फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Jammu akhnoor Accident news bodies reached crematorium directly in Majhola causing a lot of hue and cry

Jammu Accident: मुंह में भर गया था खून... उल्टा कर निकाला, तब बची घायलों की जान... बगैर सिर के आया राहुल का शव

Mon, 03 Jun 2024 10:35 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: शाहरुख खान Updated Mon, 03 Jun 2024 10:35 AM IST
सार

जम्मू के अखनूर में तीर्थयात्रियों को ले जा रही एक बस वीरवार को जम्मू-पुंछ हाईवे पर सड़क से फिसलकर 150 फीट गहरी खाई में खाई में गिर गई। इस भीषण हादसे में 22 लोगों की मौत हो गई, जबकि 69 घायल हैं। बस में 90 से अधिक लोग सवार थे।

विज्ञापन
Jammu akhnoor Accident news bodies reached crematorium directly in Majhola causing a lot of hue and cry
Jammu akhnoor Accident - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हाथरस के गांव मझोला की गलियों व अंत्येष्टि स्थल पर शनिवार की देर रात करीब 2.40 बजे ऐसा दृश्य था कि जिधर भी देखो करुण-क्रंदन सुनाई दे रहा था। गलियों में महिलाएं और पुरुष जम्मू बस हादसे में मरने वाले अपने परिजनों के शवों को देखने के लिए बेताब थे। अश्रुपूरित नेत्रों से लोग एक-दूसरे को समझा रहे थे। 
विज्ञापन


यह दृश्य हर व्यक्ति को अंदर तक झकझोर रहा था। मथुरा रेलवे स्टेशन पर झेलम एक्सप्रेस से उतरे मासूम सहित पांचों शवों को गांव मझोला में सीधे अंत्येष्टि स्थल पर ले जाया गया। गांव मझोला से 10 लोग वैष्णो देवी दर्शन के लिए गए थे। 30 मई को अखनूर में हुए बस हादसे में मझोला के मासूम सहित पांच की मौत हो गई थी। 
विज्ञापन


मौत की सूचना के बाद से इस गांव में गम का माहौल बना हुआ था। शनिवार की रात को शव पहुंचते ही हर तरफ चीख-पुकार सुनाई देने लगी। मथुरा में झेलम एक्सप्रेस से मासूम प्राची, रेनू, जय प्रकाश, राहुल और रणवीर के शवों को उतारकर चार एंबुलेंस से मझोला लाया गया। एंबुलेंस सीधे रात 2:40 बजे गांव के अंत्येष्टि स्थल पर पहुंची थीं। गलियों से रोते हुए महिलाएं अपने परिजनों के चेहरे को देखने के लिए दौड़ पड़ीं।
विज्ञापन
विज्ञापन


ताबूतों को खोलकर अपनों को देखा आखिरी बार
ताबूतों में रखकर शव गांव मझोला पहुंचे थे। शवों को देखने के लिए भीड़ लगी हुई थी। ग्रामीण और मरने वालों के परिजन आखिरी बार अपनों को देखने के लिए बेताब थे। जैसे ही ताबूत खोले तो लोगों को चीख निकल पड़ी। परिजन अपनों के शवों से लिपटकर रोने लगे। आलम यह था कि अंत्येष्टि स्थल पर एक साथ रखे पांचों शवों की वजह से चारों ओर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। परिजन बार-बार ताबूतों को खुलवाकर मरने वालों के चेहरों को देखने की जिद करते नजर आए।

बगैर सिर के गांव पहुंचा राहुल का शव
इस बस हादसे में लटूरी के पुत्र राहुल की भी मौत हुई थी। गांव में जैसे ही राहुल का शव पहुंचा तो शव को देखते ही परिजनों के होश फाख्ता हो गए। राहुल के बिना सिर के शव को देख परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।

कमेरौ पूत चलो गयौ, अब घर कैसे चलैगो..
मृतक राहुल की मां भूरिया अपने बेटे का शव देखकर फूट-फूट कर रोने लगीं। रोते-रोते एक ही पुकार थी कि मेरो कमेरौ पूत चलौ गयौ, अब घर कैसे चलेगौ। परिवार के की पूरी जिम्मेदारी राहुल के कंधों पर थी। राहुल की मौत के बाद परिवार के सामने घर चलाने का संकट है। बेटे का बगैर सिर का शव देख भूरिया अंत्येष्टि स्थल पर बेसुध होकर बार-बार गिर रही थीं। ग्रामीण उन्हें संभालने में लगे हुए थे। 

'मुंह में भर गया था खून... उल्टा कर निकाला'

हादसे में घायल राजेंद्र ने अपनी जुबानी मंजर बयां किया। बताते वक्त राजेंद्र की आखों भरी हुई थीं। उन्होंने कहा, बस एक पेड़ से टकराते हुए सीधे खाई में पहुंची। बस में सबकुछ तहस-नहस हो चुका था। मैंने खुद को बस के अंदर एक हिस्से को पकड़ कर सुरक्षित किया। हालांकि मुझे चोटें आईं, लेकिन मैंने खुद को संभालते हुए बस में पड़े घायलों बाहर निकाला। 
 

बसों में कुछ घायल एक दूसरे पर पड़े हुए थे। खून में सभी लथपथ थे। जैसे ही मौके पर पुलिसकर्मियों पहुंचे तो उनके साथ मैं खुद लोगों को निकालने में जुट गया था। लोगों को बाहर निकाला तो उनके मुंह में खून भरा हुआ था, सांस लेने में उन्हें परेशानी हो रही थी। इन लोगों को उल्टा कर खून को निकाला। राजेंद्र बोले, जीवन में मैंने इस तरह का मंजर कभी नहीं देखा।

'मैं अपने परिवार के दो सदस्यों को खो चुका हूं, अब औरों को नहीं खोना चाहता..'
नगला उदय सिंह की मृतक धर्मवती के पति राधेश्याम ने शवों के मथुरा से एंबुलेंस के जरिये गांव में आने से पूर्व एसडीएम लवगीत कौर से निवेदन करते हुए कहा कि मैं अपने परिवार के दो सदस्यों को खो चुका हूं, अब औरों को नहीं खोना चाहता। इन शवों को सूर्योदय होने के बाद महज 15 मिनट के लिए घर पर लेकर जाऊंगा। ग्रामीणों के इस निर्णय के बाद प्रशासन ने अपनी सहमति देते हुए गांव के बाहर ही एक कोल्ड स्टोर में शवों को एंबुलेंस में रखा रहने दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed