{"_id":"64f0fd76c5cef9e946065075","slug":"illegal-occupation-jammu-news-c-10-jam1005-192839-2023-09-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jammu News: मढ़ बना अवैध प्लाटों का गढ़, सरकार की कमाई काट रहा भू माफिया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jammu News: मढ़ बना अवैध प्लाटों का गढ़, सरकार की कमाई काट रहा भू माफिया
विज्ञापन
- खेती वाली जमीन सस्ती में लेकर उसे आगे प्लाट काट दोगुने दाम पर बेचा जा रहा, आसमान छूने लगे जमीन के दाम
संवाद न्यूज एजेंसी
दोमाना। मढ़ ब्लॉक इन दिनों अवैध प्लाटों और लीज पर ली गई जमीन के मालिकों के मरने के बाद उनकी जमीनें हथियाने का गढ़ बन रहा है। लोगों का कहना है कि इसके अतिरिक्त भू माफिया ग्रामीणों से खेती के उद्देश्य से जमीनें सस्ते में खरीदकर और पावर ऑफ अटार्नी से इन्हें आगे बेचकर इन पर प्लॉट काट रहा है। आरोप है कि भू माफिया गलत तरीके से जमीनों की खरीद-फरोख्त कर सरकार को चूना लगा रहा है। वहीं स्थानीय लोगों ने प्रशासन पर भी आरोप लगाए हैं कि तहसील और पटवार दफ्तर में भू माफियाओं के काम तो तुरंत हो जाते हैं, लेकिन आम जनता के काम हफ्तों तक नहीं होते। अधिकारी केवल आज-कल कर काम को टालकर कई चक्कर लगवाते हैं। मढ़ ब्लॉक के लोगों की कहीं भी सुनवाई नहीं हो पा रही है। लोग जब फरियाद लेकर विभाग के पास जाते हैं तो उल्टा उन्हें कठघरे में खड़ा कर दिया जाता है। मढ़ ब्लॉक और आस-पास के क्षेत्रों में भू-माफिया सक्रिय होने से जमीन के दाम भी आसमान छूने लगे हैं।
न रजिस्ट्री, न इंतकाल, पावर ऑफ
अटार्नी से जमीन बेच रहा भू माफिया
मढ़ ब्लॉक और इसके आस-पास के क्षेत्रों में मौजूदा समय में कृषि भूमि और लीज की जमीन पर प्लाट कटे हैं। इनकी कीमत डेढ़ से दो लाख रुपये प्रति मरला है। इलाके में भू-माफिया से जुड़े लोग जरूरतमंद लोगों की जमीनों की तलाश में रहते हैं। इनके मालिक को कुछेक रकम देकर पावर ऑफ अटार्नी अपने नाम करवा लेते हैं और इसे आगे दोगुने दाम पर बेच देते हैं। इस तरह से भू माफिया खुद न तो उस जमीन की रजिस्ट्री करवाता है और न इंतकाल। इससे सरकार को जमीन की खरीद-बिक्री से कोई भी आय प्राप्त नहीं होती।
-- -- --
तहसील के चक्कर काटने पर भी नहीं मिलता इंसाफ
स्थानीय निवासी रामपाल, दर्शन लाल तथा गारू राम ने बताया कि अपने किसी भी कार्य के लिए यदि तहसीलदार या पटवारी के दफ्तर जाना पड़ जाए तो तहसीलदार अथवा पटवारी या तो मिलते ही नहीं या फिर उन्हें यह कहकर भेज देते हैं कि आज समय नहीं है, कल या परसों आना। लोगों का कहना है कि वे अपने छोटे-छोटे कार्यों के लिए कामकाज छोड़कर तहसील के कई चक्कर काटते हैं, वहीं भू माफिया के काम तुरंत हो जा रहे हैं।
विज्ञापन
-- -- -
किसी को भी कोई समस्या हो तो सीधा मुझसे मिले, यदि कोई अधिकारी लोगों की बात नहीं सुन रहा या फिर लोगों को कोई भी समस्या आ रही है तो वह बेझिझक दफ्तर में आकर बता सकते हैं। मैं स्वयं उनसे बात करूंगा और जमीनों से संबंधित मामले की जांच करूंगा। यदि इसमें किसी की गलती पाई जाती है तो उनसे भी बात करूंगा।
- मनु हंसा, एसडीएम, मढ़
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
दोमाना। मढ़ ब्लॉक इन दिनों अवैध प्लाटों और लीज पर ली गई जमीन के मालिकों के मरने के बाद उनकी जमीनें हथियाने का गढ़ बन रहा है। लोगों का कहना है कि इसके अतिरिक्त भू माफिया ग्रामीणों से खेती के उद्देश्य से जमीनें सस्ते में खरीदकर और पावर ऑफ अटार्नी से इन्हें आगे बेचकर इन पर प्लॉट काट रहा है। आरोप है कि भू माफिया गलत तरीके से जमीनों की खरीद-फरोख्त कर सरकार को चूना लगा रहा है। वहीं स्थानीय लोगों ने प्रशासन पर भी आरोप लगाए हैं कि तहसील और पटवार दफ्तर में भू माफियाओं के काम तो तुरंत हो जाते हैं, लेकिन आम जनता के काम हफ्तों तक नहीं होते। अधिकारी केवल आज-कल कर काम को टालकर कई चक्कर लगवाते हैं। मढ़ ब्लॉक के लोगों की कहीं भी सुनवाई नहीं हो पा रही है। लोग जब फरियाद लेकर विभाग के पास जाते हैं तो उल्टा उन्हें कठघरे में खड़ा कर दिया जाता है। मढ़ ब्लॉक और आस-पास के क्षेत्रों में भू-माफिया सक्रिय होने से जमीन के दाम भी आसमान छूने लगे हैं।
न रजिस्ट्री, न इंतकाल, पावर ऑफ
अटार्नी से जमीन बेच रहा भू माफिया
मढ़ ब्लॉक और इसके आस-पास के क्षेत्रों में मौजूदा समय में कृषि भूमि और लीज की जमीन पर प्लाट कटे हैं। इनकी कीमत डेढ़ से दो लाख रुपये प्रति मरला है। इलाके में भू-माफिया से जुड़े लोग जरूरतमंद लोगों की जमीनों की तलाश में रहते हैं। इनके मालिक को कुछेक रकम देकर पावर ऑफ अटार्नी अपने नाम करवा लेते हैं और इसे आगे दोगुने दाम पर बेच देते हैं। इस तरह से भू माफिया खुद न तो उस जमीन की रजिस्ट्री करवाता है और न इंतकाल। इससे सरकार को जमीन की खरीद-बिक्री से कोई भी आय प्राप्त नहीं होती।
विज्ञापन
तहसील के चक्कर काटने पर भी नहीं मिलता इंसाफ
स्थानीय निवासी रामपाल, दर्शन लाल तथा गारू राम ने बताया कि अपने किसी भी कार्य के लिए यदि तहसीलदार या पटवारी के दफ्तर जाना पड़ जाए तो तहसीलदार अथवा पटवारी या तो मिलते ही नहीं या फिर उन्हें यह कहकर भेज देते हैं कि आज समय नहीं है, कल या परसों आना। लोगों का कहना है कि वे अपने छोटे-छोटे कार्यों के लिए कामकाज छोड़कर तहसील के कई चक्कर काटते हैं, वहीं भू माफिया के काम तुरंत हो जा रहे हैं।
विज्ञापन
किसी को भी कोई समस्या हो तो सीधा मुझसे मिले, यदि कोई अधिकारी लोगों की बात नहीं सुन रहा या फिर लोगों को कोई भी समस्या आ रही है तो वह बेझिझक दफ्तर में आकर बता सकते हैं। मैं स्वयं उनसे बात करूंगा और जमीनों से संबंधित मामले की जांच करूंगा। यदि इसमें किसी की गलती पाई जाती है तो उनसे भी बात करूंगा।
- मनु हंसा, एसडीएम, मढ़