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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   J&K: If regularization is not announced, then the employees will stop electricity and water supply for 20 to 7

J&K: नियमितीकरण की घोषणा नहीं, तो 20 से 72 घंटे के लिए बिजली-पानी बंद रखेंगे कर्मचारी, सरकार से मांग रहे इंसाफ

Wed, 19 Mar 2025 06:20 PM IST
निकिता गुप्ता अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: निकिता गुप्ता Updated Wed, 19 Mar 2025 06:20 PM IST
सार

अस्थाई कर्मचारियों ने 30 वर्षों से कम वेतन और नियमितीकरण की मांग को लेकर 20 मार्च से 72 घंटे की हड़ताल की चेतावनी दी है।

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J&K: If regularization is not announced, then the employees will stop electricity and water supply for 20 to 7
अस्थाई कर्मचारी नियमितीकरण की कर रहे मांग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रदेशभर में 54 विभागों में सेवारत अस्थाई कर्मचारी नियमितीकरण की मांग पूरी न होने पर अब बिजली-पानी 20 को शाम आठ बजे से बंद करेंगे। ऐसा इसलिए किया जा रहा है कि कर्मचारी बीते 30 सालों से सेवा दे रहे हैं। लंबे अंतराल के बाद भी सेवा देने के बाद उन्हें महज 311 रुपये मानेदय दिया जा रहा है।

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इससे कर्मचारी सरकार और प्रशासन से खफा हैं।कर्मचारियों का यह भी कहना है कि मौजूदा समय में मिल रहे मानदेय से परिवार को दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करना मुश्किल हो रहा है। सरकार ने 1994 में एसआरओ 64 को लागू किया गया। इसका लाभ चंद कर्मचारियों को मिला। 1995 के बाद से इसका लाभ नहीं मिला। इसी तरह एसआरओ 520 का लाभ कर्मचारियों को नहीं दिया गया।
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इसमें सेवाकाल के आधार पर मानदेय बढ़ने का प्रावधान था। यूटी बनने के बाद इसे बंद कर दिया है। बिजली कारपोरेशन में एसआरओ 381की जगह यूटी बनने के बाद गाइडलाइन फार रेगुलाइजेशन पीडीएल, टीडीएल 2022 लागू की गई है। इसमें कर्मचारियों को नियमित किया जा रहा है। मगर, कार्रवाई रुकी पड़ी है। विवश कर्मचारी अब 20 मार्च शाम आठ बजे से 72 घंटे के लिए कामकाज बंद रखेंगे। अगर, सरकार ने समय पर मांगे मानी तभी कर्मचारियों का आंदोलन रुकेगा।
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नियमतीकरण को लेकर सरकार की तरफ से लगातार आश्वासन दिया जा रहा है लेकिन इस मांग को पूरा नहीं किया जा रहा है। सरकार को चाहिए कि वह लद्दाख में जिस तरह डेलीवेजेज कर्मियों को मानदेय दे रही है वही मानदेय यहां पर भी देकर उनके साथ इंसाफ कर सकती है। इससे हड़ताल को टाला जा सकता है नहीं तो हड़ताल जारी रहेगी। नवदीप सिंह, अस्थाई कर्मचारी जलशक्ति विभाग 

85 महीने का मानदेय अभी बाकी, सरकार इसका भुगतान करे- सरकार जलशक्ति विभाग के अस्थायी कर्मियों का मानदेय 72 महीनों तक का मानदेय बकाया है। इसका हर हाल में भुगतान किया जाए। सरकार लगातार आश्वासन दे रही है लेकिन इस तरफ ध्यान नहीं है। कर्मचारियों के बच्चों, परिवार के पालन पोषण में समस्या आ रही है। मुख्यमंत्री ने छह माह का समय मांगा है वह जरूर देंगे लेकिन कम से कम लद्दाख की तरह यहां पर भी मानदेय बढ़ाया जाए। राजेंद्र सिंह ताज, पदाधिकारी, पीएचई यूनाइटेड इंप्लाइज यूनियन 

जम्मू के साथ हो रहा भेदभाव,सात वर्ष बाद भी नहीं हुए नियमित
एसआरओ 64 के तहत डेलीवेजेज कर्मियों को नियमतीकरण किया जाना था। 1994 से लेकर 2004 तक कुल 855 कर्मियों को नियमित किया गया। वहीं कश्मीर के अंदर 11 हजार से अधिक कर्मियों को नियमित किया गया। यह भेदभाव अभी तक बना रहा। यह अब खत्म होना चाहिए।कर्मचारियों को नियमित किया जाए। मोहन लाल शर्मा, अस्थाई कर्मचारी, जलशक्ति विभाग 

सिंचाई विभाग में भी डेलीवेजेज कर्मियों की संख्या एक हजार से अधिक है। सरकार को चाहिए कि सभी डेलीवेजेज कर्मचारियों का नियमितीकरण किया जाए। 30 वर्ष से अधिक हो गया। इस मुद्दे पर सरकार के आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला है। सरकार कर्मचारी हित में फैसला ले। जयपाल शर्मा, अस्थाई कर्मचारी, सिंचाई विभाग

सिंचाई विभाग के अस्थाई कर्मचारियों की भी नियमितीकरण की मांग है। नौ हजार रुपये में कोई कर्मचारी अपने बच्चों की स्कूल की फीस,परिवार का पालन पोषण कैसे करे। महंगाई लगातार बढ़ रही है। ऐसे में छह माह का समय सरकार मांग रही है वह हम देने को तैयार हैं लेकिन वेतन बढ़ाया जाना चाहिए। प्रदीप कुमार, सिंचाई विभाग 

हमारे जितने संगठन इस नियमितीकरण की लड़ाई को लड़ रहे हैं वह एकता का परिचय दें। एक साथ होकर उपराज्यपाल के सामने अपनी समस्या रखनी होगी। हमारे मन की बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचनी जरूरी है। जब विधायक अपने वेतन को बढ़ाए जाने के लिए तो बात करते हैं लेकिन अस्थाई कर्मचारियों के वेतन को बढ़ाए जाने के लिए कोई बात नहीं हो रही। शशि कुमार अस्थाई कर्मचारी, सिंचाई विभाग

सरकार जब मान रही है कि सभी 54 विभागों के डेलीवेजेज कर्मचारियों की नियमितीकरण की मांग जायज है तो जल्द से जल्द इस मांग को माना जाना चाहिए। इससे कर्मचारियों का भविष्य छिपा है। सरकार लगातार हमें आश्वासन तो दे रही है लेकिन मांग नहीं मान रही है। ऐसे में सरकार को कर्मचारियों के साथ न्याय करना चाहिए। मिथुन कुमार,सिंचाई विभाग

डेलीवेजेज कर्मचारियों के साथ राजनीति हो रही है। जब भी कोई सरकार आती है उसको हमारे अंदर राजनीति नजर आती है। सरकार बनते ही अपनी सुख सुविधाओं के लिए गाड़ियो की खरीद हुई लेकिन कर्मचारियों की नियमितीकरण की मांग पर कोई ध्यान नहीं है। कमेटी बनाकर हम कर्मचारियों का पेट भरने वाला नहीं है। नौ हजार रुपये में कोई कर्मचारी अपनी बेटी को कैसे पढ़ाएगा। इसे बर्दास्त नहीं किया जाएगा। विश्व दुबे, पीएचई विभाग 

डेलीवेजेज कर्मचारियों को रविवार को भी छुट्टी नहीं मिल रही है। कम वेतन से जहां परिवार का पालन पोषण करने पर मजबूर हैं। कर्मचारियेां का जल्द से जलद नियमितीकरण किया जाए ताकि हम एक बेहतर जीवन गुजार सकें। इस तरह सरकार ध्यान दे और एक ठोस फैसला करे। बसंत सिंह, फ्लोरीकल्चर विभाग

सभी विभागों के अस्थाई कर्मचारियेां के नियमितीकरण की फाइल केवल टेबल पर धूल फांक रही है। इसको लेकर लगातार हम संघर्ष कर रहे हैं। बीते दिनों भी धरना प्रदर्शन किया गया है। आगे भी यही रणनीति है कि 21 मार्च को मांगें न मानने को लेकर काम बंद हड़ताल की जाएगी। 30 वर्ष से अधिक समय तक जो काम कर रहे हैं उनको नियमित किया जाए। हर छह माह में डीपीसी की व्यवस्था को कार्रवाई में लाया जाए। सुरजीत, अस्थाई कर्मचारी, बिजली कारपोरेशन 

डेलीवेजेज कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए जो केंद्र शासित प्रदेश के नियम हैं। उनको लागू किया जाए। लद्दाख में जो नियम है उनको यहां पर भी लागू किया जाए। वेतन निर्धारित किया जाए ताकि कर्मचारियों के सामने परिवार चलाने की समस्या न हो। किसी भी द़ुर्घटना मेंं कम से कम एक करेाड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए। गुरनाम सिंह, पीडीडी

सरकार एसआरओ 64 के तहत डेलीवेजेज कर्मचारियों को नियमित किया जाए। हम नौ हजार रुपये ही पा रहे हैं। परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। कर्मचारियेां का कोई अंशदान नहीं काटा जा रहा है, भविष्य अधर में है। यदि मांगे नहीं मानी गईं तो हड़ताल आगे भी इसी तरह जारी रहेगी। अभी नहीं तो कभी नहीं के तर्ज पर हम चल रहे हैं। मोहन लाल शर्मा, अस्थाई कर्मचारी, जलशक्ति विभाग 

सरकार में जब राजनीतिक दलों के लोग आते हैं तो उनकी भाषा बदल जाती है। विधानसभा में बीते दिनों नियमितीकरण को लेकर आवाज उठी। यह तब हुआ जब हम कर्मचारियों ने सड़क पर प्रदर्शन किया लाठी खाई। मुख्यमंत्री छह माह का समय मांग रहे हैं, हम देने को तैयार हैं लेकिन लेह लद्दाख की तर्ज पर हमें वेतन दिया जाए। कम से कम न्यूनतम वेतन तो कर्मचारियों को मिले। मुआवाजा कम से कम 15 लाख रुपये तक मिले। होशियार चिब,पीएचई

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