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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   J&K: New generation of Kashmiri Pandits abroad, elders ready to return to Kashmir with conditions, demand from

J&K: कश्मीरी पंडितों की नई पीढ़ी विदेश में, बुजुर्ग शर्तों के साथ कश्मीर लौटने को तैयार, सरकार से की मांग

Tue, 17 Sep 2024 04:56 PM IST
निकिता गुप्ता अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: निकिता गुप्ता Updated Tue, 17 Sep 2024 04:56 PM IST
सार

जगती कॉलोनी में रह रहे कश्मीरी पंडितों की नई पीढ़ी विदेश में नौकरी कर रही है, जबकि बुजुर्ग कश्मीर लौटने के लिए सरकार से शर्तों के साथ समाधान की मांग कर रहे हैं।

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J&K: New generation of Kashmiri Pandits abroad, elders ready to return to Kashmir with conditions, demand from
कश्मीरी पंडित समुदय की महिलाएं

विस्तार

जम्मू के जगती टाउनशिप कॉलोनी में रह रहे कश्मीरी पंडितों की नई पीढ़ी विदेश में है। उनके बच्चे अमेरिका, कनाडा, इंग्लैंड, आस्ट्रेलिया समेत अन्य देशों में नौकरी कर रहे हैं। कुछ जम्मू और कश्मीर में सरकारी नौकरी में हैं, बड़े पदों पर भी हैं। कॉलोनी में रह रहे बुजुर्ग कहते हैं कि हम क्यों नहीं लौटेंगे कश्मीर, बिल्कुल चले जाएंगे। वह हमारी जन्मभूमि, मातृभूमि है। मगर वापस जाने की शर्तें हमारी होंगी। दिल्ली, मुंबई में कश्मीरी पंडितों के नाम से चलने वाली संस्थाएं इस बात का फैसला नहीं करेंगी कि हम लोग कब और कैसे जाएंगे। यह फैसला तो यहां रहने वाले 4250 परिवार ही करेंगे।

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पंडितों का एक दर्द यह भी है कि मुंबई, दिल्ली समेत देश के कुछ और हिस्सों में कश्मीरी पंडितों के नाम से संस्थाएं चल रही हैं। वह हमारे वापस लौटने की मांग करते हैं, सरकारों से बात करते हैं। समझ नहीं आता कि इन संस्थाओं के लोग कौन हैं। यह कभी विस्थापित तो रहे नहीं। इनमें से कभी कोई हमारी कॉलोनी में भी नहीं आया। न यहां की दिक्कतों को समझा। हमारे संघर्ष, मौजूदा हालात और मनोस्थिति को भी नहीं समझते हैं फिर ये कौन होते हैं हमारे बारे में फैसला लेने वाले। 64 वर्षीय चमनलाल पंडित कहते हैं कि सरकार अपना एक नुमाइंदा हमारे बीच भेजे। कॉलोनी के लोगों से बात करे, हमारी शर्तेें सुने और हम चले जाएंगे वापस कश्मीर। वह बताते हैं कि देश में कश्मीरी पंडितों की सबसे बड़ी कॉलोनी यही है और यही दुर्दशा की भी शिकार है।

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24 साल हो गए हैं यहां के भवनों को बने मगर कभी मरम्मत नहीं कराई गई। निर्माण के समय भी घटिया निर्माण कराया गया। राम प्रकाश भट्ट बताते हैं कि 70 फीसदी से अधिक युवा विदेश में हैं। नई पीढ़ी के कुछ ही बच्चे कॉलोनी में हैं और वह निजी कारणों से बाहर नहीं जा पाए तो जम्मू में ही निजी कंपनियों में नौकरी कर रहे हैं। सुमन कहती हैं कि जो बच्चे अभी यहां इंटर या ग्रेजुएशन कर रहे हैं, उनका क्या होगा। इन सब पर भी तो बात करो। सिर्फ बसाएंगे..बसाएंगे कहने से तो कुछ नहीं होगा न।

कश्मीरी पंडितों का कहना है कि वापस जाने में भी तमाम मसले हैं। हमारा पुश्तैनी घर दिलवा नहीं पाओगे। अधिकतर घर ऐसी जगहों पर हैं जिनकी कीमत आज करोड़ों में है। सरकार खाली करवा देगी तो उसमें इस समय रह रहे व्यक्ति के पास से करोड़ों का घर जाएगा तो रंजिश बढ़ेगी। दूसरा इस समय निजी कंपनियों में नौकरी कर रहे हमारे बच्चों को जम्मू में कहां नौकरी दोगे। इसके अलावा ओवरएज जो युवा हैं, उनके बारे में क्या सोचा है। चमन लाल पंडित कहते हैं कि यह कोई खेल नहीं है। वापस बसने में जो तमाम मसले हैं उन पर विस्तार से बात होने और समाधान निकालने की जरूरत है। अंतिम शर्त और सबसे जरूरी शर्त सुरक्षा ही रहेगी।

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