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जम्मू-कश्मीर : दूरदराज गांव में पानी का संकट, कई लड़कियों ने छोड़ दिया स्कूल
Mon, 22 Nov 2021 12:59 AM IST
दुष्यंत शर्मा
एजेंसी, भद्रवाह
एजेंसी, भद्रवाह
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 22 Nov 2021 12:59 AM IST
सार
डोडा के चेनारा गांव में दो साल से है पानी का संकट। पानी ढोने और उसे छानकर पीने लायक बनाने में लग जाते हैं आठ से दस घंटे।
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Bhaderwah demo pic
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
डोडा जिले के चेनारा गांव में जल संकट के चलते कई लड़कियों ने स्कूल की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी है। गांव के कुदरती चश्मे सूख गए हैं। लोगों को जंगल क्षेत्र में जाकर पानी दूर स्थित चश्मों से ढोना पड़ता है। पानी लाने और फिर उसे छानकर पीने लायक बनाने में रोजाना आठ से दस घंटे लग जाते हैं। गरीबी रेखा से निचली श्रेणी में जिंदगी बसर कर रहे गुज्जर परिवारों वाले चेनारा गांव में पानी ढोने का काम ज्यादातर लड़कियों को ही करना पड़ रहा है। पानी की तलाश और उसकी ढुलाई के बीच तालीम आ रही थी, जिसके चलते 15 से ज्यादा लड़कियों ने स्कूल जाना ही छोड़ दिया।
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जिला मुख्यालय से 57 किलोमीटर दूर मिसराता पंचायत के गांव चेनारा गांव की 18 वर्षीय रुबीना बानो ने बताया कि उसने 12वीं तक पढ़ाई की है। उसे पढ़ने का बहुत शौक है लेकिन गांव में पानी से जरूरी कुछ भी नहीं है। उसे पानी ढोने के लिए रोजाना जंगल क्षेत्र के कई चक्कर काटने पड़ते हैं। घंटों इसी में लग जाते हैं। इसलिए उसने आगे पढ़ाई नहीं की। 16 वर्षीय फातिमा ने कहा कि ज्यादातर समय पानी ढोने में लग जाता है। आठवीं कक्षा की दो बार परीक्षा दी लेकिन पढ़ाई न होने की वजह से वह इम्तिहान पास नहीं कर पाई। अब वह पढ़ाई छोड़ चुकी है।
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स्थानीय निवासी अब्दुल रशीद गुज्जर ने कहा कि पाइप के जरिये गांव तक पानी पहुंचाने के आश्वासन तो सुनने को मिले लेकिन हकीकत इससे दूर है। दो वर्ष में गांव की 15 लड़कियों स्कूल में पढ़ाई छोड़ चुकी हैं। गांव के सरपंच सतीश कोतवाल ने कहा कि दो वर्ष से जल संकट बना हुआ है। मांग करने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही है। वहीं, जल शक्ति विभाग के कार्यकारी अभियंता डोडा हरजीत सिंह ने कहा कि गांव में पाइपलाइन नहीं पहुंची है। जल्द ही टीम भेजकर जलशक्ति अभियान के तहत गांव में पानी पहुंचाया जाएगा।
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