर्जा मिला है, लेकिन हिंदी में अभी तक किसी भी कार्यालय में कामकाज शुरू नहीं हो सका है। संस्थाओं के अनुसार हिंदी को सिर्फ राजभाषा का दर्जा मिला है, जमीनी स्तर इसके प्रचार-प्रसार के लिए काफी काम करने की जरूरत है।
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हिंदी भाषा में हमें संस्कार मिले हैं। शिक्षण संस्थानों में भी पठन-पाठन का कार्य हिंदी में लंबे समय से करवाया जा रहा है। लेकिन हिंदी भाषा लोगों को कार्यालयों में परेशानी आती है। उर्दू और अंग्रेजी में लिखे पत्र का अनुवाद करवाना मुश्किल हो जाता है। कोर्ट, पुलिस और राजस्व विभाग में तमाम रिकॉर्ड हिंदी में अनुदित करवाने की जरूरत है। आधिकारिक भाषा अधिनियम, 2020 के अधीन राजभाषा का दर्जा मिलने के बाद भी किसी भी कार्यालय में हिंदी में कामकाज शुरू नहीं हो पाया है। डोगरा सदर सभा जल्द इस मुद्दे पर बैठक कर चर्चा करेगी। - गुलचैन सिंह चाढ़क, अध्यक्ष डोगरा सदर सभा
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हिंदी को लेकर सोच बदलने की जरूरत है। यह काम शिक्षक से ज्यादा और कोई नहीं कर सकता है। राष्ट्र भाषा हिंदी के विकास में शिक्षक से बड़ी भूमिका कोई नहीं निभा सकता है। छात्रों में हिंदी का भाव पैदा करने के लिए उसे इंग्लिश के बराबर महत्ता देनी होगी। नई शिक्षा नीति भी राष्ट्र भाषा हिंदी को बढ़ावा देने की बात करती है। मैं अपने स्कूल में हिंदी से जुड़े कार्यक्रम के आयोजन के साथ-साथ छात्रों को हिंदी साहित्य के बारे में पढ़ने के लिए प्रेरित करती हूं। हिंदी हमारी राष्ट्र भाषा है इसका स्थान मातृ भाषा के बराबर होना चाहिए। मैने हिंदी में ही अपनी पहली पुस्तक लिखी है। - अलका शर्मा, अध्यापिका, सतवारी

यह भी पढ़ें- जम्मू-कश्मीर: पुलवामा में आतंकियों ने किया ग्रेनेड हमला, तीन नागरिक घायल, जारी है तलाशी अभियान

राजस्व विभाग समेत अन्य विभागों के दफ्तरों में अभी तक उर्दू में कामकाज हो रहा है। लोगों को अपने रिकार्ड का कोई पता नहीं है। अधिकांश लोग हिंदी जानते हैं। उन्हें उर्दू लिखना, पढ़ना नहीं आता है। सरकार को उर्दू से हिंदी में रिकार्डों का अनुवाद करवाने की व्यवस्था करनी होगी। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा। लोगों को रिकार्ड का पता भी चल सकेगा। - वेद प्रकाश शर्मा, अध्यक्ष, ब्राह्मण प्रतिनिधि सभा


केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद कई कानून बदल गए हैं। लेकिन रिकार्ड पहले की तरह हैं। किसी भी विभाग में हिंदी भाषा में पत्राचार नहीं होता है। इससे बाहर के आने वाले अधिकारियों को भी समस्या आती है। आम व्यक्ति कोर्ट, पुलिस या बाकी के विभागों के रिकार्ड को पढ़ नहीं सकता है। रिकार्डों को हिंदी में बदलने की जरूरत है। - ब्रिज मेहरा, प्रधान, अखिल भारतीय कश्यप महासंघ

आशा थी कि अब दफ्तरों में ठोकरें नहीं खानी पड़ेगी। लेकिन राजकाज की व्यवस्था पुराने तरीके से ही चलती रही। लोगों की समस्या को ध्यान में रखते हुए सरकार को कामकाज हिंदी में करने की योजना बनानी चाहिए। - देवेंद्र सेठ अध्यक्ष, विशाल खत्री सभा
 

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