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Jammu News: दोबारा हो परीक्षा, ग्रेस मार्क्स भी दिए जाएं
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एबीवीपी ने जम्मू-कश्मीर स्कूल शिक्षा बोर्ड के अधिकारियों को सौंपा ज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। प्रदेश में मौजूदा समय में बोर्ड परीक्षाएं (10वीं व 12वीं) जारी हैं। गत दिनों हुई बारिश और बर्फबारी के चलते कई बच्चे परीक्षा नहीं दे पाए हैं। ऐसे में फिर से परीक्षा करवाने व सिलेबस के बाहर से पूछे गए प्रश्नों के लिए ग्रेस मार्क्स देने की मांग की जा रही है। रविवार को आखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के एक प्रतिनिधिमंडल ने जम्मू-कश्मीर स्कूल शिक्षा बोर्ड के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा है।
ज्ञापन के माध्यम से बताया की परीक्षा देने से वंचित रहे बच्चों के लिए दोबारा परीक्षा आयोजित की जाए, ताकि शैक्षणिक नुकसान होने से रोकने जा सके। 10वीं और 11वीं की परीक्षा में आउट-ऑफ-सिलेबस प्रश्नों पूछे गए थे। ऐसे में प्रभावित छात्रों के लिए ग्रेस मार्क्स की सुविधा हो।
बोर्ड के अधिकारियों ने एबीवीपी कश्मीर को आश्वासन दिया कि मामले की समीक्षा कर जल्द उचित कार्रवाई करेंगे। एबीवीपी के राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद के सदस्य अकील अहमद तांत्रे ने कहा कि अगर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई तो हमें सड़कों पर उतरेंगे। एबीवीपी छात्रों के शैक्षणिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। प्रदेश में मौजूदा समय में बोर्ड परीक्षाएं (10वीं व 12वीं) जारी हैं। गत दिनों हुई बारिश और बर्फबारी के चलते कई बच्चे परीक्षा नहीं दे पाए हैं। ऐसे में फिर से परीक्षा करवाने व सिलेबस के बाहर से पूछे गए प्रश्नों के लिए ग्रेस मार्क्स देने की मांग की जा रही है। रविवार को आखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के एक प्रतिनिधिमंडल ने जम्मू-कश्मीर स्कूल शिक्षा बोर्ड के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा है।
ज्ञापन के माध्यम से बताया की परीक्षा देने से वंचित रहे बच्चों के लिए दोबारा परीक्षा आयोजित की जाए, ताकि शैक्षणिक नुकसान होने से रोकने जा सके। 10वीं और 11वीं की परीक्षा में आउट-ऑफ-सिलेबस प्रश्नों पूछे गए थे। ऐसे में प्रभावित छात्रों के लिए ग्रेस मार्क्स की सुविधा हो।
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बोर्ड के अधिकारियों ने एबीवीपी कश्मीर को आश्वासन दिया कि मामले की समीक्षा कर जल्द उचित कार्रवाई करेंगे। एबीवीपी के राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद के सदस्य अकील अहमद तांत्रे ने कहा कि अगर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई तो हमें सड़कों पर उतरेंगे। एबीवीपी छात्रों के शैक्षणिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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