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मोदी-शरीफ पर टिकी सबकी निगाहें, मुलाकात ख्ात्म

Fri, 10 Jul 2015 11:36 AM IST
Updated Fri, 10 Jul 2015 11:36 AM IST
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Jammu and Kashmir eyes on Modi-Sharif met

उफा में भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी और पाकिस्तानी पीएम नवाज शरीफ की मुलाकात जारी है। इस मुलाकात पर न केवल पूरी दुनिया की निगाहें टिकीं हैं, बल्कि कश्मीर की भी इस मुलाकात पर नजरें गड़ीं हुई हैं।

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घाटी आधारित पार्टियों पीडीपी एवं नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) के साथ ही अलगाववादियों को भी दोनों नेताओं के बीच होने वाली बातचीत तथा रुख का इंतजार है।

दोनों के बीच इस बहुप्रतीक्षित मुलाकात को लेकर घाटी में सियासी पारा चढ़ा हुआ है। पीडीपी तथा नेकां दोनों का ही मानना है कि दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच होने वाली बातचीत का घाटी की सियासत पर असर पड़ेगा।
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रियासत के मुख्यमंत्री तथा पीडीपी के संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद सईद घाटी में अमन शांति की बहाली के लिए हुर्रियत नेताओं से बातचीत की वकालत करते रहे हैं।

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हुर्रियत से किसी प्रकार की बातचीत से इनकार

Jammu and Kashmir eyes on Modi-Sharif met

गत दो जुलाई को रियासत के दौरे पर आए केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने साफ शब्दों में हुर्रियत से किसी प्रकार की बातचीत से इनकार कर दिया था। उनका कहना था कि केंद्र सरकार हर किसी से बातचीत को तैयार है बशर्ते उसे राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को बंद कर मुख्य धारा में लौटना होगा।

राजनाथ के बयान के बाद उफा में मोदी-शरीफ मुलाकात काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि कश्मीर मुद्दे पर केंद्र सरकार का रुख बिल्कुल स्पष्ट है और वह अपने कदम से बिल्कुल टस से मस नहीं होने वाला है।

जबकि पाकिस्तान की ओर से लगातार कश्मीर को लेकर भड़काऊ बयानबाजी की जाती रही है। इस मुलाकात में कश्मीर मुद्दे पर क्या बातचीत होती है तथा पाक की सरजमीं से आतंकवाद को बढ़ावा देने संबंधी गतिविधियों पर रोक के लिए मोदी क्या संदेश देते हैं यह महत्वपूर्ण है।

देश विरोधी नारेबाजी पर गंभीर हुई सरकार

Jammu and Kashmir eyes on Modi-Sharif met

हुर्रियत घाटी में आजादी के समर्थन में लगातार रैलियां करता रहा है। युवाओं तथा महिलाओं को भड़काकर देश विरोधी नारेबाजी की जाती रही हैं।

मुफ्ती सरकार बनने के बाद मार्च महीने में अलगाववादी मसर्रत आलम को जेल से रिहा किया गया, लेकिन जेल से निकलते ही वह भारत विरोधी अभियान में जुट गया।

घाटी में गिलानी के स्वागत में आयोजित रैली में भारत विरोधी नारेबाजी तथा पाकिस्तानी झंडे लहराए जाने को केंद्र सरकार ने गंभीरता से लिया।

बाद में उसे पीएसए में गिरफ्तार कर कोट भलवाल सेंट्रल जेल में भेज दिया गया। इसके बाद भी लगातार घाटी में अलगाववादियों की ओर से भारत विरोधी गतिविधियां जारी रहीं।

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