गजब: बिना टेंडर के ही आ गया सरकारी उड़न खटोला
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रियासत में अति महत्वपूर्ण व्यक्तियों (वीआईपी) की मूवमेंट के लिए जम्मू-कश्मीर के नागरिक उड्डयन विभाग की ओर से खरीदे गए 20 करोड़ के अगस्ता ए-109 ई हेलीकाप्टर की खरीद गैर पारदर्शी तरीके से हुई है। यह खुलासा सोशल, जनरल, इकोनामिक (नान पीएसयू) सेक्टर के लिए कैग रिपोर्ट 2014 में किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार दो इंजन वाले हेलीकाप्टर की खरीद के लिए सरकार ने 2004 में उच्च स्तरीय कमेटी का गठन कर फैसला लिया कि नागरिक उड्डयन निदेशक कंपनियों को शार्ट लिस्ट कर फैसला लें।
निदेशक ने पायलट और इंजीनियर्स की कमेटी में तीन हेलीकाप्टरों को शार्ट लिस्ट किया। इनमें यूरोकाप्टर ईसी 135 (ईसी) , अगस्ता 109 पावर (एपी), एमडी 900 एक्सप्लोरर (एमडी) शामिल थे।
कमेटी ने इसे बताया सबसे बेहतर
कमेटी ने ईसी और एपी कंपनियों में से जून 2004 में अगस्ता 109 पावर (एपी) की खरीद की सिफारिश की। इसे स्थानीय परिस्थितियों में तकनीकी रूप से बेहतर और किफायती बताया।
सरकार ने प्रस्ताव को जून 2005 में मंजूर कर अगस्ता 109 पावर (एपी) हेलीकाप्टर की खरीद के लिए भारतीय मुद्रा में 20 करोड़ (4.41 अमेरिकी डालर) की राशि को मंजूर कर दिया। नागरिक उड्डयन निदेशक ने जनवरी 2007 में खरीद की प्रक्रिया पूरी कर ली।
रिकार्ड के जांच में पाया गया है कि खरीदारी में ओपन या ग्लोबल टेंडर की प्रक्रिया के लिए न तो टेंडर आमंत्रित करने के लिए आधिकारिक नोटिस जारी हुआ और न ही सीमित टेंडरिंग आधार पर तीन कंपनियों को शार्ट लिस्ट किया गया।
असली कीमत भी पता नहीं की
यहां तक की यह पता होते हुए भी कि राजस्थान सरकार ने भी अगस्ता 109 पावर (एपी) हेलिकाप्टर की खरीद की है। खरीद के मूल्य को जांचने की भी कोशिश नहीं की गई।
इस मामले को सरकार के ध्यान में मार्च 2014 में लाया गया। नागरिक उड्डयन विभाग के आयुक्त ने बताया कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी ने विभाग की सिफारिशों को मंजूर किया था और राज्य कैबिनेट ने भी इसे मंजूरी प्रदान की थी।
दो इंजन वाले हेलिकाप्टर की खरीद के लिए ठेके की अलाटमेंट से पूर्व जरूरी टेंडरिंग प्रक्रिया होनी चाहिए थी।