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जम्मू-कश्मीर: प्रदेश के जीएसटी कानून में संशोधन, लागू होगा ट्रैक-ट्रेस सिस्टम, उत्पादों पर लगेगा यूनिक निशान
Sat, 01 Nov 2025 03:35 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 01 Nov 2025 03:35 PM IST
सार
जम्मू-कश्मीर में जीएसटी कानून में संशोधन होगा। ट्रैक-ट्रेस सिस्टम लागू होगा। उत्पादों पर यूनिक निशान लगेगा।
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J&K Legislative Assembly
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में शुक्रवार को जम्मू कश्मीर वस्तु एवं सेवा कर (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2025 पारित कर दिया गया। इस विधेयक के माध्यम से प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार और जीएसटी परिषद की सिफारिशों के आधार पर राज्य के जीएसटी कानून में कई अहम बदलाव किए हैं।
संशोधन का उद्देश्य प्रदेश के कर कानून को केंद्र के संशोधित जीएसटी कानून के अनुरूप बनाना है। नए संशोधन के तहत अब सरकार कुछ वस्तुओं पर ट्रैक एंड ट्रेस प्रणाली लागू कर सकेगी।
इसके तहत उत्पादों पर एक विशेष डिजिटल निशान या कोड लगाया जाएगा जिससे उनकी आवाजाही पर निगरानी रखी जा सकेगी। इस व्यवस्था का मकसद टैक्स चोरी पर रोक लगाना और वस्तुओं की पारदर्शी ट्रैकिंग सुनिश्चित करना है।
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प्रणाली का पालन न करने पर एक लाख रुपये जुर्माना
संशोधन में यह भी प्रावधान है कि अगर कोई व्यापारी इस प्रणाली का पालन नहीं करता, तो उस पर एक लाख रुपये या वस्तु पर देय कर का दस फीसदी (जो अधिक हो) तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।
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संशोधन का उद्देश्य प्रदेश के कर कानून को केंद्र के संशोधित जीएसटी कानून के अनुरूप बनाना है। नए संशोधन के तहत अब सरकार कुछ वस्तुओं पर ट्रैक एंड ट्रेस प्रणाली लागू कर सकेगी।
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इसके तहत उत्पादों पर एक विशेष डिजिटल निशान या कोड लगाया जाएगा जिससे उनकी आवाजाही पर निगरानी रखी जा सकेगी। इस व्यवस्था का मकसद टैक्स चोरी पर रोक लगाना और वस्तुओं की पारदर्शी ट्रैकिंग सुनिश्चित करना है।
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प्रणाली का पालन न करने पर एक लाख रुपये जुर्माना
संशोधन में यह भी प्रावधान है कि अगर कोई व्यापारी इस प्रणाली का पालन नहीं करता, तो उस पर एक लाख रुपये या वस्तु पर देय कर का दस फीसदी (जो अधिक हो) तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।
अपील से पहले जुर्माने की 10 फीसदी राशि करानी होगी जमा
बिल के तहत वाउचर के लेनदेन को अब वस्तु या सेवा की श्रेणी में नहीं रखा गया है यानी अब वाउचर पर जीएसटी नहीं लगेगा। वहीं, संयंत्र और मशीनरी की परिभाषा को स्पष्ट किया गया है ताकि इनपुट टैक्स क्रेडिट के मामलों में कोई भ्रम न रहे।
बिल के तहत वाउचर के लेनदेन को अब वस्तु या सेवा की श्रेणी में नहीं रखा गया है यानी अब वाउचर पर जीएसटी नहीं लगेगा। वहीं, संयंत्र और मशीनरी की परिभाषा को स्पष्ट किया गया है ताकि इनपुट टैक्स क्रेडिट के मामलों में कोई भ्रम न रहे।
यह संशोधन आठ जुलाई 2017 से प्रभावी माना जाएगा। इसके साथ ही यह भी तय किया गया है कि यदि किसी व्यापारी को केवल जुर्माने से संबंधित आदेश मिला है और उस पर कोई कर देनदारी नहीं है, तो अपील करने से पहले उसे जुर्माने की राशि का दस प्रतिशत जमा करना होगा।
स्थानीय निकाय और सेज से जुड़े बदलाव
संशोधन में स्थानीय निकायों की परिभाषा को भी स्पष्ट किया गया है। अब स्थानीय कोष और नगर कोष शब्दों का अर्थ कानून में स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है ताकि संबंधित मामलों में कोई भ्रम न रहे। साथ ही विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) या मुक्त व्यापार गोदाम क्षेत्र में रखे गए माल की आपूर्ति को अब वस्तु या सेवा की आपूर्ति नहीं माना जाएगा।
संशोधन में स्थानीय निकायों की परिभाषा को भी स्पष्ट किया गया है। अब स्थानीय कोष और नगर कोष शब्दों का अर्थ कानून में स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है ताकि संबंधित मामलों में कोई भ्रम न रहे। साथ ही विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) या मुक्त व्यापार गोदाम क्षेत्र में रखे गए माल की आपूर्ति को अब वस्तु या सेवा की आपूर्ति नहीं माना जाएगा।
यह संशोधन आठ जुलाई 2017 से प्रभावी रहेगा। इस संशोधन से सरकार के कोष पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। इन संशोधनों का उद्देश्य वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजटीय प्रस्तावों को लागू करना और कर कानूनों को अधिक पारदर्शी व तकनीकी रूप से सुदृढ़ बनाना है।