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ग्राउंड जीरो: 'हम सरहद के बाशिंदे, हथेली पर रखते हैं जान... अबकी बार होगा गहरा वार'; गुस्से में हैं लोग
Wed, 07 May 2025 08:05 AM IST
शाहरुख खान
नौशेरा से विनोद शर्मा
नौशेरा से विनोद शर्मा
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 07 May 2025 08:05 AM IST
सार
पहलगाम की घटना के बाद से नौशेरा बॉर्डर पर नियंत्रण रेखा से सटे गांवों के लोग गुस्से में हैं। उन्होंने कहा कि हमें धरती पर अपने जवानों पर भरोसा है और ऊपर भगवान पर।
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नौशेरा एलओसी क्षेत्र के नजदीक गेहूं की फसलों को काटते किसान
- फोटो : संवाद
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विस्तार
पहलगाम में हालिया आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। नौशेरा बॉर्डर पर नियंत्रण रेखा (एलओसी) से सटे गांवों भवानी-ए और सरया, झांगड़ में रहने वाले लोग चिंतित जरूर हैं, लेकिन उनके में कोई कमी नहीं आई है। उनका कहना है कि वे सरहद के बाशिंदे हैं हमेशा जान हथेली पर रखकर जीते हैं। उन्हें अपने जवानों पर जमीन पर और ऊपर भगवान पर अटूट भरोसा है।
गांव वालों की प्रेरणा हैं पूर्व सैनिक
भवानी-ए गांव के पूर्व सैनिक अनिल शर्मा और अशोक कुमार, जो अब गांव में रह रहे हैं, ग्रामीणों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। उनका कहना है कि वे पहले भी देश के लिए लड़े हैं और अब भी जरूरत पड़ी तो सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होंगे। वे कहते हैं, हम मौजे दरिया हैं, हर मौसम में अपनी मौज में बहा करते हैं।
शरणार्थी शिविरों में बीता जीवन, पर हौसला बरकरार बॉर्डर विस्थापित कमेटी के प्रधान और पूर्व सरपंच पुरुषोत्तम लाल कहते हैं कि अब उन्हें तनाव और अनिश्चितता के माहौल में जीने की आदत हो गई है। उन्होंने बताया कि उन्होंने कई बार शरणार्थी शिविरों में समय बिताया, लेकिन वहां भी करवा चौथ, दिवाली, लोहड़ी जैसे त्योहार पूरे उत्साह से मनाए। वे कहते हैं, पलट देते हैं हम मौजे-हवादिस अपनी जुर्रत से, हमने आंधियों में भी अक्सर चिराग जलाए हैं।
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पक्के बंकरों की मांग तेज
नौशेरा एलओसी क्षेत्र पंचायत भवानी-ए के पूर्व सरपंच सुनील चौधरी ने ग्राउंड जीरो के सभी गांवों में स्थायी बंकरों के निर्माण की मांग उठाई है। गांववासियों ने एक बैठक कर इस मांग पर सहमति जताई और जल्द ही जिला आयुक्त को ज्ञापन सौंपने की योजना बनाई है। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि जब तक पक्के बंकर नहीं बनते, तब तक वन विभाग ग्रामीणों को गिरी हुई या सूखी लकड़ियों से अस्थायी बंकर बनाने की अनुमति दे।
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गांव वालों की प्रेरणा हैं पूर्व सैनिक
भवानी-ए गांव के पूर्व सैनिक अनिल शर्मा और अशोक कुमार, जो अब गांव में रह रहे हैं, ग्रामीणों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। उनका कहना है कि वे पहले भी देश के लिए लड़े हैं और अब भी जरूरत पड़ी तो सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होंगे। वे कहते हैं, हम मौजे दरिया हैं, हर मौसम में अपनी मौज में बहा करते हैं।
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शरणार्थी शिविरों में बीता जीवन, पर हौसला बरकरार बॉर्डर विस्थापित कमेटी के प्रधान और पूर्व सरपंच पुरुषोत्तम लाल कहते हैं कि अब उन्हें तनाव और अनिश्चितता के माहौल में जीने की आदत हो गई है। उन्होंने बताया कि उन्होंने कई बार शरणार्थी शिविरों में समय बिताया, लेकिन वहां भी करवा चौथ, दिवाली, लोहड़ी जैसे त्योहार पूरे उत्साह से मनाए। वे कहते हैं, पलट देते हैं हम मौजे-हवादिस अपनी जुर्रत से, हमने आंधियों में भी अक्सर चिराग जलाए हैं।
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पक्के बंकरों की मांग तेज
नौशेरा एलओसी क्षेत्र पंचायत भवानी-ए के पूर्व सरपंच सुनील चौधरी ने ग्राउंड जीरो के सभी गांवों में स्थायी बंकरों के निर्माण की मांग उठाई है। गांववासियों ने एक बैठक कर इस मांग पर सहमति जताई और जल्द ही जिला आयुक्त को ज्ञापन सौंपने की योजना बनाई है। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि जब तक पक्के बंकर नहीं बनते, तब तक वन विभाग ग्रामीणों को गिरी हुई या सूखी लकड़ियों से अस्थायी बंकर बनाने की अनुमति दे।
पूर्व सैनिक बोले-इस बार आर-पार की लड़ाई हो झांगड़ गांव के पूर्व सैनिक अनिल शर्मा कहते हैं कि पहलगाम हमले के बाद वे फिर से सेवा देने के लिए तैयार हैं। उनका कहना है कि भारतीय सेना दुनिया में बेमिसाल है और बस एक आदेश की देर है।
महिलाएं भी पीछे नहीं
झांगड़ गांव की निवासी संयोगिता कुमारी कहती हैं कि उन्हें भारतीय सेना पर पूरा विश्वास है। उनका कहना है कि पाकिस्तान की औकात हिमालय के आगे कुछ भी नहीं है। वह आतंकियों को पनाह देता है और दूसरों से भीख मांगता है, लेकिन अब उसे सबक सिखाने का समय आ गया है। उनका कहना है कि सेना के रहते किसी भी प्रकार का डर नहीं है।
झांगड़ गांव की निवासी संयोगिता कुमारी कहती हैं कि उन्हें भारतीय सेना पर पूरा विश्वास है। उनका कहना है कि पाकिस्तान की औकात हिमालय के आगे कुछ भी नहीं है। वह आतंकियों को पनाह देता है और दूसरों से भीख मांगता है, लेकिन अब उसे सबक सिखाने का समय आ गया है। उनका कहना है कि सेना के रहते किसी भी प्रकार का डर नहीं है।
रक्षा कवच हैं माता मंगला
नौशेरा से 18 किलोमीटर दूर भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा से सटे क्षेत्र पंचायत भवानी-ए में स्थित मंगला माता का दरबार प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है। मंगला माता मंदिर कमेटी के उपाध्यक्ष और पंचायत भवानी-ए के पूर्व सरपंच सुनील चौधरी कहते हैं- जब-जब भारत-पाकिस्तान का युद्ध हुआ, माता मंगला की कृपा से भारतीय सेना की जीत हुई। इस मंदिर के प्रति भारतीय सेना का भी अटल विश्वास है। जो भी बटालियन इस क्षेत्र के नजदीक कार्यरत होती है, वह अपनी यूनिट का चिह्न माता के दरबार में बनी एक दीवार पर चस्पा करके जाती है।
नौशेरा से 18 किलोमीटर दूर भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा से सटे क्षेत्र पंचायत भवानी-ए में स्थित मंगला माता का दरबार प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है। मंगला माता मंदिर कमेटी के उपाध्यक्ष और पंचायत भवानी-ए के पूर्व सरपंच सुनील चौधरी कहते हैं- जब-जब भारत-पाकिस्तान का युद्ध हुआ, माता मंगला की कृपा से भारतीय सेना की जीत हुई। इस मंदिर के प्रति भारतीय सेना का भी अटल विश्वास है। जो भी बटालियन इस क्षेत्र के नजदीक कार्यरत होती है, वह अपनी यूनिट का चिह्न माता के दरबार में बनी एक दीवार पर चस्पा करके जाती है।