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Jammu: बेटी संग खत्म हुए हमारे सारे सपने, किसी और की बिटिया संग न हो ऐसा, श्वेता के माता-पिता ने मांगा न्याय

Sun, 27 Jul 2025 06:12 PM IST
निकिता गुप्ता अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: निकिता गुप्ता Updated Sun, 27 Jul 2025 06:12 PM IST
सार

प्रधानमंत्री छात्रवृत्ति प्राप्त मेडिकल छात्रा श्वेता ने कॉलेज में मानसिक उत्पीड़न और करियर अनिश्चितता से तंग आकर आत्महत्या कर ली। परिजनों ने कॉलेज प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए न्याय की मांग की है।

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Jammu: All our dreams ended with our daughter, this should not happen to anyone else's daughter, Shweta's pare
श्वेता सिंह - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

एक बेटी, जिसे प्रधानमंत्री विशेष छात्रवृत्ति मिली थी, जो अक्सर कहा करती थी कि मम्मी-पापा डाक्टर बनकर आपका नाम रोशन करूंगी...हमेशा हंसती-खिलखिलाती रहती थी..। उसकी आंखों मेंं हमने अपने सपनों को पलते देखा था, बेटी के साथ ही वो सारे सपने मर गए, हमारी दुनिया हमेशा के लिए सूनी हो गई।

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श्वेता के पिता बलवंत सिंह रुंधे गले से ये कहते हुए गुस्से से भर उठते हैं, कहते हैं कि काॅलेज प्रशासन ने मुझे बताया होता तो मैं उनकी मांग पूरी कर देता। मां नीना देवी कहती हैं कि बेटी ने जरा सी भी भनक नहीं लगने दी। हमें न्याय चाहिए।पिता बलतवंत सिंह का कहना है कि सब कुछ ठीक चल रहा था।
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कॉलेज प्रशासन ने परीक्षाओं के लिए अतिरिक्त फीस मांगी होगी। श्वेता की अंतिम परीक्षाएं होने वाली थीं। मैं किसी भी तरह पैसों का इंतजाम कर लेता। उन्होंने अपनी मांगे बच्चों से नहीं, बल्कि अभिभावकों से करनी चाहिए। मुझे न्याय चाहिए।
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ऐसा किसी और छात्रा के साथ कभी नहीं होना चाहिए। ये भी कहा कि श्वेता ने इसके बारे में कभी चर्चा नहीं की। बलवंत सिंह जम्मू कश्मीर में बतौर कांस्टेबल तैनात हैं। मूल रूप से डोडा के रहने वाले हैं और इस समय पलौड़ा के सारिका बिहार में रहते हैं।

उसने एक बार भी नहीं बताया, वरना मैं उसे जाने ही नहीं देती श्वेता की मां बोली 
उसने जरा भी जिक्र किया होता तो मैं जाने नहीं देतीश्वेता की मां नीना देवी का कहना है कि अभी 20 जुलाई को ही वह वापस गई थी। इसके पहले पूरा एक महीना घर पर थी। हमारे एक रिश्तेदार की शादी थी डोडा में। श्वेता को भी शादी में जाना था। परीक्षाओं के चलते वह वापस चली गई। अभी तीन दिन पहले ही उसने हमसे वीडियो काल पर बात की थी। वे लोग डोडा में थे। उसकी बातों से कहीं भी नहीं लगा कि वह ये कदम उठा लेगी। हमसे कभी इस तरह का कोई जिक्र भी नहीं किया।

करियर की चिंता और सिस्टम की बेरुखी ने ले ली एक होनहार बेटी की जान
तीन पेज का सुसाइट नोट….करिअर की चिंता, पैसे लेकर छात्रों को पास करने के आरोपों से भराश्वेता का सुसाइड नोट तीन पन्नो का है। लिखा है कि दो साल से टार्चर कर रहे हैं। हमारा बैचमेट इंटर्न बन चुका है। उनको भी दो तीन महीने हो गए।

हमारा अभी फाइनल ईयर का फस्ट इंटरनल हो रहा है। वो भी फोर्सफुली जूनियर के साथ। झूठ बोला कि दो माह के भीतर एग्जाम ले लेंगे, लेकिन दो साल से ज्यादा हो गए। भगवान जाने डिग्री कब मिलेगी। फाइनल ईयर कब खत्म होगा।

बहुत टार्चर किया इन्होंने। शायद अब मैं एक्सप्लेन करने की हिम्मत में नहीं हूं। हमारा करियर खराब कर दिया है। न जाने कितने पैसे लेकर उन छात्रों को पास कर दिया, जो कभी कालेज भी नहीं आए। अपने मन से बच्चा फेल कर दो।

आड बेंच बना दो। पैसे दे बच्चा तो ठीक, वरना उनका खून पीता रहें। इनका और ड्रामा झेलने की मेरी कैपेसिटी नहीं है। अगर इंडिया में जस्टिस मिलता है तो प्लीज भगवत को परमानेंट जेल में डाल दो। उनको भी सेम टार्चर फील हो, जो बच्चों को फील हो रहा है। वरना कोई बात नहीं। मुझे पता है इंडिया में कितना जस्टिस मिल सकता है। मैं यहां सिरदर्दी से फ्री होना चाहती थी, तो हो गई। बाकी भगवान देख लेंगे।

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