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जम्मू-कश्मीर: कोरोना की चिंता छोड़ परिवार के साथ बिताएं समय
Tue, 18 May 2021 03:27 PM IST
करिश्मा चिब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: करिश्मा चिब
Updated Tue, 18 May 2021 03:27 PM IST
सार
दुनिया में क्या चल रहा है, जरूर जाने पर दिन में केवल एक बार। कोरोना पर कम सोचें इससे चिंता और निराशा दूर होगी।
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जम्मू कश्मीर में कोरोना वायरस
- फोटो : बासित जरगर
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विस्तार
कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए प्रदेश में कोरोना कर्फ्यू जारी है। ऐसे में ज्यादातर लोग घरों में ही हैं। बच्चे तो लंबे अर्से से घरों में हैं। इस दौर में मन को शांत रखना और संयम के साथ जिंदगी बिताना सभी के लिए चुनौतीपूर्ण है। व्यक्ति कितनी भी कोशिश कर ले, एक वक्त स्थिति ऐसी आती है कि वो ऊब जाता है।
इससे वह चिंता में डूब सकता है और इसके कारण अवसाद में जा सकता है। साइकोलाजिस्ट डॉ. जगदीश थापा का कहना है कि दिनचर्या में बेहतर तौर तरीकों को अपनाकर लॉकडाउन या कोविड कर्फ्यू के बीच भी जिंदगी को चिंतामुक्त, खुशहाल और स्वस्थ रखा जा सकता है। हमें हर वक्त चिंतित नहीं होना चाहिए। ये न सोचें मैं बीमार हो जाऊंगा।
खुद को व्यस्त रखने के लिए जो मन में आए वो करें, अच्छा लगेगा। घर परिवार के दूसरे सदस्यों के साथ बात करें। उनको वक्त दें। परिवार से नियमित संपर्क में रहें। दुनिया में क्या चल रहा है, जरूर जाने पर दिन में केवल एक बार। कोरोना पर कम सोचें इससे चिंता और निराशा दूर होगी।
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यह भी पढ़ें- कोरोना का कहर: भाजपा नेता प्रो. चमन के निधन से शोक में डूबा जम्मू-कश्मीर, उपराज्यपाल ने कही यह बात
डॉ. जगदीश थापा के अनुसार आराम से घर पर बैठें, मन को पूरी तरह से शांत रखें। ज्यादा सोचेंगे तो चिंता बढ़ेगी। दस सेकेंड तक सांस को रोके फिर उसे छोड़ें। ऐसा अभ्यास दिन में कई बार कर सकते हैं। ऐसा करने से चिंता और डर दूर होगा और आप अच्छा महसूस करेंगे। नियमित समय पर पौष्टिक आहार लेने के साथ पूरी नींद जरूर लें।
घर में पेड़ पौधे हैं तो उनकी देखभाल करें। आपको अच्छा महसूस होगा। आसपास के लोगों से छत से ही सही बात करें। छींक आने पर भी अधिकतर लोगों को यह भय हो जाता है कि कहीं उनको कोरोना तो नहीं। अगर व्यक्ति सरकार के दिशा निर्देशों का पालन कर रहा है। सोशल डिस्टेंसिंग पर ध्यान दे रहा है। घर से बाहर नहीं जा रहा है और अपने हाथ समय-समय पर साफ करता है तो उसको कोरोना होने का चांस नहीं है।
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इससे वह चिंता में डूब सकता है और इसके कारण अवसाद में जा सकता है। साइकोलाजिस्ट डॉ. जगदीश थापा का कहना है कि दिनचर्या में बेहतर तौर तरीकों को अपनाकर लॉकडाउन या कोविड कर्फ्यू के बीच भी जिंदगी को चिंतामुक्त, खुशहाल और स्वस्थ रखा जा सकता है। हमें हर वक्त चिंतित नहीं होना चाहिए। ये न सोचें मैं बीमार हो जाऊंगा।
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खुद को व्यस्त रखने के लिए जो मन में आए वो करें, अच्छा लगेगा। घर परिवार के दूसरे सदस्यों के साथ बात करें। उनको वक्त दें। परिवार से नियमित संपर्क में रहें। दुनिया में क्या चल रहा है, जरूर जाने पर दिन में केवल एक बार। कोरोना पर कम सोचें इससे चिंता और निराशा दूर होगी।
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डॉ. जगदीश थापा के अनुसार आराम से घर पर बैठें, मन को पूरी तरह से शांत रखें। ज्यादा सोचेंगे तो चिंता बढ़ेगी। दस सेकेंड तक सांस को रोके फिर उसे छोड़ें। ऐसा अभ्यास दिन में कई बार कर सकते हैं। ऐसा करने से चिंता और डर दूर होगा और आप अच्छा महसूस करेंगे। नियमित समय पर पौष्टिक आहार लेने के साथ पूरी नींद जरूर लें।
घर में पेड़ पौधे हैं तो उनकी देखभाल करें। आपको अच्छा महसूस होगा। आसपास के लोगों से छत से ही सही बात करें। छींक आने पर भी अधिकतर लोगों को यह भय हो जाता है कि कहीं उनको कोरोना तो नहीं। अगर व्यक्ति सरकार के दिशा निर्देशों का पालन कर रहा है। सोशल डिस्टेंसिंग पर ध्यान दे रहा है। घर से बाहर नहीं जा रहा है और अपने हाथ समय-समय पर साफ करता है तो उसको कोरोना होने का चांस नहीं है।