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पत्थरबाजों की वजह से डरा इंडियन रेलवे, अब नहीं दिखा पाएगा सैलानियों को हसीन वादियां
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Updated Tue, 04 Sep 2018 10:17 PM IST
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open roof train
- फोटो : फाइल
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कश्मीर घाटी पत्थरबाजों की दहशत के कारण उत्तर रेलवे ग्लास रूफ (शीशे की छत वाली) एसी ट्रेन का परिचालन नहीं हो पा रहा है। ट्रेन के परिचालन की घोषण के कई माह बाद भी ट्रेन पटरी पर नहीं दौड़ पाई है। घाटी के खराब हालात और पत्थरबाजी के कारण उत्तर रेलवे अभी इस ट्रेन परिचालन के मूड़ में नहीं है।
घाटी में हिंसा और पत्थरबाजी के कारण रेलवे की संपत्ति का नुकसान होता है। आए दिन हड़ताल के कारण रेल सेवा को बंद करना पढ़ता है। ऐसे में रेलवे प्रशासन अभी शीशे की छत वाली ट्रेन चलाना उचित नहीं समझ रहा है। घाटी में चलाए जानी वाली 40 सीटर एसी कोच बड़गाम रेलवे स्टेशन पर खड़े हैं। रेलवे द्वारा चलाई जाने वाली ग्लास रूफ एसी कोच का मुख्य उद्देश्य पर्यटन को बढ़वा देना है। कोच के परिचालन से यात्रियों को हर मौसम में ट्रेन में बैठकर घाटी की खूबसूरती निहारने का मौका मिलना है। वहीं उत्तरी रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि हालात सामान्य होने के बाद ही ट्रेन के परिचालन पर फैसला लिया जाएगा।
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घाटी में हिंसा और पत्थरबाजी के कारण रेलवे की संपत्ति का नुकसान होता है। आए दिन हड़ताल के कारण रेल सेवा को बंद करना पढ़ता है। ऐसे में रेलवे प्रशासन अभी शीशे की छत वाली ट्रेन चलाना उचित नहीं समझ रहा है। घाटी में चलाए जानी वाली 40 सीटर एसी कोच बड़गाम रेलवे स्टेशन पर खड़े हैं। रेलवे द्वारा चलाई जाने वाली ग्लास रूफ एसी कोच का मुख्य उद्देश्य पर्यटन को बढ़वा देना है। कोच के परिचालन से यात्रियों को हर मौसम में ट्रेन में बैठकर घाटी की खूबसूरती निहारने का मौका मिलना है। वहीं उत्तरी रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि हालात सामान्य होने के बाद ही ट्रेन के परिचालन पर फैसला लिया जाएगा।
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चार करोड़ की लागत से बना है कोच
कोच 40 सीटों वाली है। शीशे की गुंबद वाले कोच को चेन्नई के इंटिग्रल कोच फैक्टरी में तैयार किया गया है। कोच का निर्माण लगभग चार करोड़ रुपये से हुआ है। घाटी में चलने वाली ट्रेन में बैठ कर यात्री घाटी की बर्फीली और हरी भरी वादियों का आनंद ले सकेंगे।