फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   highcourt, psa custody

Jammu News: एसएसपी ने लगाया था आतंकियों के मददगार होने का आरोप, हाईकोर्ट बोला-सामान्य कानून की जगह नहीं ले सकती पीएसए हिरासत

विज्ञापन
highcourt, psa custody
जम्मू। हाईकोर्ट ने सद्दाम हुसैन की जन सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत हिरासत को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि निवारक हिरासत का इस्तेमाल सामान्य कानूनी उपाय की जगह नहीं ले सकता। आतंकियों की मदद के आरोप में हिरासत में लिए गए हुसैन को तुरंत रिहा करने के निर्देश दिए।
विज्ञापन

जस्टिस राजेश सेखरी ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को स्वीकारते हुए कठुआ के जिला मजिस्ट्रेट की ओर से बीते साल 21 मई को जारी हिरासत आदेश को रद्द किया। आरोपी सद्दाम हुसैन कोट भलवाल स्थित केंद्रीय जेल में बंद था। उसने पिता मोहम्मद बट के माध्यम से हिरासत को चुनौती दी थी। कठुआ के एसएसपी ने उसे ओवरग्राउंड वर्कर, आतंकवादी गतिविधियों में मददगार और प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों का हमदर्द बताया था। पुलिस का आरोप था कि हुसैन की गतिविधियां राज्य की सुरक्षा के लिए हानिकारक हैं। उसने क्षेत्र में शांति और सौहार्द को भंग किया है।
विज्ञापन

यह आदेश 2019 में पुलिस स्टेशन सीआईडी जम्मू में दर्ज एफआईआर और याचिकाकर्ता के खिलाफ निवारक कार्रवाई पर आधारित था। याचिकाकर्ता ने बिना सोचे आदेश पारित करने, ठोस सबूतों की कमी, संबंधित दस्तावेज उपलब्ध न कराने, पुराने आरोप पर भरोसा करने और हिरासत के खिलाफ अपना पक्ष प्रभावी ढंग से रखने के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन होने के आधार पर हिरासत को चुनौती दी थी। अदालत ने गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रशासन को नागरिकों की स्वतंत्रता को मनमाने और लापरवाही भरे तरीके से कुचलने की अनुमति नहीं दी जा सकती। जेएनएफ
विज्ञापन
विज्ञापन

---

केवल एक एफआईआर पर आधारित था आदेश
हाईकोर्ट ने पाया कि हिरासत का आदेश केवल एक एफआईआर पर आधारित था। याचिकाकर्ता को 13 जून 2023 को जम्मू के प्रधान सत्र न्यायाधीश ने जमानत दे दी थी। हाईकोर्ट ने गौर किया कि सुनवाई के दौरान जिन पांच अभियोजन गवाहों की जांच की गई थी उनमें किसी ने भी यह नहीं कहा था कि सद्दाम हुसैन को सेना के ठिकानों या राज्य की किसी अन्य सुरक्षा संपत्ति की तस्वीरें लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया है।


---
आवेदन पर फैसला लेने में देरी पर भी आपत्ति जताई
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की हिरासत के खिलाफ उसके अभ्यावेदन पर निर्णय लेने में हुई देरी पर भी आपत्ति जताई। कहा कि बीते साल 24 जुलाई को दिया गया उसका अभ्यावेदन अधिकारियों को 29 जुलाई को प्राप्त हुआ। इसके बावजूद कार्रवाई 19 सितंबर को की गई और उसे 11 अक्तूबर को सूचित किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed