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विधान परिषद में जम्मू-कश्मीर सरकार को झेलनी पड़ी शर्मिंदगी
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Wed, 18 Jan 2017 09:24 PM IST
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विधानसभा में उपमुख्यमंत्री डॉ. निर्मल सिंह
- फोटो : AMAR UJALA
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विधान परिषद में बुधवार को सरकार को शर्मिंदगी झेलनी पड़ी। सदन में कोई कबीना मंत्री न होने की वजह से भाजपा सदस्य रमेश अरोड़ा की ओर से इस तरफ सदन का ध्यान खींचे जाने के बाद सभी सदस्यों ने वाइस चेयरमैन डा. शहनाज गनेई से मंत्री आने तक सदन की कार्यवाही स्थगित करने का आग्रह किया गया।
सदस्यों के इस पर जोर देने पर वाइस चेयरमैन ने सदन की कार्यवाही को पांच मिनट के लिए स्थगित कर दिया। उपमुख्यमंत्री डा. निर्मल सिंह और कृषि मंत्री गुलाम नबी लोन हंजूरा के सदन में पहुंचने के बाद ही सदन की कार्यवाही फिर से शुरू हुई।
दोपहर 12 बजकर 29 मिनट पर शून्य काल की कार्यवाही के जारी रहने के दौरान भाजपा एमएलसी रमेश अरोड़ा ने प्वाइंट आफ आर्डर लेते हुए कहा कि सदन की अपनी मर्यादा है। यहां पर कबीना मंत्री को मौजूद रहना चाहिए, लेकिन केवल एक राज्य मंत्री अजय नंदा ही यहां पर हैं। सदन की उपेक्षा नहीं होनी चाहिए। यह वैधानिक बिंदु भी है। भाजपा एमएलसी के तर्क के बाद नेकां और कांग्रेस सदस्यों ने भी सदन की कार्यवाही को स्थगित करने पर जोर दिया।
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सदस्यों के दबाव डालने पर वाइस चेयरमैन डा. शहनाज गनेई ने सदन को पांच मिनट के लिए स्थगित कर दिया। सदन की कार्यवाही स्थगित होने के चलते शून्य काल के दौरान कई सदस्य अपने सवाल भी नहीं उठा पाए।
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सदस्यों के इस पर जोर देने पर वाइस चेयरमैन ने सदन की कार्यवाही को पांच मिनट के लिए स्थगित कर दिया। उपमुख्यमंत्री डा. निर्मल सिंह और कृषि मंत्री गुलाम नबी लोन हंजूरा के सदन में पहुंचने के बाद ही सदन की कार्यवाही फिर से शुरू हुई।
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दोपहर 12 बजकर 29 मिनट पर शून्य काल की कार्यवाही के जारी रहने के दौरान भाजपा एमएलसी रमेश अरोड़ा ने प्वाइंट आफ आर्डर लेते हुए कहा कि सदन की अपनी मर्यादा है। यहां पर कबीना मंत्री को मौजूद रहना चाहिए, लेकिन केवल एक राज्य मंत्री अजय नंदा ही यहां पर हैं। सदन की उपेक्षा नहीं होनी चाहिए। यह वैधानिक बिंदु भी है। भाजपा एमएलसी के तर्क के बाद नेकां और कांग्रेस सदस्यों ने भी सदन की कार्यवाही को स्थगित करने पर जोर दिया।
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सदस्यों के दबाव डालने पर वाइस चेयरमैन डा. शहनाज गनेई ने सदन को पांच मिनट के लिए स्थगित कर दिया। सदन की कार्यवाही स्थगित होने के चलते शून्य काल के दौरान कई सदस्य अपने सवाल भी नहीं उठा पाए।