फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   hospitals also affected in massive flood

कश्मीर में अस्पताल भी बाढ़ की चपेट में, डीजल का संकट

Mon, 08 Sep 2014 01:00 AM IST
Updated Mon, 08 Sep 2014 01:00 AM IST
विज्ञापन
hospitals also affected in massive flood

रविवार को मौसम साफ होने के बाद जम्मू संभाग में हालात कुछ सुधरे पर कश्मीर में और बद्तर हो गए। झेलम का तटबंध टूट जाने से नदी का पानी शहर में घुस आया और इमारतों की पहली मंजिलें जलमग्न हो गईं। यहां तक कि अस्पताल भी बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। शहर के प्रमुख इलाकों लाल चौक और राजबाग में सड़कों पर सात से आठ फुट पानी भर आया है।

विज्ञापन


कई इलाकों में दूसरी मंजिल तक पानी पहुंच जाने से लोग परेशान रहे। बिजली का ढांचा ध्वस्त होने से पावर सप्लाई ठप रही। दूर संचार सेवाएं पूरी तरह से ठप पड़ी हुईं हैं। सड़क संपर्क बदहाल है। लोगों का आपस में पूरी तरह से संपर्क कटा हुआ है। झेलम का जलस्तर अभी भी बढ़ रहा है। श्रीनगर के जीबी पंत अस्पताल में 10-12 फुट पानी घुस आने से 400 लोग फंस गए थे।
विज्ञापन


हालांकि, सेना और एनडीआरएफ की टीमों द्वारा सभी मरीजों और तीमारदारों को बाद में सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया था।
बादामी बाग स्थित सैन्य क्षेत्र में भी बाढ़ का पानी घुस गया।

बिजली कटौती ने दिक्कतें बढ़ाईं, जनरेटर भी हांफने लगे

hospitals also affected in massive flood

सोनावार, राजबाग, नवगाम, कुरसू जैसे क्षेत्रों में पानी पूरी तरह भरा हुआ है। कई स्थानों पर बीएसएनएल का ढांचा बाढ़ में ढह गया। ग्रीष्मकालीन राजधानी का लाल चौक, सचिवालय, मैयसूमा, मौलाना आजाद रोड इलाके में 7-8 फुट पानी जमा रहा। लाल चौक में पानी दुकानों में समा गया।

प्रतिष्ठित डल लेक में कई स्थानों पर हाउस बोट को भारी नुकसान हुआ है। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के मद्देनजर लोगों को हाउस बोट छोड़ सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा गया है।

बिजली कटौती ने दिक्कतें बढ़ाईं
बारिश और बाढ़ से बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हुए बिजली ढांचे की मार अस्पतालों पर भी पड़ी है। कई घंटों की कटौती के चलते एसोसिएटेड अस्पतालों का वैकअप सिस्टम जवाब देने लगा है। नियमित सप्लाई कर रहे जनरेटर भी हांफ रहे हैं। अस्पतालों में डीजल की कमी बढ़ने से बिजली संकट बढ़ गया है।

डीजल के लिए पर्याप्त फंड न होने के कारण नियमित सप्लाई करना मुश्किल हो रहा है। जीएमसी के अधीक्षक डा. रविंद्र रतनपाल के अनुसार नियमित बिजली कटौती की समस्या से डीजल की कमी बनी है। लेकिन महत्वपूर्ण यूनिटों में सप्लाई नियमित बनाए रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

जीएमसी में एक ट्रक डीजल की खपत

hospitals also affected in massive flood

उल्लेखनीय है कि गत दिवस जीएमसी की इमरजेंसी में करीब दो घंटे बिजली गुल रही। हालत यह थी कि जनरेटरों में डीजल न होने से इमरजेंसी के नए ब्लाक के आईसीयू यूनिट में वेंटिलेटर भी जवाब दे गए। जिससे आनन फानन में कई मरीजों को वेंटिलेटर से हटाकर एंबोबैग पर डालना पड़ा था। बिजली कटौती के चलते जनरेटर भी लगातार चलने में सक्षम नहीं हैं।

सूत्रों के अनुसार जीएमसी में ही करीब 22 दिन में एक ट्रक डीजल की खपत हो जाती है। इसमें 12000 लीटर डीजल जनरेटरों में फूंका जा रहा है। लेकिन पीछे से लगातार कटौती बढ़ने से डीजल की खपत कई गुणा बढ़ गई है, जबकि लो डेनिस्टी आयल (एलडीओ) में फंड को बढ़ाया नहीं गया है।

एसोसिएटेड अस्पतालों में जनरेटरों को चलाने के लिए आड़े आ रही डीजल की भारी कमी बड़ी चुनौती बन गया है। डीजल की कमी के चलते अब महत्वपूर्ण यूनिटों में जनरेटरों से सप्लाई बहाल रखने को प्राथमिकता दी जा रही है। पिछले कई सालों से एलडीओ के फंड न बढ़ाए जाने से भी ऐसी मुश्किलें बढ़ गई हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed