जम्मू-कश्मीर: टारगेट किलिंग पर सरकार को मानवाधिकार आयोग का नोटिस, चार सप्ताह में मांगा जवाब
आयोग ने मीडिया रिपोर्ट्स का स्वत: संज्ञान लेते हुए प्रदेश के मुख्य सचिव और डीजीपी को नोटिस भेजकर घटना के बारे में विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा है। इसमें घटना की जांच की प्रगति और टारगेट किलिंग रोकने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में पूछा है।
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कश्मीर में हाल ही में हुई अल्पसंख्यक समुदाय की टारगेट किलिंग की घटनाओं का राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कड़ा संज्ञान लिया है। आयोग ने जम्मू-कश्मीर सरकार और पुलिस को नोटिस भेजकर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। आयोग ने मीडिया रिपोर्ट्स का स्वत: संज्ञान लेते हुए प्रदेश के मुख्य सचिव और डीजीपी को नोटिस भेजकर घटना के बारे में विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा है। इसमें घटना की जांच की प्रगति और टारगेट किलिंग रोकने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में पूछा है।
आयोग ने कहा है कि आतंकियों की ओर से निर्दोष नागरिकों की हत्या की दुखद घटना देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और नागरिकों के जीने, स्वतंत्रता, समानता के अधिकार के लिए खतरा है। टारगेट किलिंग गैर मुस्लिमों को घाटी से बाहर रखने का प्रयास है।
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यह घाटी में रहने वाले अल्पसंख्यक समुदाय के मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है। आयोग ने सात अक्तूबर को श्रीनगर में सिख शिक्षक सुपिंदर कौर, हिंदू शिक्षक दीपक चंद और पांच अक्तूबर को कश्मीरी पंडित दवा कारोबारी मक्खन लाल बिंदरू व बिहार निवासी गोलगप्पा विक्रेता वीरेंद्र पासवान की हत्या का हवाला दिया है।
गोलगप्पे वाले के परिजनों को 6.25 लाख की वित्तीय मदद
जम्मू-कश्मीर सरकार ने कहा है कि आतंकी हमले में मारे गए गोलगप्पे की रेहड़ी लगाने वाले बिहार निवासी वीरेंद्र पासवान के परिवार को फौरी तौर पर सवा छह लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी गई थी। इसके अलावा पार्थिव शरीर को घर ले जाने के लिए सरकार ने पेश कश की थी। बिहार निवासी मृतक के परिवार के लिए तीन हवाई टिकट आरक्षित थे। लेकिन मृतक के परिवार ने श्रीनगर में ही अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया था। उल्लेखनीय है कि एक महिला का वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें उसने कहा था कि वह पति के अंतिम दर्शना करना चाहती थी, लेकिन किसी ने उसकी मदद नहीं की।