{"_id":"697a7ca5e86e32d939040d30","slug":"highcourt-news-jammu-news-c-10-lko1027-822230-2026-01-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jammu News: मध्यस्थता वाले केसों की बनेगी अलग सूची, रेगुलर केस पहले निपटेंगे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jammu News: मध्यस्थता वाले केसों की बनेगी अलग सूची, रेगुलर केस पहले निपटेंगे
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
- मामलों का बोझ कम करने के लिए मीडिएशन फॉर द नेशनल 2.0 अभियान के तहत स्पेशल ड्राइव
- डिवीजन या सिंगल बेंच के लिए प्रतिदिन 50 मामलों से अधिक नहीं होगी सूची
जम्मू। मीडिएशन फॉर द नेशन 2.0 अभियान के तहत हाईकोर्ट नई रणनीति अपनाने जा रहा है। अब वैवाहिक विवाद, दुर्घटना दावा, घरेलू हिंसा, चेक बाउंस, वाणिज्यिक विवाद, सेवा, उपभोक्ता विवाद, ऋण वसूली, बेदखली, भूमि अधिग्रहण आदि से जुड़े लंबित सामान्य और स्वीकृत मामलों को सूचीबद्ध किया जाएगा। इन्हें रेगुलर मामलों से पहले निपटाया जाएगा, ताकि केसों का बोझ कम हो सके।
इनमें डिवीजन बेंच को संदर्भित मामले शामिल नहीं हैं। इसके अलावा किसी अधिनियम, नियमों या अधिसूचना की वैधता को चुनौती देने वाले मामलों को भी शामिल नहीं किया गया है। अभियान के तहत बनाई जाने वाली विशेष सूची में मामलों की सीमा भी निर्धारित की गई है, जो डिवीजन या सिंगल बेंच के लिए प्रतिदिन 50 मामलों से अधिक नहीं होगी। सूची में बेहद आवश्यक और सामान्य सभी तरह के मामले होंगे।
मीडिएशन के संबंध में बिना रेफरल आदेश के लौटाए सभी मामलों को उनकी पिछली लिस्टिंग स्थिति के अनुसार लिस्ट करना होगा। जैसे-बेहद जरूरी, सामान्य या दाखिल किए गए। जो मामले केवल मीडिएशन के लिए रेफरल के उद्देश्य से लाए गए थे, उन्हें उनकी बारी/रोस्टर के अनुसार लिस्ट किया जाएगा। अन्य सभी मामलों जैसे आपराधिक समझौता योग्य, आपराधिक, विभाजन, बेदखली, भूमि कानून आदि के मामलों को ग्रुपिंग सेल भौतिक सत्यापन के बाद लिस्ट करेगा। चीफ जस्टिस के आदेश के बाद बुधवार को जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल एमके शर्मा की ओर से नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया।
विज्ञापन
25 फरवरी या उससे पहले देना होगा ब्योरा
अगर किसी बेंच को लगता है कि किसी मामले को रेफर करना उचित है तो उसे भी अर्जेंट/ऑर्डिनरी मोशन कॉज लिस्ट को मीडिएशन के लिए भेजा जाएगा। संबंधित वकीलों, पक्षों को भी ऐसे मामलों का ब्योरा संबंधित ज्यूडिशियल ब्रांच में 25 फरवरी या उससे पहले देना होगा, जिनमें समझौते का कोई भी तत्व मौजूद है।
90 दिन में रिपोर्ट न मिलने पर असफल होगी मध्यस्थता
यदि रेफरल के 90 दिन के भीतर कोई रिपोर्ट नहीं मिलती है और पार्टियों के अनुरोध पर या कोर्ट की ओर से समय नहीं बढ़ाया जाता तो मीडिएशन को असफल माना जाएगा। फाइल को नियत समय में लिस्ट किया जाएगा और रिपोर्ट का इंतजार नहीं किया जाएगा। इसके अलावा रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल, हाईकोर्ट जेके और लद्दाख एक स्पेशल कॉज लिस्ट प्रकाशित करेंगे।
विज्ञापन
- डिवीजन या सिंगल बेंच के लिए प्रतिदिन 50 मामलों से अधिक नहीं होगी सूची
जम्मू। मीडिएशन फॉर द नेशन 2.0 अभियान के तहत हाईकोर्ट नई रणनीति अपनाने जा रहा है। अब वैवाहिक विवाद, दुर्घटना दावा, घरेलू हिंसा, चेक बाउंस, वाणिज्यिक विवाद, सेवा, उपभोक्ता विवाद, ऋण वसूली, बेदखली, भूमि अधिग्रहण आदि से जुड़े लंबित सामान्य और स्वीकृत मामलों को सूचीबद्ध किया जाएगा। इन्हें रेगुलर मामलों से पहले निपटाया जाएगा, ताकि केसों का बोझ कम हो सके।
इनमें डिवीजन बेंच को संदर्भित मामले शामिल नहीं हैं। इसके अलावा किसी अधिनियम, नियमों या अधिसूचना की वैधता को चुनौती देने वाले मामलों को भी शामिल नहीं किया गया है। अभियान के तहत बनाई जाने वाली विशेष सूची में मामलों की सीमा भी निर्धारित की गई है, जो डिवीजन या सिंगल बेंच के लिए प्रतिदिन 50 मामलों से अधिक नहीं होगी। सूची में बेहद आवश्यक और सामान्य सभी तरह के मामले होंगे।
विज्ञापन
मीडिएशन के संबंध में बिना रेफरल आदेश के लौटाए सभी मामलों को उनकी पिछली लिस्टिंग स्थिति के अनुसार लिस्ट करना होगा। जैसे-बेहद जरूरी, सामान्य या दाखिल किए गए। जो मामले केवल मीडिएशन के लिए रेफरल के उद्देश्य से लाए गए थे, उन्हें उनकी बारी/रोस्टर के अनुसार लिस्ट किया जाएगा। अन्य सभी मामलों जैसे आपराधिक समझौता योग्य, आपराधिक, विभाजन, बेदखली, भूमि कानून आदि के मामलों को ग्रुपिंग सेल भौतिक सत्यापन के बाद लिस्ट करेगा। चीफ जस्टिस के आदेश के बाद बुधवार को जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल एमके शर्मा की ओर से नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया।
विज्ञापन
25 फरवरी या उससे पहले देना होगा ब्योरा
अगर किसी बेंच को लगता है कि किसी मामले को रेफर करना उचित है तो उसे भी अर्जेंट/ऑर्डिनरी मोशन कॉज लिस्ट को मीडिएशन के लिए भेजा जाएगा। संबंधित वकीलों, पक्षों को भी ऐसे मामलों का ब्योरा संबंधित ज्यूडिशियल ब्रांच में 25 फरवरी या उससे पहले देना होगा, जिनमें समझौते का कोई भी तत्व मौजूद है।
90 दिन में रिपोर्ट न मिलने पर असफल होगी मध्यस्थता
यदि रेफरल के 90 दिन के भीतर कोई रिपोर्ट नहीं मिलती है और पार्टियों के अनुरोध पर या कोर्ट की ओर से समय नहीं बढ़ाया जाता तो मीडिएशन को असफल माना जाएगा। फाइल को नियत समय में लिस्ट किया जाएगा और रिपोर्ट का इंतजार नहीं किया जाएगा। इसके अलावा रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल, हाईकोर्ट जेके और लद्दाख एक स्पेशल कॉज लिस्ट प्रकाशित करेंगे।