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कश्मीर में आईएसआई के प्रशिक्षित स्नाइपर सक्रिय, दो महीनों में इनके हमलों से 3 जवान हुए हैं शहीद
एजेंसी, श्रीनगर
Updated Sun, 28 Oct 2018 09:17 PM IST
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डेमो पिक्चर
- फोटो : फाइल
कश्मीर घाटी में जैश-ए-मोहम्मद की तरफ से किए जा रहे स्नाइपर हमले सुरक्षा एजेंसियों को लिए चिंता का नया कारण बन रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार घाटी में इस समय आईएसआई चार उच्च प्रशिक्षित स्नाइपर सक्रिय हैं। घाटी में स्नाइपर हमले में सितंबर से लेकर अब तक सुरक्षा बलों के तीन जवान मारे जा चुके हैं। पाकिस्तान के आतंकी संगठनों के इन हमलों ने सुरक्षा एजेंसियों को अपनी रणनीति को नए सिरे से तैयार करने पर मजबूर कर दिया है। खुफिया जानकारी के आधार पर सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश के दो ‘बडी’ ग्रुप सितंबर की शुरुआत में घाटी में प्रवेश कर चुके हैं। एक ग्रुप में दो आतंकी हैं।
अधिकारियों के अनुसार इन आतंकियों को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने स्नाइपर हमले के लिए प्रशिक्षित किया है। इन आतंकियों के पास टेलीस्कोप लगी एम-4 कारबाइन है। एम-4 कारबाइन को अमेरिकी सेना अफगानिस्तान में तालिबान लड़ाकों के खिलाफ प्रयोग कर रही है। संभव है कि आतंकियों के पास ये हथियार तालिबान से जब्त किए गए हथियार और गोला बारूद का हिस्सा हों। पहला स्नाइपर हमला 18 सितंबर को पुलवामा में हुआ था। इसमें सीआरपीएफ के जवान को निशाना बनाया गया था। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार स्नाइपर हमले में त्राल में सशस्त्र सीमा बल व सेना के जवान और नौगाम में सीआईएसएफ जवान की जान जा चुकी है।
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अधिकारियों के अनुसार इन आतंकियों को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने स्नाइपर हमले के लिए प्रशिक्षित किया है। इन आतंकियों के पास टेलीस्कोप लगी एम-4 कारबाइन है। एम-4 कारबाइन को अमेरिकी सेना अफगानिस्तान में तालिबान लड़ाकों के खिलाफ प्रयोग कर रही है। संभव है कि आतंकियों के पास ये हथियार तालिबान से जब्त किए गए हथियार और गोला बारूद का हिस्सा हों। पहला स्नाइपर हमला 18 सितंबर को पुलवामा में हुआ था। इसमें सीआरपीएफ के जवान को निशाना बनाया गया था। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार स्नाइपर हमले में त्राल में सशस्त्र सीमा बल व सेना के जवान और नौगाम में सीआईएसएफ जवान की जान जा चुकी है।
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पहाड़ी के आसपास से कर रहे हमला
स्नाइपर हमलों की सभी घटनाओं में आतंकियों ने पहाड़ी के आसपास से सुरक्षा बलों के परिसर पर हमला किया है। अधिकारियों के अनुसार हमला उस समय किया जा रहा है, जब संतरी चौकी में जवान मोबाइल फोन पर अपने परिवार या दोस्तों से बात कर रहे होते हैं। आतंकी मोबाइल फोन की रोशनी के आधार पर जवानों को निशाना बना रहे हैं। वे इसके लिए नाइट विजन डिवाइस की भी मदद ले रहे हैं। हालांकि सुरक्षा एजेंसियां और जम्मू-कश्मीर पुलिस पहले ही आतंक प्रभावित क्षेत्रों में स्थित कैंप में जवानों और अधिकारियों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी कर चुकी हैं।