बड़ा खुलासा: हिजबुल मुजाहिद्दीन ने कश्मीर के कॉलेजों में बनाए पत्थरबाजों के समूह
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कश्मीर में सुरक्षा बलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बने छात्र पत्थरबाजों को हिजबुल मुजाहिदीन ने बाकायदा प्रशिक्षण दिया है। हिजबुल के प्रशिक्षित पत्थरबाजों ने गर्मी के दौरान भारी उपद्रव की साजिश के तहत छात्रों में भी अपनी पैठ बनाई है।
साजिश के तहत हिजबुल के प्रशिक्षित पत्थरबाज पहले सुरक्षा बलों पर पथराव कर उन्हें उकसाते हैं और जवाबी कार्रवाई के बाद छात्रों को भड़काते हैं। माहौल अशांत कर सुरक्षा बलों पर हमले के लिए आतंकी संगठन ने यह साजिश बुनी है। सुरक्षा एजेंसियों ने इस आशय की रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी है।
श्रीनगर उपचुनाव और पुलवामा डिग्री कालेज के छात्रों द्वारा पत्थरबाजी के बाद पूरी कश्मीर घाटी में अधिकांश कालेजों के छात्र-छात्राओं में सुनियोजित तरीके से असंतोष फैलाने की कोशिशें हुईं। इस वजह से छात्राएं भी सड़कों पर उतरीं और महिला पत्थरबाजों की संख्या में भी इजाफा हुआ है।
मुठभेड़ के दौरान पत्थरबाजी से आतंकियों को मिली मदद
अब अलगाववादी और आतंकी संगठन अफवाहों के दम पर छात्रों को पत्थरबाजी के लिए उकसा रहे हैं। पुलिस ने छात्रों के मामले में अभिभावकों से संपर्क कर समझाने का अभियान चलाया था, लेकिन यह सिरे नहीं चढ़ पाया। अलगाववादी और आतंकी संगठनों के ग्राउंड वर्कर्स छात्रों के अभिभावकों को भी भड़काने में कामयाब हो रहे हैं।
सुरक्षा बलों और सेना को मुठभेड़ के दौरान पत्थरबाजी में भारी नुकसान झेलना पड़ा है। संयम बरतने के दबाव के कारण भी सुरक्षा बलों के जवानों के घायल होने की घटनाएं बढ़ी हैं। कई स्थानों पर उपद्रवियों और पत्थरबाजों की हिंसा के कारण आतंकी भागने में भी सफल रहे हैं। पिछले दो महीने में 18 जवान शहीद हुए हैं।
इस साल के चार महीने में घाटी में सुरक्षा बलों की आतंकियों के साथ 50 मुठभेड़ हुईं हैं। इस क्रम में 25 आतंकी गिरफ्तार किए गए हैं और 45 आतंकियों को ढेर किया गया है। अकेले मार्च में 33 आतंकियों को सुरक्षा बलों ने ढेर किया। पिछले साल मारे गए आतंकियों की संख्या को इसमें जोड़ने पर आंकड़ा 199 पर पहुंच जाता है।
सवा साल में मुठभेड़ में शहीद हुए 80 जवान
कश्मीर में आतंकियों के साथ मुठबेड़ में सवा साल में 80 जवान शहीद हुए हैं। पिछले साल 60 जवानों को जान गंवानी पड़ी थी। इस साल के चार महीनों में 20 जवान शहीद हुए हैं। इससे पहले 2015 में मठभेड़ के क्रम में 39 जवान शहीद हुए थे। तब सुरक्षा बलों ने 102 आतंकियों को ढेर किया था।