जम्मू-कश्मीर को मिल सकती है रेलवे डिवीजन की सौगात, हजारों को मिलेगा रोजगार, रेल कर्मियों को होगा लाभ
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प्रदेश को 2021-22 के लिए जारी हो रहे वित्त बजट में रेलवे डिविजन की सौगात मिल सकती है। केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में रेलवे डिवीजन बनाने की संभावनाएं तलाशने के लिए 12 नवंबर 2019 को तीन सदस्यीय कमेटी बनाई थी, जिसने केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंप दी है। इस बजट में रेलवे डिवीजन के लिए राशि मंजूर होने की उम्मीद है।
धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन की दृष्टि से प्रमुख स्थानों में शामिल जम्मू-कश्मीर में रेलवे डिवीजन बनने से न सिर्फ प्रदेश में रेल नेटवर्क का विस्तार होगा, बल्कि हजारों लोगों को रोजगार भी मिलेगा। 2013-14 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में प्रदेश को रेलवे डिवीजन बनाने की कवायद शुरू हुई थी, लेकिन यह कवायद परवान नहीं चढ़ पाई। 2019 में एक बार फिर सरकार ने इसे लेकर कवायद शुरू की और डिवीजन की संभावनाएं तलाशने के लिए कमेटी गठित की।
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कमेटी ने डिवीजन से जुड़े वित्तीय, प्रशासनिक और अन्य व्यावहारिक पहलुओं का अध्ययन कर मंत्रालय को रिपोर्ट सौंपी है। इस बार बजट में सरकार प्रदेश में रेलवे नेटवर्क को विस्तार देते हुए डिवीजन को हरी झंडी दे सकती है। वर्तमान में जम्मू-कश्मीर फिरोजपुर डिवीजन के अधीन आता है, जो देश में सबसे बड़ा रेलवे डिवीजन है। फिरोजपुर रेल डिवीजन में पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के 1800 किलोमीटर लंबे रेलवे ट्रैक पर गाड़ियों का परिचालन होता है। इस डिवीजन में 239 छोटे-बड़े रेलवे स्टेशन आते हैं।
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हजारों रेल कर्मियों को होगा लाभ
नए रेलवे डिवीजन के बनने से हजारों रेलवे कर्मियों को लाभ होगा। वर्तमान में जम्मू संभाग में ढाई हजार, जबकि कश्मीर संभाग में करीब पांच हजार रेलकर्मी काम कर रहे हैं। हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों के हजारों कर्मचारी यहां तैनात हैं। इन कर्मियों को छोटे से काम के लिए फिरोजपुर के चक्कर काटने पड़ते हैं।
जम्मू में डिवीजन का मुख्यालय बनने से रेलकर्मियों को लाभ होगा। रेलवे पैसेंजर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय कुमार शर्मा ने जम्मू में रेलवे डिवीजन के गठन को लेकर मंत्रालय को लगातार पत्र लिखे हैं। उनका कहना है कि उम्मीद है इस बार रेलवे डिवीजन की सौगात मिलेगी। सरकार को जम्मू में ही रेलवे डिवीजन का गठन करना चाहिए।