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हेरोइन के महंगे शौक में फंसे जम्मू के युवा
amarujala.com- Presented by: चंद्रा पाण्डेय
Updated Tue, 10 Oct 2017 11:32 AM IST
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- फोटो : demo photo
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हेरोइन के महंगे नशे की दल दल में युवा तेजी से धंसते जा रहे हैं। नशे की लत को पूरा करने के लिए ग्रुप सिस्टम का सहारा लिया जा रहा है। पैसे के खिंचाव से पाश कालोनियों में नशे का यह शौक बढ़ा है। इसमें 18-25 आयु वर्ग के युवा प्रभावित हैं। ऐसे नशे में असुरक्षित यौग संबंध स्थापित करके एचआईवी, हेपेटाइटिस बी, सी आदि संक्रमित बीमारियों का खतरा बढ़ा है।
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अधिकांश मामलों में निडल से सामूहिक तौर पर नशा लिया जा रहा है। नशे के इस खेल में युवतियां भी शामिल हैं। नशे के स्वाद को पूरा करने के लिए अपराध का सहारा भी लिया जा रहा है। साइक्रेटरी अस्पताल जम्मू के ओपियड सब्सिट्यूट थेरेपी (ओएसटी) सेंटर में हेरोइन सहित अन्य दूसरे नशों से पीडि़त होकर पहुंचने वालों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।
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अस्पताल के ओएसटी सेंटर में वर्ष 2013 से 2015 तक 250 नशे के पीडि़तों के मामले पंजीकृत हुए थे।
लेकिन वर्ष 2016 के बाद अब तक 536 मामले पंजीकृत हो चुके हैं। इनमें ज्यादातर मामले हेरोइन के हैं। समाज में तेजी से फैल रहे इस नशे से 20-30 फीसदी पीडि़त ही अस्पताल तक पहुंच रहे हैं। जबकि एक बड़ी संख्या जागरूकता के अभाव में मौत को गले लगा रही है। निजी क्लीनिकों में भी बड़ी संख्या में ऐसे मामले रिपोर्ट हो रहे हैं। हेरोइन के नशे की लत को पूरा करने के लिए पानी के साथ ड्रग्स मिलाकर इंजेक्शन से शरीर में डाल दिया जाता है।
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साइक्रेटरी अस्पताल के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डा. जगदीश थापा के अनुसार हेरोइन नशे के महंगे शौक में पहले यह ड्रग्स रोजाना तीन-चार हजार में रुपये ली जाती है। लेकिन धीरे धीरे डोज बढ़ने पर इसकी कीमत मोटी हो जाती है। इस ड्रग्स को लेने से अमूमन ऐसे नशेडि़यों में फेफड़ों की इंफेक्शन रहती है। डोज न लेने पर शरीर में जबरदस्त दर्द, शरीर का टूटना, नाक और मुंह से पानी चलना, कमजोरी महसूस करना आदि समस्या होती है।
ओएसटी सेंटर की इंचार्ज मेडिकल आफिसर डा. चारू बाली के अनुसार सेंटर में रोजाना 100-150 मरीज पहुंचते हैं। पीडि़तों को वैकल्पिक थैरेपी में बीमारी के हिसाब से ब्यूपरीनारफीन टेबलेट की डोज दी जाती है।