नहीं मिली हिजबुल के आतंकी को जमानत
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जेएनएफ द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार पाकिस्तान की इंटेलिजेंस एजेंसी आईएसआई के लिए काम करने वाले हिजबुल मुजाहिदीन के आरोपी आतंकी निसार अहमद की जमानत अर्जी प्रिंसिपल सेशन जज रामबन राजेश सेकरी ने खारिज कर दी।
अभियोजन केस के अनुसार 23 मई 2014 को पुलिस थाना बनिहाल को सूचना मिली कि वर्ष 2000 में आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़ने वाला निसार अहमद इन दिनों इलाके में सक्रिय है। सूचना के अनुसार आतंकी गतिविधियों को संचालित करने के लिए वह लाइन आफ कंट्रोल पार कर पीओके पहुंचा।
वहां आतंकी कैंप में प्रशिक्षण पाने के बाद वह पुन: वापस लौटा और इन दिनों इलाके में आतंकी गतिविधियों को संचालित कर रहा है। वहां उसने 13-14 साल ट्रेनिंग ली, ताकि आईएसआई के एजेंट के रूप में उसका उपयोग किया जा सके।
आरोपी से मिले थे आपराधिक दस्तावेज
वह बनिहाल क्षेत्र में आतंकी वारदातों को अंजाम देने लगा। सूचना के आधार पर पुलिस ने निसार के खिलाफ एनेमी एजेंट आर्डिनेंस (ईएओ) के तहत एफआईआर दर्ज की और जांच शुरू कर दी।
जांच के दौरान पुलिस ने उसे बनिहाल बस स्टैंड से गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से कई आपराधिक दस्तावेज व सामान बरामद हुए। इनमें कराची की एयर टिकट, पाकिस्तानी कंपनी के सिम के साथ मोबाइल शामिल था।
प्रिंसिपल सेशन जज ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि देश में आतंक फैलाने के उद्देश्य से सक्रिय था और रियासत की शांति भंग करने में जुटा था। नियंत्रण रेखा के पार जाना, आतंकी कैंपों में ट्रेनिंग लेना और आपत्तिजनक दस्तावेज मिलने से साबित होता है कि आरोपी समाज के लिए खतरा है। ऐसे में उसे जमानत देने से लोगों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। तमाम बातों को देखते हुए आरोपी की जमानत अर्जी अदालत ने खारिज कर दी।