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जम्मू-कश्मीर: इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण शुल्क माफ, लोगों का नहीं कोई रुझान

Fri, 30 Jul 2021 07:58 PM IST
करिश्मा चिब न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: करिश्मा चिब Updated Fri, 30 Jul 2021 07:58 PM IST
सार

चार्जिंग स्टेशन और मेंटेनेंस के अभाव में लोग नहीं खरीद रहे वाहन।

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Jammu and Kashmir: Electric vehicles registration fee waived, people are not interested
इलेक्ट्रिक गाड़ियां - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

जम्मू-कश्मीर में इलेक्ट्रिक वाहनों पर पंजीकरण शुल्क नहीं लगाने के बावजूद लोगों का इन्हें खरीदने में कोई रुझान नहीं है। आम लोगों के साथ-साथ सरकारी कार्यालयों के लिए अभी भी पेट्रोल और डीजल के वाहनों की खरीद को महत्व दिया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (जेकेआरटीसी) के बेड़े में 40 इलेक्ट्रिक बसों के अलावा कोई सार्वजनिक वाहन परिवहन विभाग के पास पंजीकृत नहीं है।  
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प्रदेश सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए पंजीकरण शुल्क नहीं लगने का फैसला लिया था। इसके चार महीने बाद भी इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण नहीं हो रहा है। जम्मू जिले में अभी तक सिर्फ 10 दोपहिया वाहन पंजीकृत हुए है। 50 सीसी से कम के इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण आरटीओ और एआरटीओ में नहीं होता है। प्रदेश में प्रति वर्ष औसतन 50 से 70 हजार वाहन पंजीकृत होते हैं।
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इसके मुकाबले इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या एक फीसदी भी नहीं है। परिवहन निगम भी मानता है कि इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति लोगों का कम रुझान सुविधाओं का अभाव है। लोग गाड़ियां तो खरीदना चाहते हैं, लेकिन मेंटेनेंस और चार्जिंग की सुविधा नहीं होने से वाहनों की खरीद से बचते है। 50 सीसी के कम के इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद जरूर होती है, लेकिन कार या अन्य सार्वजनिक वाहनों की खरीद नहीं बढ़ रही।
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यह भी पढ़ें- जम्मू-कश्मीर: दुग्ध उत्पादन में प्रदेश बनेगा आत्मनिर्भर, इस साल खुलेंगी 800 डेयरी इकाइयां

इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ अभी उतना रुझान नहीं बढ़ा पाया है। आरटीओ में दस के करीब ही दोपहिया वाहन पंजीकृत हुए हैं। कोविड के कारण लोगों के रोजगार पर असर पड़ा है, जो कम रुझान होने का भी बड़ा कारण है। साथ ही बुनियादी ढांचे का अभाव भी है। - प्रदीप कुमार, परिवहन आयुक्त
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