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जम्मू-कश्मीर : बजट में बिजली, शिक्षा की बेहतरी और आपदा प्रबंधन पर खुला पिटारा

Wed, 02 Feb 2022 05:42 AM IST
दुष्यंत शर्मा बृजेश कुमार सिंह, जम्मू
बृजेश कुमार सिंह, जम्मू Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 02 Feb 2022 05:42 AM IST
सार

विश्व प्रसिद्ध नगीन व डल झील के संरक्षण, पुनर्वास के लिए 273 करोड़ आवंटित। अनुच्छेद 370 हटने के बाद पिछले तीन केंद्रीय बजट में पहली बार डल-नगीन के लिए प्रावधान।

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Jammu and Kashmir: Allocation for electricity, education and disaster management in the budget
बजट - फोटो : पीटीआई

विस्तार

केंद्रीय बजट में जम्मू-कश्मीर में बिजली, शिक्षा, आपदा प्रबंधन पर जोर देने के साथ ही विश्व प्रसिद्ध नगीन व डल झील को पुराने स्वरूप में लौटाने और पुनर्वास की प्रतिबद्धता की झलक बजट में दिख रही है। अनुच्छेद 370 हटने के बाद पिछले तीन केंद्रीय बजट में पहली बार डल व नगीन झीलों के लिए केंद्रीय बजट में प्रावधान किया है।

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इन झीलों में संरक्षण और पुनर्वास कार्यों के लिए बजट में 273 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह राशि केंद्रीय अनुदान के रूप में मिलेगी। इस बार बजट में केंद्रीय सहायता को मिलाकर कुल पांच हजार करोड़ रुपये अधिक का तोहफा मिला है। यानी जम्मू-कश्मीर के बजट में इस बार कुल 15 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। 
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बजट के जानकारों का कहना है कि केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय सहायता की राशि पिछले साल की तुलना में 11 फीसदी बढ़ाकर 33923 करोड़ रुपये की गई है जो केंद्र शासित प्रदेश में राजस्व घाटे और संसाधनों की कमी के अंतर को पूरा करने में सहायक होगी। इससे प्रदेश में विकास कार्यों को अंजाम देने में आसानी होगी। 
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बारिश-बर्फबारी और अन्य प्रकार की प्राकृतिक आपदा की स्थिति में प्रदेश के लोगों को आने वाली मुश्किलों से उबारने के लिए 279 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रदेश में निर्माणाधीन कीरू और रेटले जल विद्युत परियोजनाओं की गति जारी रखने के लिए 596.44 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया है। इनमें 624 मेगावाट कीरू के लिए 130 व 800 मेगावाट रेटले प्रोजेक्ट के लिए 476.44 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। 

श्रीनगर के डल-नगीन झील के संरक्षण व पुनर्वास के लिए 273 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। जम्मू-कश्मीर में विशेष छात्रवृत्ति योजना के तहत 225 करोड़ रुपये रखा गया है। वर्ष 2020-21 में यह राशि 128 करोड़ रुपये थी। जम्मू-कश्मीर समेत अन्य राज्यों में सीमावर्ती इलाकों के विकास संबंधी कार्यक्रम (बीएडीपी) के तहत 565.21 करोड़ रुपये का प्रावधान है। 

विनाशकारी बाढ़ से तबाह ढांचे के लिए नहीं फंड
बजट में 2014 में आई विनाशकारी बाढ़ से तबाह ढांचे की पुनर्स्थापना के लिए किसी भी प्रकार के अनुदान का प्रावधान नहीं किया गया है। 2021-22 में इसके लिए 647.46 करोड़ रुपये का संशोधित बजट प्रावधान किया गया था। 


हेलिकॉप्टर सेवा के लिए 16, सिविक एक्शन के लिए 25 करोड़
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के सुदूर इलाकों में हेलिकॉप्टर सेवा के लिए 16 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसमें लद्दाख के लिए पांच व जम्मू-कश्मीर के लिए 11 करोड़ रखे गए हैं। सिविक एक्शन प्रोग्राम के तहत केंद्रीय सुरक्षा बलों के लिए 25 करोड़ रुपये दिए गए हैं। 2021-22 में 24 करोड़ और 2020-21 में 19.45 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था।

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